महिलाओं में आमतौर पर 45 से 50 साल के बीच में मेनोपॉज यानी रजोनिवृत्ति हो जाता है। मेनोपॉज यानी महिलाओं को हर महीने होने वाले पीरियड का रूक जाना। हाल ही में एक इंटरनेट यूजर ने क्वोरा पर अपनी चिंता साझा करते हुए लिखा कि मेरी मां के पीरियड्स 2 साल पहले बंद हो गए थे, और अब फिर से ब्लीडिंग हो रही है। ये पीरियड है या इस ब्लीडिंग की कोई दूसरी वजह है? क्या पीरियड बंद होने के बाद दोबारा शुरू हो सकते हैं? यूजर के इस सवाल का जवाब जब हमने स्त्री रोग विशेषज्ञों के साथ साझा किया तो उन्होंने बताया मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग होना नॉर्मल नहीं है।
Shardacare- Health City की स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. (प्रो.) नीरजा गोयल ने बताया मेनोपॉज़ के बाद होने वाली ब्लीडिंग किसी गंभीर शारीरिक समस्या या संक्रमण का संकेत हो सकती है। एक्सपर्ट ने बताया पोस्टमेनोपॉज़ल ब्लीडिंग को हमेशा एक गंभीर लक्षण के रूप में देखा जाना चाहिए। इसे हल्के में लेना आपकी सेहत के लिए जोखिम भरा हो सकता है। आइए जानते हैं कि इसके पीछे का असली कारण क्या हैं और आपको कब तुरंत अस्पताल जाने की जरूरत है।
इसे पीरियड की वापसी समझना ठीक है क्या?
मेनोपॉज तब माना जाता है जब 12 महीने तक लगातार पीरियड न आए हों। इसके बाद होने वाली ब्लीडिंग हार्मोनल साइकल नहीं, बल्कि एक मेडिकल अलार्म है।
मेनोपॉज के बाद क्यों होती है ब्लीडिंग?
डॉ. गोयल के अनुसार कुछ मामलों में हल्की स्पॉटिंग (spotting) एस्ट्रोजन हार्मोन के कम होने के कारण होती है। वजाइना की परत पतली होने से भी कई बार ये ब्लीडिंग हो सकती है। इसके अलावा पोस्टमेनोपजल ब्लीडिंग के लिए कुछ आम कारण भी हो सकते हैं जैसे
- इंफेक्शन
- हार्मोन थेरेपी के साइड इफेक्ट
- गैर-कैंसर गांठें जिसे पॉलिप्स कहते है इसकी वजह से भी मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग हो सकती है।
ये ब्लीडिंग कब हो सकती है गंभीर संकेत
डॉक्टर चेतावनी देती हैं कि कई बार ये ब्लीडिंग गंभीर समस्याओं का संकेत भी हो सकती है जैसे एंडोमेट्रियल हाइपरप्लासिया यानी गर्भाशय की परत का मोटा होना या फिर गर्भाशय का कैंसर होने का भी अलार्मिंग साइन हो सकती है।
क्यों जरूरी है सावधानी?
डॉ. गोयल के मुताबिक, भले ही ब्लीडिंग एक बार हो या बहुत हल्की हो, फिर भी इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। खासकर उन महिलाओं में जोखिम ज्यादा होता है जिन्हें मोटापा (Obesity), डायबिटीज या कैंसर की फैमिली हिस्ट्री है। एक्सपर्ट बताती हैं कि असामान्य ब्लीडिंग शुरुआती स्टेज के एंडोमेट्रियल कैंसर का एक आम लक्षण हो सकती है, इसलिए समय पर जांच बेहद जरूरी है।
बीमारी का पता लगाने के लिए कौन सी जांच कराएं?
- डॉक्टर सलाह देती हैं कि अगर मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग हो तो तुरंत जांच करानी चाहिए। इसके लिए कुछ टेस्ट किए जाते हैं जैसे
- ट्रांसवेजाइनल अल्ट्रासाउंड जो गर्भाशय की परत की जांच के लिए की जाती है।
- एंडोमेट्रियल बायोप्सी यानी टिश्यू का छोटा सैंपल लेकर जांच की जाती है।
- हिस्टेरोस्कोपी, गर्भाशय के अंदर कैमरे से जांच की जाती है
- जरूरत के अनुसार ब्लड टेस्ट या पैप स्मीयर टेस्ट कराया जा सकता है।
निष्कर्ष
डॉ. गोयल कहती हैं कि अच्छी बात यह है कि समय पर पहचान होने पर इलाज के नतीजे काफी बेहतर होते हैं। इसलिए मेनोपॉज़ के बाद होने वाली किसी भी ब्लीडिंग को हल्के में न लें और तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें, ताकि गंभीर बीमारियों को शुरुआती चरण में ही रोका जा सके।
डिस्क्लेमर:
इस लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार के विकल्प के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। मेनोपॉज़ के बाद किसी भी तरह की ब्लीडिंग या स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर बिना देरी किए किसी योग्य स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) से परामर्श करें। अपनी मर्जी से कोई भी दवा या उपचार शुरू करना जोखिम भरा हो सकता है। जनसत्ता इस जानकारी की पूर्णता या सटीकता के लिए जिम्मेदार नहीं है।
