कोविड-19 एक ऐसा वायरस है, जिसका नाम सुनते ही साल 2020 की भयावह महामारी की याद ताजा हो जाती है। उस दौरान इस संक्रमण ने भारत समेत पूरी दुनिया में करोड़ों लोगों को प्रभावित किया और लाखों लोगों की जान चली गई। महामारी ने न केवल स्वास्थ्य व्यवस्था पर भारी दबाव डाला, बल्कि लोगों के दैनिक जीवन और वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी गहराई से प्रभावित किया। एक बार फिर से कोविड-19 की वजह से मौत का मामला सामने आया है। आंध्र प्रदेश में कोविड-19 से दो लोगों की मौत हो गई और 8 नए संक्रमण के मामले सामने आए हैं।

कोविड के नए मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर है। वर्ष 2022 के बाद राज्य में कोविड से हुई ये पहली मौतें हैं। हालांकि स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि इस मौत को कोरोना की नई लहर या बड़े प्रकोप के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। उनके अनुसार ये छिटपुट मामले हैं और स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

कोरोना वायरस एक बार फिर परेशान करेगा क्या?

आंध्र प्रदेश के कडप्पा जिले में कोविड से जुड़ी दो मौतों और कुछ एक्टिव मामलों की पुष्टि के बाद कोरोना फिर चर्चा में आया है। राज्य के स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक कोविड से जिन दो लोगों की मौत हुई है उन्हें पहले से ही कई गंभीर बीमारियां जैसे डायबिटीज और किडनी की बीमारी थी। 28 जून को इलाज के दौरान पहले मरी की मौत हो गई। पोस्टमार्टम के बाद की गई RT-PCR जांच में वह कोविड-19 पॉजिटिव पाया गया।

दूसरी मौत 7 जुलाई को कडपा के सरकारी जनरल अस्पताल में भर्ती 46 साल के व्यक्ति की हुई। मरीज़ को बहुत ज़्यादा सांस लेने में तकलीफ़ और लगातार खांसी की वजह से भर्ती कराया गया था; फेफड़ों में गंभीर नुकसान और निमोनिया के कारण उनकी मौत हो गई। चेस्ट CT स्कैन करने पर फेफड़ों में बड़े पैमाने पर नुकसान का पता चला, जो कोविड-19 के लक्षणों से मेल खाता था।

क्या भारत में कोरोना की नई लहर आ सकती है?

आंध्र प्रदेश के स्वास्थ्य सचिव एस. सुरेश कुमार ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, कुल आठ लोगों में कोविड संक्रमण की पुष्टि हुई है। इनमें से पांच मरीज कडप्पा जिले के हैं, जबकि बाकी तीन उनके संपर्क में आए लोग हैं। सभी संक्रमितों की निगरानी की जा रही है। सुरेश ने बताया हम स्थिति पर बारीकी से नज़र रख रहे हैं और घबराने की कोई ज़रूरत नहीं है क्योंकि यह छिटपुट मामला है। सुरेश कुमार ने बताया यह कोई आउटब्रेक (महामारी का प्रकोप) नहीं है और निगरानी व कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग के उपाय पहले से ही मौजूद हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि कोविड अब इन्फ्लुएंजा जैसे वायरस की तरह कम स्तर पर सर्कुलेट कर सकता है, इसलिए कभी-कभी मामलों का बढ़ना जरूरी नहीं कि कोविड की नई लहर की शुरुआत है।

क्या कोई नया ओमिक्रॉन सब-वेरिएंट सामने आया है?

कुछ डॉक्टरों ने आशंका जताई है कि मरीजों में तेजी से सांस संबंधी गंभीर समस्याएं विकसित होने के कारण इसके पीछे ओमिक्रॉन का अधिक संक्रामक सब-वेरिएंट हो सकता है। हालांकि अभी तक इसकी पुष्टि नहीं हुई है। इसकी जांच के लिए संक्रमित मरीजों और मृतकों के गले व नाक के नमूनों को पुणे स्थित नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी (NIV) भेजा गया है, जहां जीनोम सीक्वेंसिंग की जा रही है। रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि संक्रमण किस वेरिएंट से हुआ है।

क्या चिंता की बात है?

विशेषज्ञों का कहना है कि ओमिक्रॉन वेरिएंट तेजी से फैलने वाला वायरस है, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में लोगों में विकसित हुई इम्यूनिटी के कारण इसके अधिकांश मामलों में बीमारी पहले की तुलना में कम गंभीर देखी गई है। राज्य सरकार का कहना है कि पिछले छह दिनों में कोई नया मामला सामने नहीं आया है। साथ ही विशेषज्ञों की समिति ने फिलहाल किसी नए या अधिक खतरनाक सब-वेरिएंट की संभावना से भी इनकार किया है।

बचाव के लिए क्या सावधानी बरतें?

स्वास्थ्य विभाग ने लोगों खासकर बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों और गंभीर बीमारियों से पीड़ित मरीजों को सतर्क रहने की सलाह दी है। अगर किसी को बुखार, खांसी, गले में खराश या सांस लेने में तकलीफ जैसे लक्षण दिखाई दें तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें और आवश्यकता पड़ने पर कोविड जांच कराएं।

डिस्क्लेमर: यह खबर उपलब्ध सरकारी जानकारी और स्वास्थ्य अधिकारियों के बयानों पर आधारित है। कोविड-19 से संबंधित दिशा-निर्देश समय-समय पर बदल सकते हैं, इसलिए स्थानीय स्वास्थ्य विभाग की सलाह का पालन करें।