कई बार पेट में गैस की शिकायत न होने के बावजूद पेट भारी, तना हुआ या फूला हुआ महसूस हो सकता है। लोग अक्सर इसे सामान्य पाचन समस्या समझकर नजरअंदाज कर देते हैं या बिना डॉक्टर की सलाह के दवाइयां लेने लगते हैं। हालांकि, हर बार पेट फूलने की वजह सिर्फ गैस नहीं होती। खराब खान-पान, अनियमित जीवनशैली, कब्ज, तनाव और कुछ पाचन संबंधी समस्याएं भी ब्लोटिंग की वजह बन सकती हैं। अब सवाल उठता है कि आखिर ब्लोटिंग क्या है और यह क्यों होती है?

सर गंगाराम अस्पताल, नई दिल्ली के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. (प्रो.) अनिल अरोड़ा ने जनसत्ता को बताया कि जब पेट या आंतों में फूलने, खिंचाव या भारीपन जैसा महसूस होता है, तो इसे ब्लोटिंग कहा जाता है। यह जरूरी नहीं कि हर बार पेट में गैस की मात्रा बढ़ने पर ही ब्लोटिंग हो। कई बार गैस की मात्रा सामान्य होने के बावजूद आंतों से दिमाग तक पहुंचने वाले संकेतों की संवेदनशीलता बढ़ने के कारण व्यक्ति को पेट ज्यादा फूला हुआ महसूस हो सकता है। आइए डॉक्टर से जानते हैं कि ब्लोटिंग कैसे होती है इसके लिए कौन-कौन से कारण जिम्मेदार है और इससे बचाव के लिए क्या करना चाहिए।

ब्लोटिंग के मुख्य दो कारण

डॉक्टर अनिल अरोड़ा ने बताया ब्लोटिंग के लिए दो प्रमुख कारण हो सकते हैं। पहला, पेट और आंतों में वास्तव में गैस की मात्रा बढ़ जाना। दूसरा, गैस की सामान्य मात्रा होने के बावजूद आंतों से दिमाग तक जाने वाले संकेतों का ज्यादा संवेदनशील होना। ऐसी स्थिति में दिमाग नॉर्मल गैस को भी ज्यादा महसूस करता है। इसे हाइपर सेंसिटिव या हाइपरएक्टिव सेंसेरी सिस्टम कहा जाता है।

तनाव और नींद की कमी से बढ़ सकती है ब्लोटिंग

ब्रेन और गट हेल्थ का कनेक्शन भी ब्लोटिंग की समस्या में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। तनाव, चिंता, बेचैनी और नींद की कमी आंतों और दिमाग के बीच होने वाले संकेतों को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में पेट में गैस की मात्रा सामान्य होने के बावजूद व्यक्ति को पेट फूलने, भारीपन या खिंचाव का एहसास अधिक हो सकता है। इसलिए ब्लोटिंग को केवल खान-पान से जुड़ी समस्या मानना सही नहीं है।

युवाओं में भी क्यों बढ़ रही है ब्लोटिंग?

ब्लोटिंग किसी खास उम्र तक सीमित समस्या नहीं है। आज कम शारीरिक गतिविधि, लंबे समय तक बैठे रहने वाला लाइफस्टाइल और अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड के अधिक सेवन के कारण युवाओं में भी यह समस्या देखने को मिल रही है। ज्यादा फैट, मसालेदार और कैलोरी-डेंस भोजन पाचन को प्रभावित कर सकता है और बिना पचा भोजन बड़ी आंत तक पहुंच सकता है जो ब्लोटिंग का कारण बन सकता है।

आंतों के बैक्टीरिया भी बढ़ाते हैं गैस?

आंतों में मौजूद बैक्टीरिया पेट की गैस और ब्लोटिंग का कारण बन सकते हैं। बड़ी आंत में मौजूद बैक्टीरिया बिना पचे भोजन को तोड़ते हैं। इस प्रक्रिया में गैस बनती है। अगर बड़ी मात्रा में ऐसा भोजन बड़ी आंत तक पहुंचता है, जिसे छोटी आंत पूरी तरह पचा नहीं पाती, तो गैस बनने की मात्रा बढ़ सकती है और इससे ब्लोटिंग हो सकती है।

छोले, काले चने और राजमा से क्यों होती है गैस?

कुछ फूड्स ऐसे हैं जो हर उम्र के लोगों में गैस का कारण बनते हैं।  सफेद छोले, काले चने और राजमा जैसे खाद्य पदार्थों में रेफिनोज और स्टैकियोस जैसे पदार्थ पाए जाते हैं। इन्हें छोटी आंत पूरी तरह नहीं पचा पाती। जब ये बड़ी आंत में पहुंचते हैं, तो बैक्टीरिया इन्हें फर्मेंट करते हैं और गैस बन सकती है। इसलिए इन खाद्य पदार्थों को खाने के बाद कई लोगों को गैस और ब्लोटिंग महसूस होती है।

कब्ज से भी हो सकती है ब्लोटिंग

कब्ज ब्लोटिंग का एक महत्वपूर्ण कारण हो सकती है। मुंह से लेकर एनस तक पाचन तंत्र एक निरंतर ट्रैक की तरह काम करता है, जिसमें भोजन और मल का नियमित रूप से आगे बढ़ना जरूरी है। अगर मल कई दिनों तक आंतों में रुका रहता है, तो पेट फूलने और ब्लोटिंग की समस्या हो सकती है।

IBS भी हो सकता है ब्लोटिंग का कारण

इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम (IBS) में आंतों की संवेदनशीलता बढ़ सकती है और पेट फूलना इसका एक आम लक्षण हो सकता है। डॉक्टर के अनुसार इसमें आंत और दिमाग के बीच संकेतों की संवेदनशीलता भी भूमिका निभा सकती है।

ब्लोटिंग के प्रमुख लक्षण

  • पेट में फूलने या भारीपन महसूस होना
  • पेट का तनाव या पेट खिंचा हुआ और फूला हुआ महसूस होना
  • पेट में गैस या गुड़गुड़ाहट महसूस होना
  • बार-बार डकार या गैस पास होना
  • पेट में असहजता या हल्का दर्द
  • जल्दी पेट भरने या भोजन के बाद ज्यादा भरा हुआ महसूस होना
  • कब्ज या दस्त के साथ पेट फूलना ब्लोटिंग के लक्षण हो सकते हैं।

FODMAP खाद्य पदार्थों से बढ़ सकती है ब्लोटिंग

कुछ कार्बोहाइड्रेट छोटी आंत में पूरी तरह पच या अवशोषित नहीं हो पाते। इन्हें FODMAPs कहा जाता है। इनमें ओलिगोसैकराइड्स और पॉलीओल्स जैसे पदार्थ शामिल होते हैं। ये बड़ी आंत में पहुंचकर बैक्टीरिया द्वारा फर्मेंट होते हैं और गैस तथा ब्लोटिंग को बढ़ा सकते हैं। FODMAP foods हर व्यक्ति के लिए समस्या पैदा नहीं करते। खासकर IBS (Irritable Bowel Syndrome) वाले कुछ लोगों में इनसे ब्लोटिंग और दूसरे पाचन संबंधी लक्षण बढ़ सकते हैं।

लैक्टोज इनटॉलरेंस और ग्लूटेन से जुड़ी समस्या

लैक्टोज इनटॉलरेंस में शरीर लैक्टोज को ठीक से पचा नहीं पाता, जिससे दूध या डेयरी उत्पादों के बाद गैस और ब्लोटिंग हो सकती है। वहीं सीलिएक डिजीज जैसी स्थितियों में ग्लूटेन से जुड़ी समस्या के कारण पाचन संबंधी लक्षण हो सकते हैं। हालांकि हर व्यक्ति में दूध या ग्लूटेन ब्लोटिंग का कारण नहीं होता।

पीरियड्स के दौरान क्यों फूलता है पेट?

महिलाओं में पीरियड्स के आसपास होने वाले हार्मोनल बदलाव आंतों की मोटिलिटी यानी भोजन को आगे बढ़ाने की गति को प्रभावित कर सकते हैं। आंतों की गति धीमी होने पर कब्ज और ब्लोटिंग की समस्या बढ़ सकती है। गर्भावस्था में भी हार्मोनल बदलावों के कारण कब्ज और ब्लोटिंग की संभावना बढ़ सकती है।

लगातार ब्लोटिंग हो तो क्या करे

अगर किसी व्यक्ति को लंबे समय से लगातार ब्लोटिंग की शिकायत है, तो डॉक्टर लक्षणों के आधार पर कुछ जांचों की सलाह दे सकते हैं। इनमें H. pylori, लैक्टोज इनटॉलरेंस, ग्लूटेन या सीलिएक से संबंधित जांच और अन्य जरूरी टेस्ट शामिल हो सकते हैं। हर व्यक्ति को सभी जांच कराने की जरूरत नहीं होती।

ब्लोटिंग के साथ ये रेड फ्लैग्स न करें नजरअंदाज

अगर ब्लोटिंग अचानक शुरू हुई है, लगातार बढ़ रही है, उम्र ज्यादा है, बिना वजह वजन कम हो रहा है या हीमोग्लोबिन कम है, तो इसे केवल गैस समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ये ऐसे रेड फ्लैग संकेत हैं जिनमें किसी गंभीर बीमारी पता लगाने के लिए डॉक्टर से जांच कराना जरूरी हो सकता है।

कम हीमोग्लोबिन के साथ ब्लोटिंग क्यों चिंता की बात?

अगर ब्लोटिंग के साथ हीमोग्लोबिन भी कम है, तो डॉक्टर के अनुसार इसकी वजह को समझना जरूरी है। उदाहरण के तौर पर पेट या पाचन तंत्र में किसी तरह की रुकावट या ट्यूमर होने पर भोजन के सामान्य रास्ते में बाधा आ सकती है, जिससे पेट फूलने जैसा महसूस हो सकता है। ऐसे मामलों में अन्य लक्षणों के साथ कम हीमोग्लोबिन भी महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है।

ब्लोटिंग पुरानी है तो कौन से टेस्ट कराएं?

अगर ब्लोटिंग कई वर्षों से है, वजन कम नहीं हुआ है और हीमोग्लोबिन सामान्य है, तो गंभीर बीमारी की संभावना कम हो सकती है। लेकिन अगर किसी बुजुर्ग व्यक्ति में ब्लोटिंग अचानक शुरू हुई हो, वजन कम हुआ हो या अन्य रेड फ्लैग मौजूद हों, तो डॉक्टर ब्लड टेस्ट के साथ एंडोस्कोपी और अल्ट्रासाउंड जैसी जांच की सलाह दे सकते हैं।

ब्लोटिंग से बचने के लिए डाइट में क्या करें?

डॉक्टर अनिल अरोड़ा ने ब्लोटिंग की समस्या से बचाव करने के लिए डाइट में प्रोसेस्ड फूड कम करने, बहुत अधिक तेल, घी, मक्खन, लाल मिर्च और मसालेदार भोजन का सेवन कम करने की सलाह दी है। भोजन की मात्रा एक बार में बहुत ज्यादा लेने के बजाय थोड़ा-थोड़ा और जरूरत के अनुसार लेना बेहतर हो सकता है।

रात के खाने और सोने के बीच में गैप रखें

रात का खाना खाने के तुरंत बाद सोने से बचना चाहिए। डॉक्टर ने डिनर और सोने के बीच करीब तीन घंटे का अंतर रखने और खाने के बाद थोड़ी देर वॉक करने की सलाह दी। इससे पाचन को बेहतर तरीके से काम करने में मदद मिल सकती है।

ब्लोटिंग को सिर्फ गैस समझकर नजरअंदाज न करें

कभी-कभार पेट फूलना खान-पान, कब्ज या कुछ खाद्य पदार्थों के कारण हो सकता है। लेकिन अगर ब्लोटिंग लगातार हो रही है, अचानक शुरू हुई है या इसके साथ वजन कम होना, कम हीमोग्लोबिन जैसे संकेत मौजूद हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना और जरूरत के अनुसार जांच कराना जरूरी है। लाइफस्टाइल और डाइट में बदलाव करके आप आसानी से ब्लोटिंग की समस्या को कंट्रोल कर सकते हैं।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। FODMAP वाले खाद्य पदार्थ हर व्यक्ति को प्रभावित नहीं करते। अगर आपको लगातार ब्लोटिंग, पेट दर्द, दस्त, कब्ज या वजन कम होने जैसी समस्या है, तो खुद से डाइट में बड़े बदलाव करने के बजाय डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह लें।