दूषित हवा हमारे लंग्स के लिए खतरा है ये हम सभी जानते हैं, लेकिन आप जानते हैं कि दूषित हवा से हमारी किडनी को भी खतरा है। किडनी इंटरनेशनल रिपोर्ट्स’ जर्नल में प्रकाशित एक रिसर्च ने हम सभी को चौंका दिया। इस रिसर्च में 12,000 से ज़्यादा लोगों को शामिल किया गया जिस पर शोधकर्ताओं ने दस साल तक नज़र रखी। शोधकर्ताओं ने पाया कि PM2.5 के संपर्क में ज़्यादा आने से किडनी की फ़िल्टर करने की क्षमता कम हो जाती है। यह कमी तब भी देखी गई जब शोधकर्ताओं ने डायबिटीज और हाइपरटेंशन जैसे दूसरे जोखिम वाले कारकों को ध्यान में रखा। खास बात यह है कि दूषित हवा का असर सिर्फ बुजुर्गों या पहले से किडनी रोग से पीड़ित लोगों पर ही नहीं, बल्कि युवा और हेल्दी लोगों में भी देखा गया है।
चेन्नई में ‘डॉ. मोहन डायबिटीज़ स्पेशलिटीज़ सेंटर’ के चेयरपर्सन और इस स्टडी के लेखकों में से एक, डॉ. वी. मोहन कहते हैं कि यह स्टडीज़ की एक चल रही सीरीज का हिस्सा है, जिसमें अलग-अलग बीमारियों पर वायु प्रदूषण के असर को देखा जा रहा है।रिसर्च में दिल्ली और मुंबई जैसे प्रदूषित शहर के लोगों को शामिल किया गया। ये दो ऐसे शहर हैं जहां हवा के प्रदूषण का स्तर बहुत अलग-अलग है। अब तक हमने वायु प्रदूषण के ज़्यादा लेवल और हाइपरटेंशन, डायबिटीज़ और डिस्लिपिडेमिया (कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड्स जैसे ब्लड फैट्स का ज़्यादा लेवल) के बढ़ते जोखिम के बीच संबंध दिखाया है। अब हम वायू प्रदूषण और किडनी के काम करने की क्षमता के बीच संबंध को बता रहे हैं।
क्या कहती है रिसर्च
Kidney International Reports जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में पाया गया कि दिल्ली में PM2.5 का स्तर चेन्नई की तुलना में कई गुना अधिक था। शोधकर्ताओं ने किडनी की कार्यक्षमता (eGFR) मापी, जिसमें दिल्ली के लोगों की किडनी की क्षमता चेन्नई के लोगों से कम पाई गई। अध्ययन के अनुसार, PM2.5 में हर 5 μg/m³ की बढ़ोतरी पर किडनी की कार्यक्षमता में गिरावट दर्ज की गई। शोधकर्ताओं ने पाया कि हवा में मौजूद PM2.5 कणों के संपर्क में जितनी अधिक बढ़ोतरी हुई, किडनी की फिल्टर करने की क्षमता (Kidney Filtration Function) उतनी ही तेजी से कम होती गई। शोधकर्ताओं का कहना है कि अगर किडनी की क्षमता पहले से कम हो, तो उम्र बढ़ने के साथ नुकसान और तेजी से बढ़ सकता है।
किडनी को कैसे नुकसान पहुंचाता है प्रदूषण?
विशेषज्ञों के अनुसार, PM2.5 के बेहद महीन कण सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर खून तक पहुंच सकते हैं। इससे कई तरह की समस्याएं पैदा हो सकती हैं जैसे शरीर में लगातार सूजन (Chronic Inflammation) होना, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस के कारण कोशिकाओं को नुकसान होना, रक्त वाहिकाओं की अंदरूनी परत को नुकसान, किडनी की महीन रक्त वाहिकाओं को नुकसान,खून के जरिए प्रदूषक कणों का सीधे किडनी तक पहुंचना, इन सभी कारणों से समय के साथ किडनी की कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है।
भारत के लिए यह चिंता की बात क्यों है?
भारत में करोड़ों लोग क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) से प्रभावित हैं। वहीं देश के कई शहर दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में शामिल हैं। ऐसे में यह अध्ययन इस बात के और सबूत देता है कि वायु प्रदूषण का असर सिर्फ सांस की बीमारियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह किडनी समेत शरीर के अन्य अंगों को भी प्रभावित कर सकता है।
प्रदूषण से किडनी और लंग्स का कैसे करें बचाव
- जब तक प्रदूषण के स्तर में कमी नहीं आती, तब एक्सपर्ट कुछ खास सावधानियां अपनाने की सलाह देते हैं।
- शहर में प्रदूषण का स्तर बढ़ने पर आप बाहर निकलने से परहेज करें। अगर बाहर जाते हैं तो आप N-95 मास्क पहनें।
- घर के अंदर हवा की गुणवत्ता बेहतर रखने के लिए जरूरत पड़ने पर एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें।
- हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और मोटापे को कंट्रोल रखें, ये तीनों कारण कई बीमारियों का जोखिम बढ़ाते हैं।
- पर्याप्त पानी पिएं और नियमित हेल्थ चेकअप कराएं।
- प्रदूषण कम करने के लिए सरकारी नीतियों और सामुदायिक प्रयासों का समर्थन करें।
डिस्क्लेमर:यह लेख केवल सामान्य जागरूकता और अंतरराष्ट्रीय मेडिकल जर्नल्स में प्रकाशित शोध पर आधारित है। वायु प्रदूषण या किसी अन्य कारण से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव और उसके उपचार के लिए प्रमाणित डॉक्टर या विशेषज्ञ की सलाह लें।
