बॉडी को हेल्दी रखने के लिए हम अपनी डाइट में कई तरह के हेल्दी फूड्स जैसे बादाम, दालें और कई तरह के सीड्स का सेवन करते हैं। अगर इन फूड्स का सेवन सही तरीके से नहीं किया जाए तो बॉडी को पर्याप्त पोषण नहीं मिलता और बॉडी को फायदे की जगह नुकसान पहुंचने लगता है। आयुर्वेदिक एक्सपर्ट आचार्य मनीष जी के अनुसार, जितने भी बीज की तरह फूड्स होते हैं जैसे सूखे मेवों और अनाज को 6 महीने से ज्यादा रखने पर इनपर एंटीन्यूट्रीएंट की परत जम जाती है जो एक तरह का टॉक्सिन होता है। जब इन्हें खाया जाता है तो ये टॉक्सिन बॉडी के अंदर चले जाते हैं और बॉडी को बीमार करने लगते हैं।

इन दालों, साबुत अनाज और ड्राईफ्रूट में प्राकृतिक रूप से फाइटिक एसिड और टैनिन जैसे तत्व होते हैं जिन्हें एंटी पोषक तत्व कहा जाता है। ये तत्व शरीर में जरूरी मिनरल्स जैसे आयरन और कैल्शियम के अवशोषण (Absorption) को रोक देते हैं। इन्हें बिना भिगोए खाने से न केवल पाचन संबंधी समस्याएं हो सकती हैं, बल्कि शरीर को इनका पूरा पोषण भी नहीं मिल पाता। आइए एक्सपर्ट से जानते हैं कि कुछ चीजों को भिगोना क्यों जरूरी है।

कुछ फूड्स को भिगोना क्यों है जरूरी?

अनाज जैसे दाल, चावल, साबुत अनाज, सीड्स और ड्राई फ्रूट का सेवन अक्सर भिगोकर करने की सलाह दी जाती है। भिगोना (Soaking) एक महत्वपूर्ण तरीका माना जाता है, जिसके व्यावहारिक और औषधीय दोनों फायदे बताए गए हैं। पहले खाना लकड़ी या कोयले की आंच पर बनाया जाता था, ऐसे में अनाज का सेवन भिगोकर करने से पकाने का समय कम हो जाता है और भोजन आसानी से पचने योग्य बन जाता था।

फूड जिन्हें भिगोकर खाना चाहिए?

बादाम (Almonds) को भिगोना क्यों है जरूरी

बादाम का सेवन 6 से 8 घंटे भिगोकर करने से उसमें मौजूद सभी पोषक तत्व जैसे हेल्दी फैट, प्रोटीन, विटामिन E और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मिलते हैं। बादाम के छिलके में टैनिन होता है, जो पोषक तत्वों के अवशोषण को रोक सकता है। इसलिए बादाम को रातभर भिगोकर खाना बेहतर होता है। इससे छिलका आसानी से निकल जाता है और पाचन भी आसान हो जाता है।

चना (Chickpea) भिगोकर खाएं

चने को 8 से 10 घंटों भिगोने से उसे पकाना और खाना दोनों आसान हो जाता है। सूखे चने में फाइटिक एसिड होता है, जो आयरन, जिंक और कैल्शियम जैसे मिनरल्स के अवशोषण में बाधा डाल सकता है। इसलिए इसे रातभर भिगोकर पकाना चाहिए। इससे फाइटिक एसिड कम होता है और पाचन बेहतर होता है।

राजमा (Rajma) पूरी रात भिगोकर खाएं

राजमा को 8-10 घंटे भिगोकर खाने से उसे पकाना और पचाना दोनों आसान होता है। राजमा प्रोटीन, फाइबर और जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होता है, लेकिन इसे खाने से पहले भिगोना और अच्छी तरह पकाना जरूरी है। कच्चे राजमा में लेक्टिन (Lectin) नामक तत्व होता है, जो पाचन से जुड़ी समस्याएं पैदा कर सकता है। भिगोने से इसकी मात्रा कम होती है और पाचन आसान हो जाता है।

मेथी दाना (Fenugreek Seeds)

मेथी दाना का सेवन अगर 6 से 8 घंटों तक पानी में भिगोकर किया जाए तो ये पाचन के लिए अमृत साबित होता है। इसके दानें और पानी दोनों सेहत को फायदा पहुंचाते हैं। मेथी दाना पाचन सुधारने, मेटाबॉलिज्म बढ़ाने और ब्लड शुगर कंट्रोल करने में मदद करता है। यह बहुत सख्त और कड़वा होता है, इसलिए भिगोने से यह मुलायम हो जाता है और इसकी कड़वाहट कम हो जाती है। साथ ही इसमें मौजूद बॉडी के लिए फायदेमंद तत्व भी सक्रिय हो जाते हैं।

सब्जा के बीज (Basil Seeds)

सब्जा के बीज को 10 से 15 मिनट तक पानी में भिगोने पर ये जेल जैसा पदार्थ बन जाता है। इस जेल को शरबत के साथ,नींबू पानी के साथ मिक्स करके पिया जाए तो ये पाचन को दुरुस्त करता है। इन्हें गर्मियों में मिठाइयों में भी इस्तेमाल किया जाता है। सूखे बीज निगलने और पचाने में मुश्किल हो सकते हैं। भिगोने से इनके ठंडक देने और शरीर को हाइड्रेट करने वाले गुण भी बढ़ते हैं।

चिया सीड्स (Chia Seeds)

चिया सीड्स को 10-20 मिनट तक पानी में भिगोकर खाने से उसे खाना आसान होता है। चिया सीड्स को सुपरफूड माना जाता है, जिसमें फाइबर, ओमेगा-3 फैटी एसिड, प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर होते हैं। ये भी पानी सोखकर जेल जैसा बन जाते हैं। भिगोने से इन्हें पचाना आसान होता है और पोषक तत्वों का अवशोषण बेहतर होता है।

सोयाबीन (Soybeans)

सोयाबीन का सेवन 10 से 15 मिनट तक भिगोकर करने से बॉडी को पर्याप्त पोषण मिलता है। सोयाबीन प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत है और इससे टोफू, सोया मिल्क और सोया नगेट्स बनाए जाते हैं। कच्चे सोयाबीन में एंजाइम इनहिबिटर और एंटी-न्यूट्रिएंट्स होते हैं, जो प्रोटीन के पाचन में बाधा डालते हैं। इसलिए इन्हें गर्म पानी में भिगोकर इस्तेमाल करना जरूरी होता है, जिससे ये मुलायम हो जाते हैं और पाचन आसान होता है।

डिस्क्लेमर :

यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इसमें दी गई सलाह आयुर्वेदिक और सामान्य पोषण संबंधी मान्यताओं पर आधारित है। किसी भी फूड को अपनी डाइट में शामिल करने से पहले, खासकर यदि आपको कोई बीमारी, एलर्जी या स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो डॉक्टर या प्रमाणित न्यूट्रिशनिस्ट की सलाह जरूर लें।