क्या आपके साथ भी कभी ऐसा होता है कि अचानक आंखों से आंसू बहने लगते हैं और आपको खुद समझ नहीं आता कि आखिर क्यों? कई लोग इसे कमजोरी समझ लेते हैं या फिर डर जाते हैं कि कहीं कुछ गलत तो नहीं हो रहा। लेकिन सच्चाई यह है कि बिना किसी वजह के रोना पूरी तरह से सामान्य है। इतना ही नहीं, यह शरीर और मन दोनों के लिए फायदेमंद भी हो सकता है। विशेषज्ञों और हालिया अध्ययनों के मुताबिक, आंसू तनाव कम करने में अहम भूमिका निभाते हैं। मशहूर सेलिब्रिटी हार्मोन कोच पूर्णिमा पेरी भी मानती हैं कि आंसू कमजोरी नहीं, बल्कि शरीर का एक प्राकृतिक नियामक हैं।

बिना वजह रोना क्यों आता है?

अक्सर हम अपनी भावनाओं को दबाकर रखते हैं। काम का दबाव, रिश्तों की उलझनें, थकान या भविष्य की चिंता, ये सब बातें हमारे मन में जमा होती रहती हैं। जब यह दबाव ज्यादा हो जाता है, तो शरीर खुद उसे बाहर निकालने का रास्ता खोजता है। ऐसे में रोना एक प्राकृतिक प्रतिक्रिया बन जाता है। कई बार हमें खुद भी पता नहीं होता कि हम किस बात से परेशान हैं, लेकिन शरीर अंदर की बेचैनी को आंसुओं के जरिए बाहर निकाल देता है।

आंसू और तनाव का गहरा रिश्ता

हार्मोन कोच पूर्णिमा पेरी के अनुसार, जब हम रोते हैं तो हमारे शरीर का पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम सक्रिय हो जाता है। आसान भाषा में कहें तो यह सिस्टम शरीर को शांत करने का काम करता है। जब हम ज्यादा तनाव में होते हैं, तो शरीर में कोर्टिसोल नामक स्ट्रेस हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। रोना इस अतिरिक्त कोर्टिसोल को कम करने में मदद करता है। यही वजह है कि रोने के बाद अक्सर मन हल्का महसूस करता है और तनाव कम हो जाता है।

रोने के बाद क्यों लगता है हल्का?

क्लीवलैंड क्लिनिक की एक रिपोर्ट के मुताबिक, खुलकर रोने के बाद ऐसा महसूस होता है जैसे सीने से कोई भारी बोझ उतर गया हो। इसका कारण यह है कि आंसू नकारात्मक भावनाओं और विचारों को बाहर निकालने में मदद करते हैं। जब हम रोते हैं, तो मन में चल रही उलझनें थोड़ी साफ होने लगती हैं। इससे नेगेटिव सोच कम होती है, जो मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकती है।

अनकही भावनाओं का दबाव कैसे कम होता है?

कई बार हम अपनी भावनाएं किसी से साझा नहीं कर पाते। ये अनकही बातें धीरे-धीरे छाती, गले और सिर में तनाव पैदा करने लगती हैं। पूर्णिमा पेरी बताती हैं कि आंसू इस अंदरूनी दबाव को कम करने का काम करते हैं। जब आप रोते हैं, तो शरीर उस भावनात्मक बोझ को बाहर निकाल देता है। यही वजह है कि रोने के बाद सिर हल्का लगता है, सांस आसान हो जाती है और मन थोड़ा शांत हो जाता है।

दर्द और निराशा में क्यों आता है रोना?

क्लीवलैंड क्लिनिक की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जब कोई व्यक्ति बहुत दर्द या गहरी निराशा में होता है, तो उसे रोने का मन करता है। यह शरीर की एक तरह की रक्षा प्रणाली है। आंसू बहाने के बाद व्यक्ति हालात को थोड़ी स्पष्टता के साथ देख पाता है। इससे समस्या से निपटने की ताकत मिलती है और आगे का रास्ता सोचने में मदद मिलती है।

क्या रोना हमेशा अच्छा होता है?

रोना आमतौर पर फायदेमंद होता है, लेकिन अगर आपको बार-बार, बहुत ज्यादा और लंबे समय तक रोने की इच्छा हो रही है, और इसके साथ नींद न आना, भूख न लगना या हर समय उदासी महसूस हो रही है, तो यह मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्या का संकेत भी हो सकता है। ऐसे में किसी विशेषज्ञ से बात करना जरूरी है।

खुद को कैसे संभालें?

अगर आपको रोने का मन आ रहा है, तो खुद को रोकने की जरूरत नहीं है। किसी सुरक्षित और शांत जगह पर अपनी भावनाओं को बाहर आने दें। इसके बाद गहरी सांस लें, पानी पिएं और खुद को थोड़ा समय दें। अपनी भावनाओं को किसी अपने से साझा करना, डायरी लिखना या हल्की एक्सरसाइज करना भी तनाव कम करने में मददगार हो सकता है।

डिस्क्लेमर

यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य हेल्थ एक्सपर्ट की सलाह जरूर लें।

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