प्रेग्नेंसी के दौरान महिलाओं को कब्ज होना एक आम परेशानी है। महिलाओं के बिगड़े पाचन के लिए कई कारण जिम्मेदार हो सकते हैं जैसे हार्मोनल बदलाव, बढ़ता हुआ गर्भाशय,आयरन सप्लीमेंट का सेवन,पानी और फाइबर की कमी और बॉडी एक्टिविटी में कमी होने से कब्ज की परेशानी होने लगती है। ऐसे में गर्भावस्था के दौरान हर महिला को अपनी डाइट का खास ध्यान रखना जरूरी होता है, क्योंकि वह जो कुछ भी खाती हैं, उसका सीधा असर उसके शिशु के विकास पर पड़ता है। भारतीय थाली में दालें (Pulses) प्रोटीन और सूक्ष्म पोषक तत्वों (Micronutrients) का सबसे बड़ा स्रोत हैं।
मेडिकेयर गायनी एंड स्टोन हॉस्पिटल में गाइनेकोलॉजिस्ट, डॉ. संघमित्रा ने बताया प्रेग्नेंसी के दौरान जो भी खाना खाया जाता है, उसका सीधा असर ना सिर्फ मां की सेहत पर पड़ता है, बल्कि गर्भ में पल रहे शिशु की ग्रोथ और विकास पर भी होता है। हालिया पोषण संबंधी शोध और विशेषज्ञों के अनुसार अरहर यानी तुअर दाल समेत 4 प्रमुख दालें गर्भवती महिला के पाचन तंत्र को मजबूत रखने और गर्भ में पल रहे शिशु के संपूर्ण शारीरिक व मानसिक विकास में बेहद मददगार साबित होती हैं। आइए रिसर्च के आधार पर जानते हैं इन 4 दालों के फायदे और दाल का सेवन करते समय कौन-कौन सी सावधानियां जरूरी होती है।
प्रेग्नेंसी में दालों का सेवन
प्रेग्नेंसी के दौरान डाइट में दालों का सेवन एक साथ कई परेशानियों का हल निकाल सकता है। अक्सर महिलाएं प्रेग्नेंसी में दाल खाने से परहेज करती हैं, दालों का सेवन पेट में गैस का कारण बनता है और महिलाएं उसे खाना छोड़ देती हैं जो महिलाओं से लेकर उनके बच्चे तक की सेहत के लिए नुकसानदायक होता है। कुछ दालें प्रेग्नेंसी में महिलाओं की सेहत के वरदान साबित होती हैं साथ ही बच्चे के शारीरिक विकास में भी अहम रोल निभाती हैं। आइए जानते हैं कि कौन कौन सी ऐसी दालें हैं जो प्रेग्नेंसी में मां और बच्चे की सेहत के लिए जरूरी हैं।
अरहर की दाल (Toor/Arhar Dal) का करें सेवन
अरहर की दाल भारतीय घरों में सबसे ज्यादा खाई जाती है। गर्भावस्था में इस दाल का सेवन बेहद असरदार साबित होता है। अरहर की दाल में मौजूद फॉलिक एसिड मां से लेकर बच्चे तक की सेहत के लिए असरदार साबित होता है। मेडिकल रिसर्च साबित करती हैं कि गर्भावस्था के शुरुआती हफ्तों में फोलिक एसिड का सेवन शिशु में न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट्स यानी मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी से जुड़े जन्मजात दोष के खतरे को कम करती है।
Asian Journal of Dairy & Food Research और ResearchGate पर प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक अरहर की दाल में भरपूर मात्रा में डाइटरी फाइबर होता है, जो पाचन को दुरुस्त करने में असरदार होता है। प्रेग्नेंसी में अगर प्रेग्नेंट महिला इस दाल का सेवन करती है तो उसका पाचन दुरुस्त रहता है और कब्ज की समस्या से निजात मिलती है। प्रेग्नेंसी में अक्सर आंतें पानी को ज्यादा सोख लेती हैं जिससे मल सख्त हो जाता है। अरहर की दाल का फाइबर आंतों में नमी बनाए रखता है, जिससे पेट साफ होने में कठिनाई नहीं होती।
मूंग की दाल (Moong Dal) भी करेगी असर
मूंग की दाल खासतौर पर पीली या छिलके वाली दाल को मेडिकल साइंस और आयुर्वेद दोनों ही हल्का और सुपाच्य मानते हैं। गर्भावस्था के दौरान अक्सर गैस, एसिडिटी और ‘मॉर्निंग सिकनेस या उबकाई आने की समस्या रहती है। ऐसे में नाश्ते में या खाने में मूंग की दाल का सेवन पाचन को बेहतर बनाता है। इसका सेवन करने से पेट शांत रहता है और पाचन दुरुस्त रहता है। यह प्रोटीन और आयरन का बेहतरीन स्रोत है, जो शिशु की नई कोशिकाओं (Cells) के निर्माण और मांसपेशियों के विकास के लिए जरूरी है। Food Chemistry और Journal of Agricultural and Food Chemistry में प्रकाशित रिसर्च के मुताबिक मूंग की दाल में मौजूद प्रोटीन और कार्बोहाइड्रेट की संरचना दूसरी दालों जैसे चना या उड़द की तुलना में बहुत सरल होती है।
मसूर की दाल (Masoor Dal)
लाल या काली मसूर की दाल पोषक तत्वों से भरपूर होती है और गर्भावस्था के दौरान महिलाओं में ऊर्जा का स्तर बनाए रखने में मदद करती है। प्रेग्नेंसी में महिलाओं में खून की कमी (एनीमिया) का खतरा बढ़ जाता है। मसूर की दाल में आयरन प्रचुर मात्रा में होता है, जो शरीर में हीमोग्लोबिन बढ़ाता है। इससे शिशु तक ऑक्सीजन और पोषण की सप्लाई बेहतर तरीके से होती है। यह दाल फाइबर से भरपूर होती है, जो ब्लड शुगर लेवल को अचानक बढ़ने से रोकती है। इस दाल का सेवन करने से प्रेग्नेंसी में होने वाली जेस्टेशनल डायबिटीज का खतरा कम होता है।
उड़द की दाल (Urad Dal)
उड़द की दाल काली या धुली हुई दोनों उड़द की दाल पोषक तत्वों का पावर हाउस है। लेकिन प्रेग्नेंसी में इनका सीमित सेवन करना ही फायदेमंद होता है। उड़द की दाल में कैल्शियम, पोटैशियम और फास्फोरस अच्छी मात्रा में होते हैं। यह शिशु की हड्डियों और दांतों के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। यह शरीर को ताकत देती है और गर्भावस्था के दौरान होने वाली थकान को दूर करती है।
इन बातों का रखें ध्यान
प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञ (ऑब्सटेट्रिशियन एवं गायनेकोलॉजिस्ट) डॉ. सपना बुंदीवाल ने बताया प्रेग्नेंसी में प्रोटीन के लिए अगर दालों का सेवन कर रहे हैं तो कुछ बातों का जरूर ध्यान रखें। प्रेग्नेंसी में कच्ची या अंकुरित (Sprouted) दालें जैसे अंकुरित मूंग, खाने से बचें। इनमें बैक्टीरिया हो सकते हैं जो मां और बच्चे दोनों को नुकसान पहुंचा सकते हैं। अगर आप अंकुरित दाल खाना चाहती हैं तो उसे हमेशा उबालकर खाएं। उबालकर दालों का सेवन करने से गैस कंट्रोल रहेगी और पाचन दुरुस्त रहेगा। दालों से बहुत अच्छी मात्रा में पोषक तत्व मिलते हैं, लेकिन किसी एक दाल का बहुत अधिक सेवन करने से गैस हो सकती है इसलिए अपनी डाइट में बदलाव करते रहें।
| दाल का नाम | मुख्य पोषक तत्व | शिशु को फायदा | पाचन/मां को फायदा |
| अरहर दाल | फॉलिक एसिड, फाइबर | दिमागी विकास, जन्मजात दोषों से बचाव | कब्ज से राहत |
| मूंग दाल | प्रोटीन, पोटैशियम | मांसपेशियों का विकास | पचाने में आसान, गैस से राहत |
| मसूर दाल | आयरन, फोलेट | हीमोग्लोबिन बढ़ाना, बेहतर ऑक्सीजन | जेस्टेशनल डायबिटीज नियंत्रण |
| उड़द दाल | कैल्शियम, प्रोटीन | हड्डियों और दांतों का विकास | शारीरिक ताकत और ऊर्जा |
डिस्क्लेमर: यह लेख केवल सामान्य जानकारी और जागरूकता के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई जानकारी किसी डॉक्टर की सलाह का विकल्प नहीं है। गर्भावस्था के दौरान कब्ज या किसी भी स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर स्वयं दवा न लें और उचित जांच व उपचार के लिए अपने स्त्री रोग विशेषज्ञ या योग्य चिकित्सक से परामर्श अवश्य करें।
