Best Cooking Oil for Diabetes Patients: डायबिटीज मरीजों के लिए ब्लड शुगर लेवल को कंट्रोल में रखना बेहद जरूरी है। डायबिटीज डाइट में खासतौर पर कार्बोहाइड्रेट की मात्रा पर ध्यान देने की सलाह दी जाती है, क्योंकि कार्ब्स सीधे तौर पर ब्लड शुगर को प्रभावित करते हैं। इसके अलावा डायबिटीज मरीजों को फैट का चुनाव भी समझदारी से करना चाहिए। सैचुरेटेड फैट से बचें, जबकि अनसैचुरेटेड और पॉलीअनसैचुरेटेड फैट सीमित मात्रा में लें। संतुलित आहार, सही मात्रा और हेल्दी फूड ऑप्शन अपनाने से ब्लड शुगर को बेहतर तरीके से कंट्रोल किया जा सकता है।

डायबिटीज मरीजों के लिए तेल की मात्रा को सीमित रखना जरूरी है। यानी कितना तेल आप इस्तेमाल कर रहे हैं यह महत्वपूर्ण है। कई रिसर्च में ये बात साबित हो चुकी है कि जिन तेलों में मोनोअनसैचुरेटेड फैटी एसिड (Monounsaturated Fatty Acid) होता है, वो तेल भारतीयों के लिए सबसे उपयुक्त हैं। डायबिटीज स्पेशलिटीज सेंटर के चेयरमैन डायबिटीज एक्सपर्ट डॉ. वी मोहन (Dr V. Mohan) ने बताया डायबिटीज मरीजों के लिए तीन तेलों का सेवन असरदार साबित होता है। इन तेलों में मूंगफली का तेल, सरसों का तेल और तिल का तेल शामिल हैं। ये तेल हेल्थ के लिए बेहतर माने जाते हैं।  डॉ. वी मोहन ने बताया इसके अलावा आप कॉर्न ऑयल, राइस ब्रान ऑयल या सूरजमुखी का तेल भी इस्तेमाल कर सकते हैं। ये तेल पॉलीअनसैचुरेटेड फैट (Polyunsaturated Fats) की श्रेणी में आते हैं और सीमित मात्रा में उपयोग किए जा सकते हैं।

एक्सपर्ट के मुताबिक डायबिटीज मरीजों को कुछ तेलों के सेवन से बचना चाहिए, जैसे पाम ऑयल और नारियल तेल। इन तेलों में सैचुरेटेड फैट की मात्रा अधिक होती है, जो दिल की सेहत और ब्लड शुगर कंट्रोल पर नकारात्मक असर डाल सकती है। इसलिए डायबिटीज में ऐसे तेलों का सेवन सीमित या डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही करना चाहिए। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि डायबिटीज मरीजों के लिए मूंगफली का तेल, सरसों का तेल और तिल का तेल कैसे असरदार साबित होता है।

मूंगफली का तेल (Groundnut Oil) खाएं

रिसर्च के अनुसार मूंगफली का तेल (Peanut Oil) डायबिटीज मैनेजमेंट में काफी प्रभावी माना गया है। इसमें मौजूद हेल्दी फैट्स और एंटीऑक्सीडेंट्स सीधे तौर पर ब्लड शुगर और इंसुलिन रिस्पॉन्स पर सकारात्मक प्रभाव डालते हैं। Healthline और दूसरी मेडिकल रिपोर्ट्स के अनुसार मूंगफली का तेल मोनोअनसैचुरेटेड (MUFA) और पॉलीअनसैचुरेटेड (PUFA) फैट्स का एक बेहतरीन स्रोत है। Journal of Internal Medicine के मुताबिक मूंगफली के तेल में प्रचुर मात्रा में विटामिन E होता है जो एक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट है। ये बॉडी को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस (Oxidative Stress) को कंट्रोल करता है। डायबिटीज मरीज सीमित मात्रा में इस तेल का सेवन करें तो फायदा होगा।

सरसो का तेल कैसे डायबिटीज मरीजों के लिए है फायदेमंद

एक्सरपर्ट के मुताबिक सरसों का तेल डायबिटीज मरीजों के लिए सेफ ऑयल है। American Journal of Clinical Nutrition के मुताबिक सरसों के तेल में ओमेगा-3 और ओमेगा-6 फैटी एसिड का अनुपात 1:2 होता है, जो दिल और मेटाबॉलिज्म के लिए आदर्श अनुपात है। इसका सीमित मात्रा में सेवन सूजन को कंट्रोल करता है। टाइप-2 डायबिटीज एक इंफ्लेमेटरी बीमारी है, इसलिए यह सूजन कम कर इंसुलिन की प्रभावशीलता को बढ़ाता है। सरसों के तेल में ग्लूकोसाइनोलेट्स नामक यौगिक होते हैं जिनमें एंटी-डायबिटिक गुण पाए जाते हैं। रिसर्च के अनुसार ये यौगिक ब्लड शुगर के स्तर को कंट्रोल रखने और पैंक्रियाज की बीटा-कोशिकाओं की हिफाजत करने में मदद कर सकते हैं।

तिल का तेल (Sesame Oil) खाएं

तिल का तेल न केवल खाने का स्वाद बढ़ाता है, बल्कि डायबिटीज मरीजों के लिए एक मेडिकल फूड की तरह काम करता है। कई वैज्ञानिक रिसर्च में इस बात की पुष्टि की जा चुकी है कि ये Blood Sugar को कंट्रोल करने में दवाओं जितना ही प्रभावी हो सकता है। American Journal of Medicine में प्रकाशित एक प्रसिद्ध अध्ययन के अनुसार, जब टाइप-2 डायबिटीज के मरीजों ने अपने कुकिंग ऑयल को तिल के तेल से बदला तो उनका Fasting Sugar और HbA1c लेवल में गिरावट देखी गई। तिल के तेल में सेसामिन और सेसामोल नामक एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं। ये तत्व लीवर में ग्लूकोज के उत्पादन को कम करते हैं और शरीर की कोशिकाओं को इंसुलिन के प्रति अधिक संवेदनशील बनाते हैं।

डिस्क्लेमर:

इस लेख में साझा की गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है। इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह, निदान या उपचार के विकल्प के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। अपनी डाइट, एक्सरसाइज या दवाओं में कोई भी बदलाव करने से पहले हमेशा अपने डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लें। किसी भी स्वास्थ्य आपात स्थिति के मामले में तुरंत नजदीकी अस्पताल से संपर्क करें।