वाह क्या सीन है! जैसे डायलॉग से मशहूर अभिनेत्री Archana Puran Singh अपनी हंसी और जिंदादिली के लिए जानी जाती हैं, लेकिन हाल ही में उन्होंने अपनी सेहत को लेकर एक नया “रीसेट बटन” दबाया है। आयुर्वेदिक शिविर में समय बिताने के बाद अर्चना ने सोशल मीडिया पर अपने फैंस के साथ अपना नया लाइफस्टाइल सीक्रेट साझा किया है। अर्चना के मुताबिक, उम्र के इस पड़ाव पर शरीर को अंदर से साफ यानी डिटॉक्स करना और सात्विक जीवनशैली अपनाना उनके लिए किसी जादुई अनुभव से कम नहीं रहा।

Disclaimer: यह लेख सार्वजनिक स्रोतों और विशेषज्ञों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। किसी भी नई दिनचर्या को शुरू करने से पहले अपने स्वास्थ्य विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह अवश्य लें।

63 वर्षीय अर्चना पूरन सिंह, जो हाल ही में बेंगलुरु में 15 दिन के आयुर्वेदिक शिविर से लौटी हैं, उन्होंने अपनी नई दिनचर्या के बारे में खुलकर बात की। अपने बड़े बेटे आर्यमान सेठी के यूट्यूब व्लॉग में परिवार से बातचीत करते हुए कहा- मेरा सब बंद है। उन्होंने बताया कि उनकी डाइट में अब

नो मीठा
नो मैदा
नो तला हुआ खाना शामिल है।

अपने नए रूटीन के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि फिट रहने के लिए उन्हें रात 10–11 बजे तक सोना है। हंसते हुए उन्होंने यह भी कहा नो एंजॉयमेंट, नो नाइट पार्टी।

अदाकारा ने यह भी बताया कि उन्हें रात का खाना शाम 7 बजे तक खा लेना होता है, जो आयुर्वेदिक दिनचर्या का अहम हिस्सा माना जाता है। अब सवाल यह है कि आखिर अर्चना पूरन सिंह का यह ‘हेल्थ रीसेट मोड’ क्या है और आयुर्वेद के वे कौन से नियम हैं, जिन्हें अपनाकर आप भी खुद को तरोताजा और फिट महसूस कर सकते हैं?

एक्सपर्ट से जानते हैं कि 50 से 60 साल की उम्र में आयुर्वेदिक शिविर में जाने से क्या फायदा होता है?

KIMS हॉस्पिटल, ठाणे में चीफ डाइटीशियन अमरीन शेख ने बताया 50 से 60 साल की उम्र में इस तरह का रूटीन रीसेट काफी फायदेमंद हो सकता है, खासकर जब खानपान अनियमित रहा हो या तनाव ज्यादा रहा हो। एक्सपर्ट ने बताया डाइट में मीठा, रिफाइंड फ्लोर यानी मैदा और तला हुआ खाना कम करना जरूरी है। डाइट में इन फूड्स से परहेज करके आप सूजन को कंट्रोल कर सकते हैं और पाचन को बेहतर बना सकते हैं। डाइट में मीठा और मैदा को कंट्रोल करके आप ब्लड में शुगर का स्तर भी कंट्रोल कर सकते हैं।

जल्दी डिनर के फायदे

अर्चना ने बताया रात में जल्दी सोना यानी कि 7 बजे तक सोना बहुत जरूरी है। जल्दी खाकर जल्दी सोने से शरीर को सोने से पहले खाना पचाने का पर्याप्त समय मिलता है। जल्दी खाने और जल्दी सोने से मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है। पाचन पर भी इस रूटीन का बेहतर असर होता है। रात 7 बजे खाकर सोने से आपको एसिडिटी, ब्लोटिंग और खराब नींद की समस्या कम होती है।

रात 10 बजे तक सोने से सेहत को कौन-कौन से फायदे होते हैं?

  • रात में 10 बजे तक सोना शरीर की सर्केडियन रिदम (Circadian Rhythm) के साथ मेल खाता है।
  • हार्मोन बैलेंस बेहतर रहता है
  • जल्दी सोने से भूख और तृप्ति से जुड़े हार्मोन सही तरह से काम करते हैं।
  • एनर्जी और मूड बेहतर होता है

रिट्रीट का असर

एक्सपर्ट ने बताया छोटा सा रिट्रीट या लाइफस्टाइल रीसेट भी लोगों को अपने खान-पान और आदतों के प्रति जागरूक बना सकता है। लाइफस्टाइल में इस तरह का बदलाव करने से शरीर को रिपेयर मोड में जाने का समय मिलता है, जो हमारी इम्युनिटी को बूस्ट करता है और मेटाबॉलिज्म में सुधार करता है। वेट मैनेजमेंट के लिए भी ये बदलाव जरूरी है।

क्या पूरी तरह परहेज करना सही है?

एक्सपर्ट के अनुसार डाइट से पूरी तरह से कुछ चीजों को बंद करना लंबे समय में मुश्किल हो सकता है, इससे क्रेविंग बढ़ सकती है। बेहतर तरीका है कि संतुलन बनाया जाए। मॉडरेशन में चीजों का चुनाव किया जाए।  मीठे की जगह नेचुरल मिठास जैसे फ्रूट्स का सेवन किया जाए। मैदा की जगह होल ग्रेन्स का सेवन किया जाए।  फ्राइड फूड की जगह ग्रिल्ड, स्टीम्ड या सॉटे फूड का सेवन करें। एक्सपर्ट ने बताया आप ऐसी रूटीन बनाओं जो रोजमर्रा की जिंदगी में आसानी से फिट हो जाए और ज्यादा सख्त न लगे।

किन लोगों को सावधानी बरतनी चाहिए?

जिन लोगों की किसी भी तरह की मेडिकल हिस्ट्री है वो खासतौर पर सावधानी बरतें।
जिनकी खास डाइट जरूरतें हैं वो अपने डॉक्टर से सलाह लेकर ही डाइट में बदलाव करें।
जिनकी लाइफस्टाइल बहुत व्यस्त है वो अपनी रूटीन बदलने से पहले डॉक्टर से मशवरा लें।
ऐसे लोगों को इस तरह के बदलाव अपनी जरूरत के हिसाब से करने चाहिए। अचानक बड़े बदलाव करने के बजाय धीरे-धीरे बदलाव करना ज्यादा आसान और फायदेमंद होता है।

डिस्क्लेमर (Disclaimer):

यह लेख सार्वजनिक स्रोतों और विशेषज्ञों से प्राप्त जानकारी पर आधारित है। इसमें बताई गई दिनचर्या और सुझाव सामान्य जानकारी के लिए हैं। किसी भी नई डाइट, डिटॉक्स या लाइफस्टाइल रूटीन को अपनाने से पहले अपने डॉक्टर या योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह अवश्य लें, खासकर यदि आपको कोई पुरानी बीमारी या स्वास्थ्य संबंधी समस्या है।