बरसात के मौसम में तापमान में उतार-चढ़ाव, बढ़ी हुई नमी और उमस के कारण सर्दी, खांसी, जुकाम और गले के संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। ऐसे में शरीर की इम्यूनिटी मजबूत रखना बेहद जरूरी है। इम्यूनिटी को बेहतर बनाए रखने के लिए दवाओं पर निर्भर रहने के बजाय हेल्दी डाइट और किचन में मौजूद कुछ औषधीय मसालों का सेवन करें। आयुर्वेदिक एवं यूनानी चिकित्सा विशेषज्ञ डॉ. सलीम जैदी के अनुसार, काली मिर्च ऐसा ही एक मसाला है, जिसका सीमित मात्रा में सेवन बरसात के मौसम में सर्दी-खांसी और दूसरे मौसमी संक्रमणों से बचाव में मददगार हो सकता है।

काली मिर्च में पाइपरिन (Piperine) नामक सक्रिय यौगिक पाया जाता है, जिसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी, एंटीऑक्सीडेंट और एंटी माइक्रोबियल गुण मौजूद होते हैं। ये गुण शरीर की नेचुरल इम्यूनिटी को सपोर्ट करने और संक्रमण से लड़ने में मदद कर सकते हैं। हालांकि, काली मिर्च किसी बीमारी का इलाज नहीं है और न ही यह दवाओं का विकल्प है। इसका सेवन संतुलित मात्रा में और संतुलित आहार के हिस्से के रूप में करना चाहिए। आइए जानते हैं, डॉ. सलीम जैदी के अनुसार बरसात के मौसम में काली मिर्च का सेवन करने से सेहत को क्या-क्या फायदे मिल सकते हैं।

सर्दी-जुकाम में राहत दिलाने में मददगार

मौसमी सर्दी-जुकाम और गले में खराश होने पर काली मिर्च का सेवन फायदेमंद माना जाता है। इसके लिए 4–5 काली मिर्च के दानों को कूट कर उसमें एक चम्मच शहद मिलाएं और इसका सेवन करें। इसके बाद गुनगुना पानी या हल्का गर्म दूध पी सकते हैं। काली मिर्च में मौजूद प्राकृतिक तत्व कफ को ढीला करने और गले को आराम पहुंचाने में मदद कर सकते हैं। हालांकि अगर बुखार, सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण लंबे समय तक बने रहें, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मददगार

काली मिर्च में मौजूद पिपेरिन (Piperine) पेट में हाइड्रोक्लोरिक एसिड के उत्पादन को बढ़ावा देने में मदद करता है। यह एसिड भोजन में मौजूद प्रोटीन और वसा को पचाने के लिए जरूरी होता है। इससे अपच, गैस और पेट फूलने जैसी समस्याओं से राहत मिल सकती है और पाचन तंत्र बेहतर तरीके से काम करता है।

पोषक तत्वों के अवशोषण को बढ़ाती है

काली मिर्च शरीर में कई पोषक तत्वों के अवशोषण (Absorption) को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है। खासकर हल्दी में मौजूद करक्यूमिन (Curcumin) के अवशोषण को पिपेरिन कई गुना तक बढ़ा सकता है। इसके अलावा यह विटामिन C, बीटा-कैरोटीन और सेलेनियम जैसे पोषक तत्वों के उपयोग में भी मददगार हो सकती है।

फ्री रेडिकल्स को कंट्रोल करने में है मददगार

काली मिर्च में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट शरीर में बनने वाले फ्री-रेडिकल्स को कम करने में मदद करते हैं। इससे ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस घट सकता है और कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में मदद मिलती है। लंबे समय में ये दिल के रोग और क्रोनिक बीमारियों के जोखिम को कम करने में मददगार हो सकती है।

सूजन कर सकती है कंट्रोल

पिपेरिन में एंटी-इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जो शरीर में सूजन बढ़ाने वाले कुछ रसायनों की गतिविधि को कम करने में मदद कर सकते हैं। इससे जोड़ों के दर्द और सूजन जैसी समस्याओं में काफी हद तक राहत मिल सकती है।

ब्रेन के लिए भी है असरदार

कई रिसर्च में ये बात साबित हो चुकी है कि काली मिर्च का सेवन ब्रेन हेल्थ में भी सुधार करता है। काली मिर्च में मौजूद पिपेरिन मस्तिष्क में न्यूरॉन्स के बीच संचार को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है। इससे याददाश्त, एकाग्रता और सीखने की क्षमता पर सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

बलगम से मिलती है राहत

काली मिर्च में एक्सपेक्टोरेंट गुण पाए जाते हैं, जो बलगम को बाहर निकालने में मदद कर सकते हैं। सर्दी, जुकाम और कफ की स्थिति में गुनगुने पानी या शहद के साथ सीमित मात्रा में इसका सेवन गले और श्वसन तंत्र को आराम पहुंचा सकता है।

काली मिर्च का सेवन कैसे करें?

आप काली मिर्च का सेवन दाल, सब्जी, सलाद, सूप या छाछ में मिलाकर कर सकते हैं।
सुबह गुनगुने पानी में एक चुटकी काली मिर्च मिलाकर पी सकते हैं।
हल्दी के साथ इसका सेवन करने से करक्यूमिन का अवशोषण बेहतर हो सकता है।

किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए?

काली मिर्च का सेवन सेहत के लिए उपयोगी है लेकिन कुछ मेडिकल कंडीशन में इसका सेवन सेहत को बिगाड़ सकता है। जिन लोगों को पेट में अल्सर या एसिडिटी की समस्या है वो काली मिर्च का सेवन सावधानी से करें।
जिन लोगों को बार-बार सीने में जलन की समस्या रहती है वो काली मिर्च से परहेज करें। खून को पतला करने वाली दवा लेने वाले मरीज काली मिर्च का सेवन सोच समझकर करें। ब्लीडिंग डिसऑर्डर या बवासीर से पीड़ित लोग काली मिर्च से परहेज करें।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से है। काली मिर्च औषधि का विकल्प नहीं है। किसी भी बीमारी के इलाज या नियमित सेवन से पहले अपने डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें।