Best Gut-Friendly Drinks for Monsoon: मानसून के दौरान बढ़ी हुई नमी, दूषित भोजन और पानी के संपर्क में आने का खतरा ज्यादा रहता है। इस मौसम में पाचन तंत्र की कार्य क्षमता में बदलाव के कारण गैस, अपच, ब्लोटिंग, एसिडिटी और पेट के संक्रमण जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इस मौसम में आंतों का स्वास्थ्य प्रभावित होने पर शरीर की इम्यूनिटी कमजोर पड़ने लगती है और गट हेल्थ पर बुरा असर पड़ता है। ऐसे में खानपान का खास ध्यान रखना जरूरी है। अक्सर लोग बारिश के मौसम में पाचन संबंधी दिक्कतों से बचने के लिए अदरक की चाय का सहारा लेते हैं। हालांकि, गट हेल्थ को बेहतर बनाए रखने के लिए सिर्फ अदरक की चाय का सेवन काफी नहीं है। कुछ नेचुरल प्रोबायोटिक गुणों वाले ड्रिंक भी आंतों में मौजूद अच्छे बैक्टीरिया का संतुलन बनाए रखने, पाचन को बेहतर करने और पेट को हेल्दी रखने के लिए जरूरी हैं।

गट माइक्रोबायोम शोधकर्ता डॉ. जेम्स किन्रोस ने एक रिपोर्ट में बताया है कि आंतों को स्वस्थ रखने के लिए हमेशा महंगे सप्लीमेंट्स या प्रोबायोटिक उत्पादों की जरूरत नहीं होती। उनका कहना है कि कई सस्ते और आसानी से उपलब्ध प्राकृतिक प्रोबायोटिक खाद्य पदार्थ और पेय भी गट माइक्रोबायोम को मजबूत बनाने में प्रभावी भूमिका निभा सकते हैं। सही खानपान अपनाकर पाचन तंत्र को बेहतर रखा जा सकता है और मानसून में होने वाली कई पेट संबंधी समस्याओं के जोखिम को कम किया जा सकता है। आइए जानते हैं ऐसे ही 5 गट-फ्रेंडली ड्रिंक्स के बारे में, जिन्हें आप इस बारिश के मौसम में अपनी डाइट का हिस्सा बना सकते हैं।

छाछ (Buttermilk) का करें सेवन

छाछ प्राकृतिक प्रोबायोटिक है, जो आंतों में अच्छे बैक्टीरिया का संतुलन बनाए रखने में मदद करती है। इसमें मौजूद इलेक्ट्रोलाइट्स शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ पाचन को भी बेहतर बनाते हैं। छाछ में भुना जीरा और थोड़ा काला नमक मिलाकर पीना अधिक फायदेमंद हो सकता है। Journal of Dairy Science और भारतीय संस्था NDRI (National Dairy Research Institute) के शोध बताते हैं कि फर्मेंटेशन की प्रक्रिया के दौरान दही और छाछ में जो बायो-एक्टिव पेप्टाइड्स बनते हैं, वे आंतों की अंदरूनी परत को मजबूत करते हैं। यह मानसून में हानिकारक बैक्टीरिया जैसे E. coli को पेट की दीवारों पर चिपकने से रोकते हैं, जिससे दस्त और फूड पॉइजनिंग का खतरा बेहद कम हो जाता है।

घर की बनी बिना ज्यादा चीनी वाली लस्सी

घर में ताजे दही से बनी हल्की लस्सी भी प्रोबायोटिक्स का अच्छा स्रोत है। यह पाचन में मदद करती है और मानसून में आंतों की सेहत को बेहतर बनाए रखने में मददगार हो सकती है।

नारियल पानी

नारियल पानी शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी पूरी करता है। बारिश के मौसम में यह शरीर को हाइड्रेट रखने के साथ पाचन तंत्र को भी सपोर्ट कर सकता है। WHO की रिहाइड्रेशन थेरेपी रिसर्च और American Journal of Emergency Medicine के शोधों के अनुसार, नारियल पानी में मौजूद पोटेशियम, सोडियम, कैल्शियम और मैग्नीशियम जैसे इलेक्ट्रोलाइट्स दस्त या डिहाइड्रेशन के दौरान शरीर में पानी की कमी को ओआरएस (ORS) की तरह ही तेजी से पूरा करते हैं। यह पेट की अम्लता को शांत करने में भी बेहद असरदार साबित होते है।

केफिर (Kefir)

केफिर एक फर्मेंटेड मिल्क ड्रिंक है, जिसमें दही की तुलना में अधिक प्रकार के लाभकारी बैक्टीरिया पाए जाते हैं। यह गट माइक्रोबायोम को मजबूत बनाने और पाचन सुधारने में मदद कर सकता है। Frontiers in Microbiology में प्रकाशित एक व्यापक अध्ययन के अनुसार, केफिर में लगभग 30 से अधिक प्रकार के गुड बैक्टीरियल और यीस्ट (Yeast) पाए जाते हैं। यह पेट में जाकर गट माइक्रोबायोम के संतुलन को तेजी से बदलता है। रिसर्च मानती है कि केफिर का नियमित सेवन लैक्टोज इनटोलरेंस और आंतों की सूजन (IBS) को ठीक करने में अत्यधिक प्रभावी है।

कोम्बुचा (Kombucha)

कोम्बुचा फर्मेंटेड चाय है, जिसमें प्रोबायोटिक्स और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं। सीमित मात्रा में इसका सेवन आंतों के बैक्टीरिया के संतुलन और पाचन स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हो सकता है। हालांकि, कम चीनी वाला विकल्प चुनना बेहतर रहता है। Journal of Chemistry और हार्वर्ड हेल्थ की रिपोर्ट के अनुसार, कोम्बुचा के फर्मेंटेशन के दौरान एसिटिक एसिड और शक्तिशाली पॉलीफेनोल्स बनते हैं। यह एसिड पेट के पीएच (pH) को संतुलित रखता है, जिससे भोजन का पाचन आसान हो जाता है और पेट फूलने (Bloating) की समस्या कम होती है।

मानसून में इन बातों का भी रखें ध्यान

  • हमेशा ताजा और साफ भोजन करें।
  • बाहर के कटे फल और दूषित पानी से बचें।
  • प्रोबायोटिक और फाइबर युक्त आहार लें।
  • पर्याप्त मात्रा में पानी पीते रहें।
  • अगर लगातार दस्त, उल्टी, तेज पेट दर्द या बुखार हो, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।

ये जानना भी है जरूरी

प्रोबायोटिक ड्रिंक्स जैसे छाछ, केफिर या कोम्बुचा में जीवित बैक्टीरिया होते हैं। इसलिए इन्हें कभी भी अत्यधिक गर्म खाने के साथ या गर्म करके न पिएं, क्योंकि गर्मी से इनके लाभकारी बैक्टीरिया तुरंत नष्ट हो जाते हैं। बारिश के मौसम में छाछ या लस्सी को हमेशा दोपहर के समय फ्रेश बनाकर पिएं; रात के समय इनके सेवन से कफ की समस्या बढ़ सकती है।

डिस्क्लेमर: यह लेख सामान्य स्वास्थ्य जानकारी के उद्देश्य से तैयार किया गया है। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या विशेष डाइट अपनाने से पहले डॉक्टर या योग्य डाइटिशियन से सलाह अवश्य लें।