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सिर्फ घुटनों में ही नहीं इन जगहों पर भी हो सकता है अर्थराइटिस, ऐसे करें पहचान

Tips for Arthritis Patients: अर्थराइटिस बीमारी से बचने के लिए अपने वजन को नियंत्रण में रखना बहुत जरूरी है, साथ ही फिजिकल एक्टिविटी भी करें

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Types of Arthritis: आज की बदलती जीवन-शैली में स्वास्थ्य परेशानियां आम बन चुकी हैं। पहले जो बीमारियां बुजुर्गों को अपनी चपेट में लेती थी वो अब युवाओं को भी अपना शिकार बना रही हैं। गठिया यानि कि अर्थराइटिस भी ऐसी ही एक बीमारी है जो लापरवाह दिनचर्या, खराब खानपान व शारीरिक असक्रियता के कारण होती है। वैसे तो इस बीमारी का सबसे अधिक असर मरीजों के घुटनों पर दिखता है लेकिन अर्थराइटिस रीढ़ और कुल्हे की हड्डियों और कभी-कभी हाथ व कंधे को भी प्रभावित करती हैं। जोड़ों में दर्द व शरीर में अकड़न इस बीमारी के आम लक्षण है। आइए जानते हैं शरीर के किन अंगों पर असर करती है ये बीमारी-

रूमेटॉयड अर्थराइटिस: गठिया का ये प्रकार लोगों को सबसे अधिक अपनी चपेट में लेता है। इस बीमारी में शरीर के सभी जोड़े सबसे अधिक प्रभावित होते हैं। अगर इसका इलाज जल्दी नहीं करवाया जाए तो मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है।

ओस्टियोसोराइसिस: अर्थराइटिस के इस प्रकार को आनुवांशिक माना जाता है। उम्र बढ़ने के साथ लोग ओस्टियोसोराइसिस बीमारी से पीड़ित होते हैं। इस बीमारी का सबसे अधिक असर उन शरीर के उन अंगों पर पड़ता है जो पूरी बॉडी का भार उठाते हैं। आमतौर पर ये बीमारी मरीज के पांव, घुटने व कमर को प्रभावित करती है।

गाउट: गाउट भी एक प्रकार का गठिया होता है जो शरीर में तब बनता है जब यूरिक एसिड का स्तर बॉडी में बढ़ जाए। जोड़ों में मोनोसोडियम युरेट क्रिस्टल के समाप्‍त होने पर गाउट यानि कि गांठ वाला अर्थराइटिस होता है। खानपान में बदलाव व कुछ जरूरी दवाइयों के सेवन से इस बीमारी को कंट्रोल किया जा सकता है। गाउट में मरीजों को अक्सर जोड़ों में दर्द और सूजन व हाथ-पैर की उंगलियों में चुभने वाला असहनीय दर्द होता है।

स्पाइनल अर्थराइटिस: रीढ़ की हड्डी के अर्थराइटिस से लोग तब पीड़ित होते हैं जब उनकी गर्दन और निचले हिस्से में जोड़ों व डिस्क का कार्टिलेज टूट जाता है। इसके चलते व्यक्ति को गर्दन या कमर में लंबे समय तक दर्द रहने लगता है। किसी चोट, मोटापा या आनुवांशिक कारणों से ये बीमारी लोगों को अपनी चपेट में लेती है। इसमें लोगों को पीठ व गर्दन में दर्द और अकड़न बनी रहती है। साथ ही किसी भी प्रकार की गतिविधि को करने में भी दिक्कत महसूस होती है।

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