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ब्लड प्रेशर से लेकर यूरिक एसिड को कंट्रोल करने में कारगर हो सकता है यह एक ड्राई फ्रूट, जानिए अन्य स्वास्थ्य लाभ

बादाम में कैलोरी और फैट की मात्रा बेहद कम होती है, जिसकी वजह शरीर में किसी तरह का एक्सट्रा फैट जमा नहीं होता है।

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क्या बादाम खाने से यूरिक एसिड बढ़ता है? (Image: Freepik)

यूरिक एसिड की मात्रा जब शरीर में अधिक बढ़ जाती है तो वह गाउट का रूप ले लेती है। इस समस्या के कारण पैर के अंगूठे और जोड़ों में दर्द और सूजन की समस्या होने लगती है। लेकिन यूरिक एसिड बढ़ने के कारण शरीर के कई अन्य हिस्सों को भी नुकसान पहुंचता है। ऐसे में कंट्रोल करना बहुत जरूरी होता है। यूरिक एसिड बढ़ने की समस्या तब भी उत्पन्न होती है जब किडनी अपने फिल्टर करने की क्षमता को कम कर देती है।

यूरिक एसिड के मरीजों को हाई प्यूरिन वाले फूड्स को खाने से बचना चाहिए। यूरिक एसिड के मरीज बादाम खा सकते हैं बल्कि इसके सेवन से आपको जोड़ों के दर्द और सूजन में राहत मिल सकती है। ऐसे में बादाम खाना उनके लिए फायदेमंद साबित हो सकता है। आइए जानते हैं कैसे फायदेमंद होता है-

यूरिक एसिड में फायदेमंद: बादाम स्वास्थ्य के लिए बेहद फायदेमंद होता है। बादाम में कैल्शियम, मैग्निशियम, कॉपर, विटामिन के, प्रोटीन, जिंक और फाइबर की भरपूर मात्रा पाई जाती है। जो यूरिक एसिड की समस्या को कंट्रोल करने में मदद करता है। इसके अलावा बादाम में प्यूरिन की मात्रा भी कम होती है जो यूरिक एसिड के मरीजों को किसी प्रकार का कोई नुकसान नहीं पहुंचाती है। यह जोड़ों में दर्द और सूजन से भी राहत दिलाने में मदद करता है।

बादाम खाने के अन्य फायदे:

ब्लड प्रेशर को करे नियंत्रित: बादाम में मैग्निशिय उच्च मात्रा में होता है जो ब्लड प्रेशर की समस्या को कंट्रोल करने में मदद करता है। साथ ही हार्ट अटैक, स्ट्रोक और किडनी फेल होने के खतरे को भी कम करता है। शरीर में मैग्निशियम की कमी होने के कारण हाई ब्लड प्रेशर और मोटापे की समस्या का खतरा भी बढ़ता है।

वजन कम करने में सहायक: रोजाना बादाम खाने से वजन कम करने में आसानी होती है। बादाम में फैट और कैलोरी की मात्रा भी कम होती है जिसके कारण शरीर में एक्सट्रा फैट एकत्रित नहीं होता है। इसके अलावा बादाम खाने से बेली फैट भी कम होता है।

डायबिटीज को करे कंट्रोल: बादाम में मोनोसेचुरेटेड फैटी एसिड होता है जो शरीर में ग्लूकोज के लेवल को बैलेंस करता है और ब्लड शुगर और डायबिटीज को कंट्रोल करने में मदद करता है। इसके अलावा यह ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को भी कम करने में मदद करता है और ग्लूकोज लेवल को बढ़ने से रोकता है।

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