हृदय गति के बार-बार बढ़ जाने को बिल्कुल न करें इग्नोर, हो सकती है Blood Sugar से संबंधित ये गंभीर बीमारी

यह बीमारी ज्यादातर डायबिटीज के रोगियों में पाई जाती है। कई बार इससे ह्रदय गति अचानक बढ़ने लगती है और पसीना आना शुरू हो जाता है।

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ब्लड शुगर या ग्लूकोज शरीर की ऊर्जा का मुख्य स्रोत है। (फोटो क्रेडिट – Freepik)

डायबिटीज से पीड़ित लोगों को अपने ब्लड शुगर के स्तर को नियंत्रित रखने पर विशेष ध्यान देना चाहिए। यह कितनी खतरनाक बीमारी है, इससे आप सभी भली-भांति परिचित होंगे। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, शरीर में शुगर लेवल बढ़ जाना जितना खतरनाक है, उससे कहीं ज्यादा खतरनाक है इसका बहुत ज्यादा कम हो जाना। मेडिकल की भाषा में इस स्थिति को ‘हाइपोग्लाइसीमिया’ के नाम से जाना जाता है।

डायबिटीज वाले लोगों में जब उनके खून में पर्याप्त शुगर की मात्रा नहीं पाई जाती तो उनका शरीर हाइपोग्लाइसीमिया विकसित करता है। यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भिन्न हो सकता है। यह डायबिटीज पीड़ित व्यक्ति में तब होता है जब ब्लड शुगर का स्तर सामान्य से नीचे चला जाता है।

ब्लड शुगर या ग्लूकोज शरीर की ऊर्जा का मुख्य स्रोत है। जैसे, जब किसी का ब्लड शुगर का स्तर असामान्य रूप से कम होता है, तो शरीर के ठीक से काम करने की क्षमता कम हो सकती है। हाइपोग्लाइसीमिया या निम्न ब्लड शुगर तब विकसित होता है जब ब्लड शुगर का स्तर 70 mg/dL या 3.9 mmol/L से नीचे गिर जाता है। इस डायबिटीज जागरूकता माह में आपको इस स्थिति के बारे में जानने की जरूरत है और आप इसके बारे में क्या कर सकते हैं।

हाइपोग्लाइसीमिया कितना आम है?

वेलनेस फिजिशियन और डायबेटोलॉजिस्ट डॉ स्वप्निल शाह ने बताया, ‘टाइप 1 डायबिटीज वाले लोग और टाइप 2 डायबिटीज वाले लोग जो इंसुलिन शॉट लेते हैं या अन्य डायबिटीज दवाओं का सेवन करते हैं उनमें यह स्थिति आम है।’

यह चिंता का विषय क्यों है?

यशोदा अस्पताल के डायबिटीज विशेषज्ञ डॉ दिलीप गुडे ने बताया कि हाइपरग्लेसेमिया (बढ़ा हुआ शुगर) की तुलना में हाइपोग्लाइसीमिया एक बहुत बड़ी समस्या है क्योंकि यह नर्वस सिस्टम और हार्मोन में को बढ़ाता है जिसके परिणामस्वरूप धड़कन की गति बढ़ने के साथ ब्लड प्रेशर भी बढ़ जाता है। आगे उन्होंने कहा कि, ‘इसके बढ़ने के साथ ही हृदय रोग वाले लोगों में दिल का दौरा पड़ सकता है। इसके अतिरिक्त, यदि गंभीर हाइपोग्लाइसीमिया को 20 मिनट से कम समय में उल्टा नहीं किया गया, तो मस्तिष्क को भी गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है।’

डायबिटीज हाइपोग्लाइसीमिया के लक्षण क्या हैं?

MayoClinic.org के अनुसार, डायबिटीज हाइपोग्लाइसीमिया के शुरुआती लक्षणों में यह लक्षण शामिल हैं-

हृदय गति का बढ़ जाना
जी मिचलाना व भूख लगना
किसी स्पष्ट कारण के बिना अचानक पसीना आना
अस्पष्टीकृत कमजोरी महसूस करना
सिरदर्द
चिड़चिड़ापन, चिंता या घबराहट
घबराहट और भ्रम की भावना/गुमराह होना
चिंता करना
सिर चकराना
कंपन

गंभीर हाइपोग्लाइसीमिया में कुछ असामान्य लक्षण विकसित हो सकते हैं, जिनमें दौरे पड़ना व शरीर से चेतना का चला जाना शामिल हैं।

डायबिटीज हाइपोग्लाइसीमिया के कारण क्या हैं?

यह स्थिति ज्यादातर डायबिटीज के रोगियों के उपचार और दवा की खुराक उनके भोजन, दैनिक कार्यक्रम आदि से जुड़ी होती है, यदि रोगी बहुत अधिक इंसुलिन लेता है या डायबिटीज की दवाओं का अधिक सेवन करता है। पर्याप्त खाना नहीं खाना (कम ग्लूकोज लेना) या गलत समय पर गलत भोजन खाता है। डायबिटीज की दवाओं को समायोजित किए बिना बहुत अधिक व्यायाम करना या अगर रोगी अपने दैनिक दिनचर्या को छोड़ देता है तो इसके परिणामस्वरुप निम्न ब्लड शुगर की तकलीफ हो सकती है। अन्य कारणों में शराब पीना, भोजन के बीच लंबा अंतराल या गलत खाना जैसे जंक फूड खाना शामिल है।

डायबिटीज हाइपोग्लाइसीमिया का इलाज क्या है?

MayoClinic.org के अनुसार, ग्लूकोज की गोलियां या फलों का रस जैसे साधारण चीनी स्रोत को खाने या पीने से कोई भी अपना ब्लड शुगर तेजी से बढ़ा सकता है। इसमें कहा गया है, ‘परिवार और दोस्तों को बताएं कि क्या लक्षण देखने चाहिए और अगर आप खुद इस स्थिति का इलाज नहीं कर पा रहे हैं तो क्या करें।

डॉ शाह ने बताया कि जहां हल्के से मध्यम हाइपोग्लाइसीमिया का आसानी से इलाज किया जा सकता है, वहीं गंभीर हाइपोग्लाइसीमिया के कारण पासिंग आउट, कोमा और शायद कभी मौत जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं।

डॉ शाह के अनुसार, डायबिटीज वाले लोगों को हाइपोग्लाइसीमिया को रोकने के लिए निम्नलिखित उपाय करने चाहिए:

ग्लूकोमीटर का उपयोग करके नियमित रूप से ब्लड शुगर के स्तर की जांच करना

दैनिक भोजन और नाश्ते में पर्याप्त कार्बोहाइड्रेट शामिल करना सुनिश्चित करें

कैंडी, फलों का रस या नाश्ता साथ में ले जाना

किसी भी शारीरिक गतिविधि या व्यायाम से पहले, दौरान और बाद में ब्लड शुगर के स्तर की निगरानी करना, डॉक्टर के अनुसार दवाएं लेना

नियमित रूप से अपने डॉक्टर से संपर्क करें और निर्धारित दवाओं का सेवन करें

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