कोरोना के अब तक के सर्वाधिक 1.68 लाख नए मामले सामने आए

देश में कोरोना विषाणु संक्रमण के अब तक के सर्वाधिक 1,68,912 नए मामले सामने आने के बाद संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 1,35,27,717 हो गई है।

Author नई दिल्‍ली | Updated: April 13, 2021 8:55 AM
Coronavirus, COVID-19 Lockdownभारत में कोरोनावायरस की बढ़ती रफ्तार के बीच सरकार ने वैक्सीनेशन की गति भी तेज कर दी है। (फोटो- पीटीआई)

देश में कोरोना विषाणु संक्रमण के अब तक के सर्वाधिक 1,68,912 नए मामले सामने आने के बाद संक्रमितों की कुल संख्या बढ़कर 1,35,27,717 हो गई है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सोमवार की सुबह आठ बजे के आंकड़ों के मुताबिक देश में उपचाराधीन मरीजों की संख्या 12 लाख से अधिक हो गई है और 904 और लोगों की मौत होने के बाद संक्रमण से अब तक मारे गए लोगों की कुल संख्या बढ़कर 1,70,179 हो गई है।

संक्रमण के दैनिक मामलों में लगातार 33वें दिन हुई बढ़ोतरी के बीच देश में उपचाराधीन लोगों की संख्या बढ़कर 12,01,009 हो गई है, जो संक्रमण के कुल मामलों का 8.88 फीसद है, जबकि लोगों के स्वस्थ होने की दर गिरकर 89.86 फीसद रह गई है। देश में सबसे कम 1,35,926 उपचाराधीन मरीज 12 फरवरी को थे और सबसे अधिक 10,17,754 उपचाराधीन मरीज 18 सितंबर 2020 को थे, लेकिन अब उनकी संख्या इस आंकड़े से भी आगे निकल गई है।

इस बीमारी से अब तक 1,21,56,529, लोग उबर चुके हैं जबकि मृत्यु दर 1.26 फीसद है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आइसीएमआर) के मुताबिक, 11 अप्रैल तक 25,78,06,986 नमूनों की जांच की जा चुकी है, जिनमें से 11,80,136 नमूनों की जांच रविवार को की गई।

चौबीस घंटे में जिन 904 लोगों की मौत हुई है, उनमें से महाराष्ट्र में 349 लोग, छत्तीसगढ़ में 122 लोग, उत्तर प्रदेश में 67 लोग, पंजाब में 59 लोग, गुजरात में 54 लोग, दिल्ली में 48 लोग, कर्नाटक में 40 लोग, मध्य प्रदेश में 24 लोग, तमिलनाडु में 22 लोग, झारखंड में 21 लोग, केरल व हरियाणा में 16-16 लोग और राजस्थान व पश्चिम बंगाल में 10-10 लोग हैं। संक्रमण के कारण देश में अब तक कुल 1,70,179 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें से महाराष्ट्र में 57,987 लोग, तमिलनाडु में 12,908 लोग, कर्नाटक में 12,889 लोग, दिल्ली में 11,283 लोग, पश्चिम बंगाल में 10,400 लोग, उत्तर प्रदेश में 9,152 लोग, पंजाब में 7,507 लोग और आंध्र प्रदेश में 7,300 लोग मारे गए हैं।

नियमों का पालन न करने और विषाणु के नए स्वरूप से बढ़े मामले : गुलेरिया

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के निदेशक डॉक्टर रणदीप गुलेरिया ने सोमवार को कहा कि लोगों का कोरोना से बचाव के व्यवहार का पालन नहीं करने और सार्स-कोव-2 के उच्च संक्रामक स्वरूप का प्रसार भारत में कोरोना विषाणु के बढ़ते मामलों का मुख्य कारण हो सकता है।

गुलेरिया ने आगाह किया कि अगर हालात नहीं बदले तो संक्रमण की तेजी से बढ़ती दर देश की स्वास्थ्य देखभाल व्यवस्था पर बाकी बड़ा दबाव डालेगी। उन्होंने प्रशासन और अधिकारियों द्वारा कोरोना बचाव के नियमों को लागू कराने की अपील की।
एम्स निदेशक ने कहा कि फरवरी के करीब, जब मामले कम होना शुरू हुए तो लोग लापरवाह हो गए और उन्हें लगने लगा कि विषाणु अप्रभावी हो गया है। उन्होंने कहा कि लोग अब बीमारी को हल्के में ले रहे हैं।

अगर आप बाहर जाएं तो आप देखेंगे कि बाजारों, रेस्तरां और शॉपिंग माल में भीड़ है। ये स्थान लोगों से भरे पड़े हैं और ये सभी ‘सुपर स्प्रेडर’ (तेजी से प्रसार फैलाने वाली) घटनाएं हैं। उन्होंने कहा कि इससे पहले यदि एक बीमार अपने संपर्क में आए करीब 30 फीसद लोगों को संक्रमित कर सकता था तो इस बार बीमार पड़ रहे लोग बड़ी संख्या में लोगों को संक्रमित कर रहे हैं।

गुलेरिया ने कहा कि इसलिए, संक्रमण के प्रसार की दर तेज है, इसका कारण शायद, अत्यधिक संक्रामक और संचार्य स्वरूप का फैलना है। भारत में सार्स-कोव-2 के विभिन्न स्वरूप फैल रहे हैं और विशेषज्ञों ने उन्हें तेजी से फैलाने वाला बताया है, जिनमें विषाणु के ब्रिटेन, दक्षिण अफ्रीका और ब्राजील के प्रकार शामिल हैं। सोमवार को देश में इन तीनों स्वरूपों के 948 मामले सामने आए।

गुलेरिया ने कहा कि पूरी मानवता कठिन समय से गुजर रही है और जब तक जरूरी नहीं हो, तब तक लोगों को घरों से बाहर नहीं निकलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि लोग जमा न हों और कोरोना से बचाव के व्यवहार का कड़ाई से पालन सुनिश्चित किया जाए। एम्स निदेशक ने कहा कि यदि हमने अभी ध्यान नहीं दिया तो हम वह बढ़त गवां सकते हैं जो हमने हासिल की है तथा स्थिति पूरी तरह से नियंत्रण के बाहर हो सकती है। उन्होंने लोगों से कोरोना रोधी टीका लगवाने का आग्रह किया।

इस सप्ताह दुनिया में सबसे अधिक मामले भारत में

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इस बात से आसानी से लगाया जा सकता है कि इस सप्ताह दुनिया में सबसे अधिक नए मामले दर्ज किए गए। वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक सप्ताहभर में भारत में 8.73 लाख से ज्यादा नए मामले सामने आए। संक्रमण के मामलों में साप्ताहिक वृद्धि की बात करें तो भारत में इस सप्ताह पिछले सप्ताह के मुकाबले 59 फीसद मामले बढ़े हैं।

वाशिंगटन पोस्ट के मुताबिक इस सप्ताह ब्राजील में 4.97 लाख और अमेरिका में 4.87 लाख कोरोना के मामले सामने आए। ब्राजील में साप्ताहिक वृद्धि जहां 13 फीसद रही। वहीं, अमेरिका में आठ फीसद की दर से सप्ताह में मामले बढ़ रहे हैं। कोरोना विषाणु संक्रमण से दुनिया के सबसे अधिक प्रभावित शीर्ष दस देशों की बात करें तो चार देशों में मामले बढ़ रहे हैं जबकि चार देशों में नए मामलों की संख्या में कमी दर्ज की जा रही है। सबसे अधिक प्रभावित दस देशों में सबसे तेज गति से कोरोना के मामले भारत में ही बढ़ रहे हैं। दुनिया में सोमवार शाम तक 13.60 करोड़ लोग कोरोना विषाणु से संक्रमित हो चुके थे जबकि 29.36 लाख लोगों की जान चली गई थी।

भारत में एक फीसद से कम लोगों का संपूर्ण टीकाकरण हुआ

कोरोना विषाणु संक्रमण से अपने लोगों को बचाने के लिए दुनिया के सभी देश टीकाकरण अभियान पर जोर दे रहे हैं। अमेरिका में अब तक 21.9 फीसद लोगों का संपूर्ण टीकाकरण हो चुका है जबकि 35.9 फीसद लोगों का आंशिक टीकाकरण हुआ है। वाशिंगटन पोस्ट के आंकड़ों के मुताबिक भारत में अभी 0.9 फीसद लोगों का ही संपूर्ण टीकाकरण हुआ है या कहें दोनों टीके लगे हैं जबकि 6.5 फीसद लोगों का आंशिक टीकारण हुआ है।

हालांकि कुल टीकों की संख्या के मामले में भारत अमेरिका के बाद दूसरे स्थान पर है। वाशिंगटन पोस्ट के आंकड़ों के मुताबिक ब्रिटेन में 10.5 फीसद लोगों को संपूर्ण और 47.9 फीसद का आंशिक टीकाकरण हो चुका है। इसी तरह ब्राजील में 2.9 फीसद का संपूर्ण व 9.7 फीसद का आंशिक, तुर्की में 9.1 फीसद का संपूर्ण व 13.0 फीसद का आंशिक, जर्मनी में 5.9 फीसद का संपूर्ण व 15.2 फीसद का आंशिक, इंडोनेशिया में 1.9 फीसद का संपूर्ण व 3.7 फीसद का आंशिक, फ्रांस में 5.4 फीसद का संपूर्ण व 15.7 फीसद का आंशिक और रूस में 3.7 फीसद का संपूर्ण व 5.9 फीसद का आंशिक टीकाकरण ही हुआ है।

सुप्रीम कोर्ट के 44 कर्मचारी कोरोना से संक्रमित

उच्चतम न्यायालय के 44 कर्मचारियों के कोरोना विषाणु से संक्रमित होने के मद्देनजर सभी न्यायाधीश अपने-अपने घरों से अदालतें लगाएंगे और शीर्ष अदालत की पीठें अपने निर्धारित समय से एक घंटे की देरी से सुनवाई के लिए बैठेंगी। सूत्रों ने इसकी जानकारी दी। उच्चतम न्यायालय के करीब 50 फीसद कर्मचारियों के कोरोना विषाणु से संक्रमित होने को लेकर मीडिया में आई कुछ खबरों पर शीर्ष अदालत के एक अधिकारी ने बताया कि पिछले एक हफ्ते में 44 कर्मचारी संक्रमित मिले हैं।

शीर्ष अदालत में करीब 3,000 कर्मचारी काम कर रहे हैं। जहां कुछ न्यायाधीश अदालती कार्यवाही के लिए शीर्ष अदालत के परिसर में आ रहे थे वहीं कुछ अन्य न्यायाधीश अब भी अपने-अपने घरों से अदालतें लगा रहे थे। कोविड-19 के मामले बढ़ने के बीच, शीर्ष अदालत ने दो अधिसूचनाएं जारी की हैं। इनमें से एक में कहा गया है कि जो पीठें सुनवाई के लिए साढ़े 10 बजे और 11 बजे बैठती हैं वे अपने निर्धारित समय से एक घंटे की देरी से बैठेंगी।

सभी न्यायाधीश अपने-अपने निवास स्थानों से वीडियो कॉन्फें्रस के जरिए मामले सुनेंगे और इस बीच, अदालती कक्षों के साथ ही समूचे न्यायालय परिसर को संक्रमण मुक्त किया जा रहा है। अन्य अधिसूचना में वकीलों द्वारा अत्यावश्यक मामलों का अदालत आकर जिक्र करने पर सोमवार से लेकर अगले आदेश तक रोक लगा दी गई है।

हाई कोर्ट के तीन न्यायाधीश कोरोना संक्रमित

दिल्ली हाई कोर्ट के तीन न्यायाधीश कोरोना विषाणु से संक्रमित पाए गए हैं और वे अपने आवास में ही पृथकवास में हैं। अदालत के सूत्रों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि तीनों जजों में संक्रमण के हल्के लक्षण हैं और रविवार को आई उनकी जांच रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि हुई है।

ऐसे में उन्होंने सोमवार को खुद को अदालती कार्यवाही से दूर रखा। सूत्रों ने बताया कि एक अन्य न्यायाधीश भी बुखार से पीड़ित हैं। हालांकि, उनकी जांच रिपोर्ट आना अभी बाकी है। इस बीच, कोविड-19 के बढ़ते मामलों के मद्देनजर दिल्ली हाई कोर्ट बार एसोसिएशन ने अदालत के परिसर स्थित अपने कार्यालय बंद रखने का निर्णय लिया है। संक्रमण के बढ़ते मामलों को देखते हुए बाद में नौ अप्रैल से 23 अप्रैल तक आॅनलाइन माध्यम से सुनवाई का फैसला किया है।