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टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों का कितना होना चाहिए ब्लड शुगर लेवल? यहां देखिये चार्ट

Blood Sugar Level in Diabetes: आइए जानते हैं ब्लड शुगर के मरीजों का ब्लड शुगर लेवल क्या होना चाहिए और टाइप वन और टाइप टू डायबिटीज क्या है, इससे कैसे बचा जा सकता है।

टाइप 1 और टाइप 2 डायबिटीज के मरीजों का कितना होना चाहिए ब्लड शुगर लेवल? यहां देखिये चार्ट
जानिए क्‍या है टाइप वन और टाइप टू डायबिटीज (फोटो- Freepik)

अस्‍वस्‍थ खानपान और शारीरिक रूप से लापरवाही के कारण कई लोग डायबिटीज के शिकार हो जाते हैं। भारत में डायबिटीज का खतरा अन्‍य देशों से अधिक है। यह एक लाइलाज बीमारी है। यह दो प्रकार का होता है- टाइप 1 डायबिटीज और टाइप 2 डायबिटीज, इसके अलावा प्रेग्नेंसी में भी मधुमेह हो जाता है जो एक सीमित समय के लिए होता है और समय के साथ ठीक हो जाता है। एक्‍सपर्ट्स के अनुसार, देश में 95 फीसदी टाइप-2 वाले मरीज हैं और WHO की रिपोर्ट बताती है कि 2030 तक लगभग 9.8 करोड़ लोग इसकी चपेट में आ जाएंगे।

वहीं मधुमेह के मरीजों के स्वास्थ्य की बात करें तो सबसे पहले उन्हें अपने ब्लड शुगर को नियंत्रित करना चाहिए। आइए जानते हैं ब्लड शुगर के मरीजों का ब्लड शुगर लेवल क्या होना चाहिए और टाइप वन और टाइप टू डायबिटीज क्या है, इससे कैसे बचा जा सकता है।

क्‍या है डायबिटीज टाइप 1: इस तरह की डायबिटीज उन लोगों में पायी जाती है, जिनके माता या पिता में भी हो। यानी कि टाइप-1 डायबिटीज वह है जो हमें अनुवांशिक तौर पर होती है। यानी जब किसी के परिवार में मम्मी-पापा, दादी-दादा में से किसी को शुगर की बीमारी हुई हो तो ऐसे लोगों में इस बीमारी के होने की आशंका बढ़ जाती है। दूसरे शब्‍दों में कहें तो जिन लोगों को अनुवांशिक कारणों से डायबिटीज हो तो वह टाइप वन डायबिटीज होता है। यह बीमारी किसी बच्‍चे के जन्‍म से ही हो सकती है।

क्या है डायबिटीज टाइप 2: वयस्कों में अक्‍सर टाइप 2 डायबिटीज के मामले मिलते हैं। एक्‍सपर्ट के अनुसार, डायबिटीज टाइप-2 बहुत अधिक फैट, हाई बीपी, समय पर ना सोना, सुबह देर तक सोना, बहुत अधिक नशा करना और निष्क्रिय जीवनशैली के कारण भी होती है। खानपान की वजह से शरीर में इंसुलिन कम बनने से यह डायबिटीज टाइप-2 हो सकता है।

इन मरीजों के लिए ब्‍लड शुगर की सीमा
18 साल से कम उम्र के टाइप 1 डायबिटीज मरीजों के लिए ब्‍लड शुगर लेवल खाने से पहले 90-130 मिलीग्राम / डीएल और सोने का समय और रात 90-150 मिलीग्राम / डीएल होना चाहिए। गर्भवती महिलाओं के लिए खाने से पहले 95 मिलीग्राम / डीएल से कम, भोजन के 1 घंटे बाद 140 मिलीग्राम/डीएल या उससे कम और भोजन के 2 घंटे बाद 120 मिलीग्राम/डीएल या उससे कम होना चाहिए।

वहीं अगर आपको डायबिटीज नहीं है तो आपका ब्‍लड शुगर लेवल खाने से पहले 99 मिलीग्राम/डीएल या उससे कम और भोजन के 1-2 घंटे बाद 140 मिलीग्राम/डीएल या उससे कम होना चाहिए।

कैसे करें बचाव: हेल्‍थ एक्‍सपर्ट के अनुसार, डायबिटीज टाइप 2 बीमारी से बचने के लिए बेहतर जीवनशैली, समय से सोना, स्‍वस्‍थ खानपान, नशे से दूर रहना आदि चीजों को अपनाकर इस बीमारी से बच सकते हैं।

क्‍या है इलाज: डायबिटीज टाइप-1 की बीमारी जेनेटिक होती है। ऐसे में इसके मरीजों को जीवनशैली का खास ख्‍याल रखना चाहिए। वहीं इस बीमारी से बचने के लिए अच्‍छा खाना और फिजिकल फिटनेस पर ध्‍यान देना चाहिए। डायबिटीज टाइप-1 को इलाज में मरीजों को समय-समय पर इंसुलिन देना होता है। क्योंकि इस स्थिति में शरीर में इंसुलिन बिल्कुल नहीं बनता है।

कितना होना चाहिए डायबिटीज के मरीजों का ब्‍लड शुगर लेवल
अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन के अनुसार , टाइप 1 या टाइप 2 मधुमेह वाले वयस्कों और टाइप 2 मधुमेह वाले बच्चों के लिए खाने से पहले 80-130 मिलीग्राम / डीएल जबकि भोजन के 1-2 घंटे बाद 180 मिलीग्राम / डीएल से कम होना चाहिए।

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