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हाई यूरिक एसिड के कारण हो सकता है गठिया, इन 3 योगासनों से पा सकते हैं काबू – जानिये

Yoga for Arthritis: यूरिक एसिड एक ऐसा केमिकल है जो शरीर में तब बनता है जब शरीर प्यूरीन नाम के प्रोटीन का ब्रेकडाउन करता है

Uric Acid, uric acid patients, uric acid and arthritis, yogasanas for arthritis, yoga for uric acid patientsयोग हमारे शरीर और मन को चुस्त – दुरुस्त बनाए रखने का बेहतरीन माध्यम है

Uric Acid Home Remedies: यूरिक एसिड एक ऐसी बीमारी है जिससे जुड़ी समस्याएं बढ़ते समय के साथ मरीजों को और भी अधिक परेशान करती हैं। गठिया रोग, जोड़ों में दर्द, गाउट और सूजन जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का एक आम कारण यूरिक एसिड का बढ़ना भी माना जाता है। अर्थराइटिस यानि कि गठिया में मरीजों को हाथ और पैरों में व जोड़ों में असहनीय दर्द होता है। इस समस्या से निजात दिलाने में योग को कारगर माना जाता है। योग हमारे शरीर और मन को चुस्त – दुरुस्त बनाए रखने का बेहतरीन माध्यम है। ऐसे में जोड़ों के दर्द और गठिया से होने वाली बाकी समस्याओं से दूरी बनाए रखने के लिए अपनी दिनचर्या में इन योगासनों को शामिल करें।

वीरभद्र आसन: इसे वॉरियर पोज भी कहा जाता है। इससे करने से अर्थराइटिस यानी गठिया से छुटकारा मिलता है।  इस योगासन को करने के लिए आप सबसे पहले आप अपने पैरों को थोड़ा फैलाकर सीधे खड़े हो जाएं। अब दाएं पैर को 90 और बाएं पैर को 15 कोण पर मोड़ लें। दोनों हाथों को कंधो तक उपर उठाएं और हथेलियों को खोलकर आसमान की तरफ रखें। ध्यान रहें कि आपका हाथ ज़मीन के समानांतर हो। अब सांस छोड़ते हुए दाहिने घुटने को मोड़ें और सिर को घुमाते हुए अपनी दाहिनी ओर देखें। इस क्रिया को आप कई बार दोहरा सकते हैं।

गोमुखासन: इससे हाथ पैर की मांसपेशियों में चुस्ती बनी रहती है। दर्द में भी इस योग को करने से बहुत लाभ मिलता है। इस योग को करने के लिए आप मैट पर क्रॉस पैर वाली मुद्रा में बैठ जाएं। इसके बाद अपने बाएं पैर को अपने शरीर की तरफ ले आएं। दाएं पैर को बाएं पैर की जांघ के उपर रखें और उसे भी अपने शरीर के पास ले आएं। अब अपने दाएं हाथ को कंधे के उपर करें और कोहनी को मोड़ते हुए अपने पीठ के पीछे जितना हो सके, ले जाएं। अब अपने बाएं हाथ को भी कोहनी से मोड़ते हुए पेट की तरफ़ से पीछे की ओर पीठ पर ले जाएं और दोनों हाथों को खींचकर आपस में मिलाने की कोशिश करें। कुछ देर तक इसी स्थिति में बनें रहें।

विपरीतकर्णी आसन: यह गठिया में बहुत लाभदायक सिद्ध होता है, साथ ही तनाव को कम करने में ये सहायक होता है। इसे करने के लिए मैट पर पीठ के बल लेट जाएं। दोनों हाथों और पैरों को ज़मीन पर सीधा रखें। अब धीरे से पैरों को ऊपर उठाएं , करीब 90 डिग्री के कोण तक उन्हें उपर उठाएं रखें। ध्यान रहे कि आपका पीठ और सिर फर्श पर आराम की मुद्रा में हो। इस स्थिति में आप आंखे बन्द करके कुछ समय के लिए रहें फिर आराम की अवस्था में आ जाएं।

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