शुगर में कब दवा और कब इंसुलिन की जरूरत पड़ती है? जानें सभी जरूरी बातें

Insulin Therapy: जब शरीर में भोजन के बाद या बीच में इंसुलिन के स्तर को मेंटेन करने के लिए बेसल इंसुलिन दिया जाता है

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लंबे समय तक इस रोग से ग्रस्त मरीजों के पैन्क्रियाज इंसुलिन का प्रोडक्शन धीमा कर देते हैं

Diabetes Medications: जीवन शैली से जुड़ी सबसे आम लेकिन खतरनाक स्वास्थ्य परेशानी है हाई ब्लड शुगर। इस वजह से लोगों को डायबिटीज समेत कई दूसरी गंभीर बीमारियों का खतरा रहता है। बता दें कि जो भी लोग खाते हैं उसको पचाने से शरीर में शुगर रिलीज होता है जो ब्लडस्ट्रीम में जाता है। जब रक्त में शर्करा की मात्रा अधिक हो जाती है तो पैन्क्रियाज इंसुलिन रिलीज करता है जो इसे शरीर के दूसरे हिस्सों तक पहुंचाता है। लेकिन मधुमेह रोगियों के शरीर में पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन नहीं बन पाता है। इस वजह से उच्च रक्त शर्करा की स्थिति बनी रहती है।

भारत में डायबिटीज के 77 मिलियन से भी अधिक मरीज हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक इस बीमारी को जड़ से खत्म करना संभव नहीं है लेकिन ब्लड शुगर पर नियंत्रण में रखकर लोग नॉर्मल जिंदगी जी सकते हैं। हालांकि, कई बार रक्त शर्करा के स्तर को काबू में रखने के लिए दवाई और इंसुलिन लेने की नौबत आ जाती है। आइए जानते हैं विस्तार से –

इंसुलिन: हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक टाइप 1 डायबिटीज के मरीजों के शरीर में अपने आप इंसुलिन नहीं बनता है। ऐसे में उन्हें बाहर से इसकी पूर्ति करनी पड़ती है। मरीजों की स्थिति के अनुरूप स्वास्थ्य विशेषज्ञ उन्हें इंसुलिन लेने की सलाह देते हैं।

वहीं, डायबिटीज टाइप 2 के कुछ मरीजों को भी इंसुलिन थेरेपी लेनी पड़ सकती है। बता दें कि लंबे समय तक इस रोग से ग्रस्त मरीजों के पैन्क्रियाज इंसुलिन का प्रोडक्शन धीमा कर देते हैं। ऐसे में उन्हें भी इंजेक्शन के जरिये इंसुलिन लेना पड़ता है।

कब लें इंसुलिन: जब शरीर में भोजन के बाद या बीच में इंसुलिन के स्तर को मेंटेन करने के लिए बेसल इंसुलिन दिया जाता है। वहीं, जब मरीज का ब्लड शुगर अत्यधिक हाई हो जाता है तो बोलस इंसुलिन इस्तेमाल किया जाता है।

हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक जब जीवन शैली में बदलाव और दवाइयों के इस्तेमाल के बावजूद भी मरीजों का HbA1c लेवल 7 प्रतिशत से कम न हो तो उन्हें डॉक्टर इंसुलिन लेने की सलाह दे सकते हैं।

दवाइयों का इस्तेमाल: मधुमेह रोगियों को बगैर डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा नहीं लेनी चाहिए। जो लोग दवा लेते हैं, अगर किसी कारण से वो उनका सेवन करना बंद कर देते हैं तो इससे ब्लड शुगर अनियमित हो सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार अगर मधुमेह के मरीज डाइट और एक्सरसाइज के बावजूद भी ब्लड शुगर पर कंट्रोल नहीं रख पा रहे हैं तो डॉक्टर्स दवाई लेने की सलाह दे सकते हैं। अधिकांशतः टाइप 2 डायबिटीज के मरीज मेटफॉर्मिन दवा का सेवन करते हैं जो लिवर में ग्लूकोज के उत्पादन को कम करता है।