क्या महिलाओं की शारीरिक और मानसिक ताकत उम्र के किसी एक पड़ाव पर अपने पीक (Peak) पर होती है, या फिर हर उम्र में ‘स्ट्रांग’ होने की परिभाषा बदल जाती है? अक्सर 20s, 30s या 40s की उम्र को लेकर महिलाओं के मन में अपनी फिटनेस और बोन डेंसिटी को लेकर कई सवाल रहते हैं। हालिया मेडिकल स्टडीज और हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो शारीरिक मजबूती, स्टैमिना और मेंटल टफनेस अलग-अलग उम्र में अलग तरीके से विकसित होती हैं। उम्र बढ़ने के साथ शरीर में कई तरह के हार्मोनल और फिजिकल बदलाव आते हैं, लेकिन इसका मतलब यह बिल्कुल नहीं कि ढलती उम्र के साथ ताकत कम ही हो। हेल्थ से जुड़ी रिसर्च के मुताबिक जहां 20-25 की उम्र में मसल मास और रिकवरी तेज होती है, वहीं 30 और 40 की उम्र में मेंटल स्टैमिना और मेटाबॉलिक मैच्योरिटी महिलाओं को एक अलग तरह की मजबूती देती है। जानिए क्या कहती हैं मेडिकल रिसर्च और डॉक्टर इस बारे में कि अलग-अलग उम्र में महिलाएं अपनी ताकत को कैसे बरकरार रख सकती हैं।  

स्पोर्ट्स मेडिसिन विशेषज्ञ, डॉ. सुमिरन पास्से जो Aktivhealth, वसंत विहार, नई दिल्ली में काम कर चुके हैं, उन्होंने बताया महिलाएं 25 साल, 30 साल या 45 साल की उम्र अपनी शारीरिक क्षमता के शिखर पर होती हैं, इसका कोई एक निश्चित जवाब नहीं है, क्योंकि किसी भी व्यक्ति की ताकत सिर्फ उम्र से तय नहीं होती। यह उसके लाइफस्टाइल, खानपान, एक्सरसाइज और बचपन से बनी मसल्स व हड्डियों की मजबूती पर भी निर्भर करती है। हालांकि, शरीर की सामान्य फिजियोलॉजी को देखें तो 25 से 35 साल की उम्र महिलाओं के लिए वह दौर माना जा सकता है, जब उनकी मसल स्ट्रेंथ, हड्डियों की मजबूती और शारीरिक क्षमता अपने बेहतर स्तर पर होती है।

किस उम्र में महिलाएं होती हैं ज्यादा स्ट्रांग रिसर्च से भी जानिए

इंटरनेशनल जर्नल ऑफ स्पोर्ट्स मेडिसिन और ऑस्टियोपोरोसिस रिसर्च के अनुसार, महिलाओं में पीक बोन मास 20 से 25 वर्ष की उम्र के बीच बनता है। इस उम्र में हड्डियों का घनत्व और मस्कुलर रिकवरी दर सबसे अधिक होती है। 25 की उम्र में महिलाओं का मेटाबॉलिज्म और कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम अपने उच्चतम स्तर पर होता है। बायोलॉजिकल रूप से 20s का मध्य समय फर्टिलिटी और रिप्रोडक्टिव हेल्थ के मामले में सबसे मजबूत माना जाता है। इस उम्र में महिला शारीरिक (Physical) और बायो-फिजिकल क्षमता के मामले में 25 की उम्र में सबसे मजबूत होती है।

न्यूरोसाइंस स्टडी के मुताबिक, इंसानी दिमाग का ‘प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स’ (जो प्लानिंग, डिसीजन मेकिंग और लॉजिकल थिंकिंग को कंट्रोल करता है) 25 की उम्र के बाद पूरी तरह मैच्योर होता है। 30 से 35 की उम्र में इसका परफॉरमेंस पीक पर होता है। 30 की उम्र में शारीरिक क्षमता और मानसिक परिपक्वता का एक बेहतरीन कॉम्बिनेशन होता है।

साइकोलॉजी टुडे और हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की रिसर्च बताती है कि 40s और 50s की उम्र में महिलाएं इमोशनल रेसिलिएंस (Emotional Resilience) यानी मानसिक आघातों से उबरने में सबसे ज्यादा मजबूत होती हैं। यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया की एक स्टडी के अनुसार, 40s में कदम रखते ही महिलाओं में “लोग क्या सोचेंगे” का डर काफी हद तक खत्म हो जाता है। वे खुद को लेकर अधिक सहज और निडर महसूस करती हैं।

महिलाओं की 25 से 35 साल की उम्र क्यों मानी जाती है सबसे मजबूत?

डॉक्टर सुमिरन पास्से के अनुसार, इस उम्र में शरीर में एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन अच्छे स्तर पर होते हैं। इससे मांसपेशियों का विकास बेहतर होता है, हड्डियां मजबूत रहती हैं और ब्लड फ्लो भी अच्छा रहता है। अगर इस समय नियमित वेट ट्रेनिंग, कार्डियो एक्सरसाइज और संतुलित आहार लिया जाए, तो भविष्य के लिए मजबूत “बोन बैंक” और “मसल बैंक” तैयार किया जा सकता है।

किस उम्र में महिलाओं की एनर्जी होती है पीक पर, चार्ट में देखिए

उम्र (Age)मजबूती का क्षेत्र (Area of Strength)मुख्य कारण / वैज्ञानिक आधार
25 वर्षशारीरिक (Physical)उच्चतम बोन डेंसिटी, मस्कुलर स्टैमिना और मेटाबॉलिज्म।
30 वर्षदिमागी (Cognitive)ब्रेन मैच्योरिटी, फोकस और प्रोफेशनल डिसीजन मेकिंग।
45 वर्षभावनात्मक (Emotional)जीवन का अनुभव, इमोशनल कंट्रोल और निडर आत्मविश्वास।

45 की उम्र के बाद क्यों आने लगती है कमजोरी?

सुमिरन पास्से बताते हैं कि 45 साल की उम्र के आसपास अधिकांश महिलाएं प्री-मेनोपॉज या मेनोपॉज के चरण में पहुंचने लगती हैं। इस दौरान एस्ट्रोजन का स्तर कम होने लगता है, जिससे मसल मास और बोन मास तेजी से घटने लगते हैं। यही कारण है कि इस उम्र के बाद कमजोरी और हड्डियों से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है।

क्या 40–50 की उम्र में भी मजबूत रहा जा सकता है?

डॉक्टर सुमिरन पास्से ने जनसत्ता को बताया कि 40–50 की उम्र में बॉडी को स्ट्रांग और हेल्दी रखा जा सकता है। अगर महिलाएं नियमित रूप से

  • वॉकिंग, जॉगिंग या कार्डियो एक्सरसाइज करें,
  • सप्ताह में कम से कम 2–3 दिन स्ट्रेंथ ट्रेनिंग करें,
  • पर्याप्त प्रोटीन, कैल्शियम और विटामिन D लें,
  • आयरन की कमी न होने दें,तो 40–50 साल की उम्र में भी अच्छी मसल स्ट्रेंथ और हड्डियों की मजबूती लंबे समय तक बनाए रखी जा सकती है।

क्या पुरुष हमेशा महिलाओं से ज्यादा मजबूत होते हैं?

डॉक्टर सुमिरन पास्से ने स्पष्ट किया कि फिजियोलॉजिकल रूप से औसतन पुरुषों में मसल मास अधिक होता है, इसलिए उनकी औसत ताकत ज्यादा हो सकती है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हर पुरुष हर महिला से मजबूत होगा। सही ट्रेनिंग, पोषण और फिटनेस के साथ महिलाएं भी कई मामलों में पुरुषों से अधिक ताकतवर हो सकती हैं। खेल प्रतियोगिताओं में इसके कई उदाहरण देखने को मिलते हैं।

महिलाओं को किन पोषक तत्वों पर सबसे ज्यादा ध्यान देना चाहिए?

डॉक्टर सुमिरन पास्से ने बताया महिलाओं में पीरियड के कारण आयरन की कमी होना आम है, जिससे थकान बढ़ सकती है। इसलिए उन्हें अपनी डाइट में कुछ खास पोषक तत्वों पर खासतौर से ध्यान देना जरूरी है। महिलाओं तो चाहिए कि वो डाइट में

प्रोटीन
आयरन
कैल्शियम
विटामिन D से भरपूर फूड का सेवन करें।  जरूरत पड़ने पर डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट भी लिए जा सकते हैं।

कैसे पता करें कि हड्डियां कमजोर हो रही हैं?

अगर बार-बार फ्रैक्चर हो रहे हों, शरीर में कमजोरी महसूस हो रही हो या डॉक्टर को संदेह हो, तो ये जांच कराई जा सकती हैं:

  • DEXA Scan (Bone Mineral Density Test)
  • विटामिन D
  • कैल्शियम
  • फॉस्फोरस
  • ALP (Alkaline Phosphatase)

इन जांचों से हड्डियों की गुणवत्ता और ऑस्टियोपोरोसिस के खतरे का आकलन किया जा सकता है।

डॉक्टर ने बताया महिलाओं की ताकत किसी एक उम्र से तय नहीं होती, बल्कि उनके पूरे लाइफस्टाइल, एक्सरसाइज और पोषण पर निर्भर करती है। फिर भी सामान्य शारीरिक विकास के लिहाज से 25 से 35 साल का समय मसल्स और हड्डियों की मजबूती के लिए सबसे अनुकूल माना जाता है। यदि इसी समय से फिटनेस और सही खानपान पर ध्यान दिया जाए, तो बढ़ती उम्र में भी शरीर को लंबे समय तक मजबूत और सक्रिय रखा जा सकता है।

डॉक्टर की राय

अगर आप सिर्फ डोले-शोले या स्टैमिना की बात करें तो 25 की उम्र विजेता है। लेकिन असल जिंदगी में जब विपरीत परिस्थितियां सामने आती हैं, तो 45 वर्ष की महिला मानसिक और भावनात्मक रूप से सबसे ज्यादा ताकतवर और अटूट साबित होती है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी विशेषज्ञ की राय पर आधारित है। किसी भी प्रकार की एक्सरसाइज, सप्लीमेंट या उपचार शुरू करने से पहले अपने डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।