आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में तनाव और चिंता आम बात हो गई है, लेकिन जब यह समस्या लगातार बनी रहे और रोजमर्रा के कामों को प्रभावित करने लगे, तो यह एंजायटी या पैनिक डिसऑर्डर का रूप ले सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सामान्य घबराहट और क्लिनिकल एंजायटी के बीच के फर्क को समझना बेहद जरूरी है। क्या आप जानते हैं कि बिना किसी ठोस कारण के महसूस होने वाली बेचैनी आपके शरीर के अंदर छिपे कुछ गहरे रिस्क फैक्टर्स का संकेत हो सकती है? साइकोलोजी के मुताबिक पैनिक डिसऑर्डर रातों-रात पैदा नहीं होता, बल्कि इसके पीछे कई मनोवैज्ञानिक और शारीरिक कारण होते हैं।

गैस्ट्रो लीवर हॉस्पिटल, स्वरूप नगर कानपुर के डॉक्टर वी.के. मिश्रा के अनुसार, एंजायटी और पैनिक डिसऑर्डर के पीछे कई ऐसे कारण होते हैं जिन्हें समय रहते पहचानना बेहद जरूरी है। चिकित्सा विशेषज्ञों (Doctors) के अनुसार, ऐसी 10 प्रमुख स्थितियां हैं जो इस मानसिक समस्या को ट्रिगर करती हैं। आइए जानते हैं क्या हैं ये रिस्क फैक्टर्स और डॉक्टर की सलाह के अनुसार इनसे कैसे बचा जा सकता है।

एंजाइटी और पैनिक डिसऑर्डर क्या है?

डॉक्टर बताते हैं कि सामान्य घबराहट (नर्वसनेस) जीवन का हिस्सा है, लेकिन अगर यह रोज महसूस हो, बहुत ज्यादा तीव्र हो या लगातार चिंता बनी रहे तो यह एंजायटी डिसऑर्डर की श्रेणी में आता है। वहीं, पैनिक अटैक एक ऐसी स्थिति है जिसमें अचानक तेज डर, घबराहट, दिल की धड़कन बढ़ना, सांस फूलना, पसीना आना और बेचैनी जैसे लक्षण तेजी से महसूस होते हैं। यह अटैक कुछ मिनटों में चरम पर पहुंच जाता है और व्यक्ति को ऐसा लग सकता है जैसे कुछ गंभीर होने वाला है। कम शब्दों में कहें तो बेचैनी का तेज दौरा पैनिक अटैक कहलाता है। ये दोनों स्थितियां ही परेशान करने वाली हो सकती है।

एंजाइटी और पैनिक डिसऑर्डर के 10 बड़े रिस्क फैक्टर्स

  1. एंजायटी और पैनिक डिसऑर्डर की परेशानी  जेनेटिक्स (Genetics) भी हो सकती है। इसमें कोई दो राय नहीं कि एंजाइटी का कोई जीन नहीं होता लेकिन आपकी फैमिली हिस्ट्री में एंजायटी डिसऑर्डर है तो आपको एंजायटी और पैनिक डिसऑर्डर का रिस्क ज्यादा रहेगा।
  2. कम उम्र में माता-पिता का खोना भी एंजाइटी और पैनिक अटैक का कारण बनता है। 18 साल से पहले पेरेंटल लॉस होने पर एंजाइटी का जोखिम ज्यादा होता है।
  3. ट्रामा और हाई स्ट्रेस इवेंट्स भी एंजॉय डिसऑर्डर का कारण बनता है। अगर 21 साल से पहले आपकी जिंदगी में सेक्सुअल एब्यूज,शोषण, एल्कोहोलिज्म, फैमिली प्रॉब्लम जिसमें हिंसा ज्यादा हो वो भी एंजायटी डिसऑर्डर का कारण बनती है।  
  4. लंबे समय तक डिप्रेशन में रहने से एंजाइटी भी विकसित हो सकती है।
  5. लगातार तनाव जैसे फाइनेंशियल समस्या, गंभीर बीमारी या वर्क प्रेशर एंजायटी को बढ़ा सकता है।
  6. बहुत ज्यादा संवेदनशील होना, आलोचना से डरना या सोशल सिचुएशन से बचना एंजायटी का कारण बन सकता है।
  7. शराब या ड्रग्स का सेवन एंजायटी को और बढ़ा सकता है और एक दुष्चक्र बना देता है।
  8. लंबे समय तक सामाजिक अलगाव एंजायटी और डिप्रेशन दोनों को बढ़ा सकता है। अगर आप लम्बे समय तक आइसोलेट रहते हैं तो आप एंजायटी डिसऑर्डर का शिकार हो सकते हैं।
  9. कुछ बीमारियां जैसे हार्ट डिजीज, डायबिटीज, थायरॉयड या अस्थमा जैसी बीमारियां एंजायटी को ट्रिगर कर सकती हैं।
  10. महिलाओं में एंजायटी डिसऑर्डर पुरुषों की तुलना में ज्यादा देखा जाता है, हालांकि इसका स्पष्ट कारण अभी तक सामने नहीं आया है।

कब समझें कि आपको डॉक्टर के पास जाने की जरूरत है?

अगर आपको लगातार घबराहट, डर, दिल की धड़कन तेज होना, पसीना आना या बेचैनी महसूस होती है तो इसे नजरअंदाज नहीं करें आप तुरंत डॉक्टर को दिखाएं।

पैनिक अटैक और एंजाइटी को कंट्रोल करने के लिए क्या करें

  • पैनिक अटैक और एंजाइटी तनाव की वजह से पनपने वाली परेशानियां हैं, इससे बचने के लिए आप तनाव को कम करें। तनाव को कंट्रोल करने के लिए आप योग करें, एक्सरसाइज करें, वॉक करे।
  • तनाव कम करने के लिए आप दोस्तों के साथ रहें, अकेले रहने से बचें, टीवी देखें, गाना सुने और दूसरी सोशल एक्टिविटी में भाग ले सकते हैं।
  • तनाव को कंट्रोल करने के लिए आप नींद पूरी लें। रोजाना रात में 8-9 घंटे की नींद लें। रात की नींद तनाव को कंट्रोल करती है और बॉडी को फ्रेश रखती है।
  • जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ से सलाह लें
  • शराब और नशे से दूर रहें। डॉक्टर का कहना है कि एंजायटी के पीछे छिपे कारणों को पहचान कर उन्हें ठीक किया जाए, तो इस समस्या को काफी हद तक कंट्रोल किया जा सकता है।

डिस्क्लेमर:

लेख में दी गई जानकारी केवल सामान्य जागरूकता के लिए है और इसे किसी पेशेवर चिकित्सा परामर्श, निदान या उपचार का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए। एंग्जायटी या पैनिक अटैक के लक्षण महसूस होने पर तुरंत किसी प्रमाणित मनोचिकित्सक (Psychiatrist) या काउंसलर से संपर्क करें। जंसत्ता इन जानकारियों की जिम्मेदारी नहीं लेता है।