हमारी रोज़मर्रा की थाली में अनाज की भूमिका बेहद अहम होती है। रोटी, चावल और दालें भारतीय खानपान की बुनियाद हैं। बदलते लाइफस्टाइल और सेहत के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते आज लोग गेहूं के साथ-साथ मिलेट्स और दालों से बने आटे को भी अपनी डाइट में शामिल कर रहे हैं। इन्हीं में से एक पोषण से भरपूर और बहुत उपयोगी आटा है बेसन, जो चने को पीसकर तैयार किया जाता है। बेसन का इस्तेमाल केवल रोटी तक सीमित नहीं है। इससे करी, सब्ज़ी, परांठे, पकौड़े और कई पारंपरिक व आधुनिक व्यंजन बनाए जाते हैं।

स्वाद में बेहतरीन होने के साथ-साथ बेसन सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है। इसमें प्रोटीन और फाइबर की अच्छी मात्रा होती है, जो शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा देने के साथ पाचन को बेहतर बनाती है। बेसन की सबसे बड़ी खासियत ये है कि ये ग्लूटेन-फ्री होता है, जिससे यह उन लोगों के लिए भी अच्छा विकल्प बन जाता है जिन्हें ग्लूटेन से परेशानी होती है। इसमें मौजूद कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और जरूरी मिनरल्स शरीर को मजबूती देते हैं और मेटाबॉलिज़्म को सपोर्ट करते हैं। आइए जानते हैं कि गेहूं के आटे की रोटी की जगह अगर बेसन के आटे की रोटी खाई जाए तो डायबिटीज, कोलेस्ट्रॉल पर कैसे असर पड़ेगा। बेसन की रोटी खाने से बॉडी को कौन-कौन से फायदे होंगे।

कोलेस्ट्रॉल और हार्ट हेल्थ के लिए उपयोगी है ये रोटी

Journal of Food Science and Technology के अनुसार, बेसन में सॉल्यूबल फाइबर की मात्रा अधिक होती है। ये फाइबर आंतों में जाकर पित्त (Bile) को बांध लेता है और उसे शरीर से बाहर निकालता है, जिससे लिवर को नया पित्त बनाने के लिए ब्लड से कोलेस्ट्रॉल खींचना पड़ता है। शरीर में LDL यानी बुरा कोलेस्ट्रॉल का स्तर कम होता है।

ब्लड शुगर कंट्रोल रहता है कंट्रोल

Healthline और दूसरी रिसर्च के मुताबिक बेसन का ग्लाइसेमिक इंडेक्स (GI) लगभग 10-35 के बीच होता है, जबकि गेहूं का 50-70 होता है। रिसर्च के मुताबिक जब गेहूं के आटे को बेसन से बदला गया, तो भोजन के बाद का ब्लड शुगर रिस्पॉन्स 36% तक बेहतर होता है। ये इंसुलिन रेजिस्टेंस को कम करने में भी मदद करता है।

तृप्ति और वजन कम करता है

बेसन में प्रोटीन और फाइबर का अनोखा मेल है। रिसर्च बताती हैं कि बेसन का सेवन करने से शरीर में ‘कोलेसिस्टोकिनिन’ (CCK) जैसे तृप्ति हार्मोन बढ़ते हैं। इससे व्यक्ति को कम कैलोरी में भी पेट भरा हुआ महसूस होता है, जो वेट लॉस के लिए अनिवार्य है।

पोटैशियम का पावरहाउस है

डेटा बताता है कि महज 3 चम्मच बेसन में एक केले जितना पोटैशियम होता है। पोटैशियम शरीर में सोडियम के असर को कम करता है, जिससे रक्त वाहिकाएं (Blood Vessels) रिलैक्स होती हैं और हाई ब्लड प्रेशर की समस्या कंट्रोल होती है।

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डिस्क्लेमर

यह स्टोरी सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार की गई है। किसी भी तरह के स्वास्थ्य संबंधी बदलाव या डाइट में परिवर्तन करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।