गलत खानपान, कम पानी पीना और बिगड़ते लाइफस्टाइल के कारण आजकल कब्ज और पेट न साफ होने की समस्या बहुत आम हो गई है। ऐसे में कई लोग राहत पाने के लिए देसी नुस्खों का सहारा लेते हैं। कब्ज एक आम पाचन से जुड़ी समस्या है, जिसमें मल त्याग कम होना, मल का सख्त होना या मल डिस्चार्ज करने के लिए ज्यादा जोर लगाना शामिल है। कब्ज के लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं, जैसे डाइट में फाइबर की कमी, पर्याप्त पानी न पीना, शारीरिक गतिविधि कम होना, टॉयलेट की इच्छा को रोकना, तनाव और कुछ दवाओं का सेवन करना। बार-बार होने वाली कब्ज के कारण को समझना जरूरी है।

आयुर्वेद और यूनानी दवाओं के एक्सपर्ट डॉक्टर सलीम जैदी के मुताबिक अगर आप कब्ज से परेशान है और सुबह उठकर घंटों आपको टॉयलेट में बैठना पड़ता है तो आप रात को सोने से पहले दूध में मु ईसबगोल और सेंधा नमक मिलाकर पिएं। दूध के साथ इन दोनों चीजों का सेवन पाचन क्रिया में सुधार कर सकता है और सुबह पेट साफ होने में मदद कर सकता है। हालांकि, हर व्यक्ति का शरीर और पाचन तंत्र अलग होता है। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि कब्ज का इलाज करने में इसबगोल और नमक का सेवन कैसे मददगार साबित होता है।

इसबगोल कब्ज में कैसे मदद करता है?

इसबगोल की भूसी यानी Psyllium Husk एक बल्क-फार्मिंग फाइबर है। यह आंतों में पानी को सोखकर जेल जैसा पदार्थ बनाता है, जिससे मल नरम और अधिक bulky हो सकता है और उसे आंतों से बाहर निकालना आसान हो सकता है। हालांकि, इसबगोल लेते समय पर्याप्त मात्रा में पानी पीना जरूरी है, क्योंकि कम पानी के साथ फाइबर लेने से कब्ज की समस्या और ज्यादा बढ़ सकती है। डॉक्टर सलीम ने बताया दूध के साथ एक चम्मच इसबगोल की भूसी और थोड़ा सेंधा नमक मिलाने से कब्ज कंट्रोल करने में मदद मिल सकती है।  

इसबगोल और सेंधा नमक का कॉम्बिनेशन कब्ज (Constipation) को दूर करने में बहुत कारगर माना जाता है। मेडिकल साइंस और आयुर्वेद दोनों के सिद्धांतों के अनुसार, ये दोनों चीज़ें मिलकर पेट की आंतों पर अलग-अलग लेकिन पूरक तरीके से काम करती हैं।  

manipalcigna में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक जब आप इसबगोल लेते हैं, तो यह आंतों में जाकर स्पंज की तरह पानी सोख लेता है और फैलकर एक जैल जैसा गाढ़ा पदार्थ बन जाता है। यह शुष्क और कठोर मल में नमी भरकर उसे सॉफ्ट और भारी (bulky) बनाता है, जिससे आंतों पर दबाव नहीं पड़ता और मल आसानी से बाहर निकल जाता है। जिन लोगों को दूध पचाने में परेशानी या लैक्टोज इनटॉलरेंस है, उन्हें दूध से गैस, पेट फूलना या अन्य परेशानी हो सकती है।

इसबगोल लेते समय पानी जरूरी

इसबगोल या किसी भी बल्क-फार्मिंग फाइबर का सेवन करते समय पर्याप्त पानी पीना जरूरी है। इसे लेने के बाद पर्याप्त मात्रा में पानी न पीने पर मल और अधिक सख्त हो सकता है या निगलने में परेशानी हो सकती है। इसलिए इसबगोल को पर्याप्त पानी के साथ लेना चाहिए। आपको बता दें कि कब्ज का इलाज उसके कारण और गंभीरता पर निर्भर करता है। कभी-कभार होने वाली हल्की कब्ज में फाइबर, पानी और शारीरिक गतिविधि बढ़ाने से फायदा हो सकता है। लेकिन अगर कब्ज लंबे समय से है, बार-बार होती है या घरेलू उपायों से ठीक नहीं हो रही है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

कब्ज दूर करने के लिए अपनाएं ये खास 5 उपाय

सुबह की रूटीन रखें नियमित

सुबह उठने के बाद पर्याप्त पानी पीना और रोजाना एक निश्चित समय पर टॉयलेट जाने की आदत बनाना कुछ लोगों के लिए फायदेमंद हो सकता है। खासकर नाश्ते के बाद शरीर में gastrocolic reflex सक्रिय होता है, जिससे मल त्याग की इच्छा बढ़ सकती है। हालांकि, बिना इच्छा के बहुत देर तक टॉयलेट में बैठने या जोर लगाने से बचना चाहिए।

टॉयलेट में फोन का इस्तेमाल कम करें

टॉयलेट में लंबे समय तक बैठकर फोन चलाने की आदत से बचना बेहतर है। ज्यादा देर तक टॉयलेट सीट पर बैठे रहने और अनावश्यक जोर लगाने से बवासीर जैसी समस्याओं का जोखिम बढ़ सकता है। इसलिए टॉयलेट जाएं, मल त्याग करें और जरूरत पूरी होने के बाद बाहर आ जाएं।

रोजाना शारीरिक गतिविधि बढ़ाएं

शारीरिक गतिविधि कम होने से कब्ज की समस्या बढ़ सकती है। इसलिए दिनभर सक्रिय रहने की कोशिश करें। नियमित वॉक या अन्य मध्यम स्तर की एक्सरसाइज आंतों की गतिविधियों को बेहतर करने में मदद कर सकती है। खाने के बाद हल्की वॉक भी रोजमर्रा की शारीरिक गतिविधि बढ़ाने का आसान तरीका है।

डाइट में फाइबर बढ़ाएं

कब्ज से बचने के लिए डाइट में पर्याप्त फाइबर लेना जरूरी है। फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, ओट्स, दलिया, चिया सीड्स और अलसी जैसे खाद्य पदार्थ फाइबर के अच्छे स्रोत हैं। पपीता, अमरूद, नाशपाती, सेब, भिंडी और हरी सब्जियों को भी डाइट में शामिल किया जा सकता है। फाइबर की मात्रा धीरे-धीरे बढ़ाना बेहतर है, क्योंकि अचानक बहुत ज्यादा फाइबर लेने से गैस और पेट फूलने की समस्या हो सकती है।

फाइबर के साथ पर्याप्त पानी भी जरूरी

फाइबर तभी बेहतर तरीके से काम करता है जब शरीर में पर्याप्त मात्रा में पानी हो। इसलिए फाइबर बढ़ाने के साथ पर्याप्त तरल पदार्थ लेना जरूरी है। हर व्यक्ति की पानी की जरूरत अलग होती है, इसलिए दो से तीन लीटर पानी का एक निश्चित लक्ष्य सभी लोगों के लिए जरूरी नहीं है। मौसम, शारीरिक गतिविधि, उम्र और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार पानी की जरूरत बदल सकती है।

कब्ज का इलाज करने के लिए इन चीजों से करें परहेज

कब्ज की समस्या में मैदा से बने बहुत ज्यादा रिफाइंड खाद्य पदार्थ, अत्यधिक प्रोसेस्ड स्नैक्स और कम फाइबर वाले खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करना फायदेमंद हो सकता है। हालांकि, चाय और कॉफी को हर व्यक्ति के लिए कब्ज का कारण नहीं माना जा सकता। इसी तरह किसी एक खाद्य पदार्थ को पूरी तरह बंद करने के बजाय संतुलित और फाइबर युक्त डाइट पर ध्यान देना बेहतर है।

तनाव और नींद का भी रखें ध्यान

तनाव और खराब नींद पाचन तंत्र के कामकाज को प्रभावित कर सकते हैं और कुछ लोगों में कब्ज की समस्या बढ़ सकती है। इसलिए पर्याप्त नींद, नियमित दिनचर्या, योग, मेडिटेशन और डीप ब्रीदिंग जैसी गतिविधियों को लाइफस्टाइल में शामिल करना मददगार हो सकता है।

डिस्क्लेमर:यह लेख केवल सामान्य जानकारी के लिए है। इसमें बताए गए घरेलू उपाय और आयुर्वेदिक सुझाव चिकित्सीय सलाह (Medical Advice) का विकल्प नहीं हैं। यदि आप लंबे समय से कब्ज, पेट दर्द या पाचन संबंधी किसी पुरानी समस्या से परेशान हैं, तो कोई भी घरेलू नुस्खा आजमाने से पहले किसी योग्य आयुर्वेदिक चिकित्सक या गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट से परामर्श जरूर लें।