महिलाएं अक्सर घर और ऑफिस की जिम्मेदारियों के बीच अपनी सेहत को पीछे छोड़ देती हैं। परिवार और काम की भागदौड़ में वे थकान, दर्द या शरीर में होने वाले छोटे-छोटे बदलावों को सामान्य मानकर नजरअंदाज कर देती हैं। लेकिन कई बार यह मामूली दिखने वाले संकेत भविष्य में किसी गंभीर बीमारी की चेतावनी साबित हो सकते हैं। हाल ही में ब्रिटेन के एनएचएस (NHS) के जनरल प्रैक्टिशनर Dr Amir Khan ने सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए महिलाओं की हेल्थ को लेकर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि महिलाओं में दिखने वाले कई सामान्य लक्षणों को अक्सर सिर्फ थकान, हार्मोनल बदलाव या उम्र का असर समझ कर टाल दिया जाता है, जबकि कई मामलों में ये लक्षण गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं की ओर इशारा कर सकते हैं।

डॉ. आमिर खान के मुताबिक, महिलाएं खासतौर पर लगातार थकान, पेट में सूजन, अनियमित पीरियड्स, अचानक वजन में बदलाव, सीने में दर्द, सांस फूलना या लंबे समय तक बने रहने वाले दर्द जैसे संकेतों को हल्के में लेती हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर शरीर में कोई समस्या लंबे समय तक बनी रहे या बार-बार महसूस हो रही हो, तो उसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

डॉक्टर के अनुसार, महिलाओं को अपनी बॉडी के संकेतों को समझना और समय-समय पर हेल्थ चेकअप करवाना बेहद जरूरी है। सही समय पर जांच और इलाज से कई गंभीर बीमारियों के खतरे को कम किया जा सकता है। उन्होंने महिलाओं को सलाह दी कि वे अपनी सेहत को प्राथमिकता दें और किसी भी असामान्य लक्षण को लंबे समय तक नजरअंदाज न करें। आइए जानते हैं कि एक्सपर्ट ने महिलाओं में पनपने वाली कौन सी बीमारियों को नजरअंदाज करने का जिक्र किया है।

  1. अत्यधिक थकान को नजरअंदाज न करें। डॉक्टर के अनुसार, बहुत ज्यादा थकान को अक्सर लोग तनाव, काम का दबाव या घर-ऑफिस की जिम्मेदारियों से जोड़ देते हैं। लेकिन इसके पीछे मेडिकल कारण भी हो सकते हैं। खासतौर पर जिन महिलाओं को हैवी पीरियड्स होते हैं, उनमें आयरन की कमी हो सकती है। आयरन कम होने पर शरीर पर्याप्त हीमोग्लोबिन नहीं बना पाता, जिससे शरीर के टिश्यू तक ऑक्सीजन सही मात्रा में नहीं पहुंचती। डॉक्टर ने बताया जरूरत से ज्यादा थकान होना मामूली नहीं हो सकता।
  2. दर्दनाक पीरियड्स को नॉर्मल न मानें। डॉ. आमिर खान ने कहा पीरियड्स सामान्य हैं, लेकिन बहुत ज्यादा दर्द सामान्य नहीं है। उन्होंने बताया कि एंडोमेट्रियोसिस जैसी बीमारी शरीर में सूजन, स्कारिंग और नसों में जलन पैदा कर सकती है। इसके अलावा इन समस्याओं जैसे एडेनोमायोसिस, फाइब्रॉइड्स और पेल्विक इंफ्लेमेटरी डिजीज की वजह भी  हैवी ब्लीडिंग हो सकती है।
  3. ब्रेन फॉग, एंग्जायटी और नींद की समस्या। 30 के आखिर या 40 की शुरुआत में कई महिलाएं ब्रेन फॉग, चिंता और खराब नींद को सामान्य तनाव समझकर नजरअंदाज कर देती हैं। डॉ. खान के मुताबिक, यह पेरिमेनोपॉज का संकेत हो सकता है। पेरी मेनोपॉज मेनोपॉज से 8–10 साल पहले शुरू हो सकता है। इस दौरान एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन हार्मोन में बदलाव होता है, जो शरीर के न्यूरोट्रांसमीटर जैसे सेरोटोनिन, डोपामिन और GABA को प्रभावित कर सकता है। इससे एंग्जायटी, अनिद्रा और याददाश्त से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं।
  4. सेक्स के दौरान वेजाइनल पेन। डॉ. आमिर खान ने कहा कि सेक्स के दौरान दर्द को अक्सर मानसिक समस्या समझ लिया जाता है, जबकि इसके पीछे कई शारीरिक कारण हो सकते हैं जैसे पेल्विक फ्लोर मसल्स की समस्या, कम एस्ट्रोजन के कारण, वैजाइनल ड्राइनेस, एंडोमेट्रियोसिस, वुलवोडीनिया, डिलीवरी के बाद बने निशान होना शामिल है।
  5. बार-बार पेशाब की इच्छा या ब्लैडर में दर्द। महिलाओं में यूरिन इन्फेक्शन (UTI) आम माना जाता है, लेकिन लगातार पेशाब लगना या ब्लैडर में दर्द दूसरी बीमारियों का संकेत भी हो सकता है। डॉक्टर के अनुसार इसके पीछे ब्लैडर पेन सिंड्रोम, पेल्विक फ्लोर डिसफंक्शन, ओवरएक्टिव ब्लैडर और हार्मोनल बदलाव हो सकते हैं।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य जानकारी पर आधारित है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या इलाज के लिए डॉक्टर से सलाह जरूर लें।