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हर्षवर्धन से चर्चा : दो-तीन महीने में देशवासियों को बेहतर टीका मिलेगा

आज शायद ठीक होने की दर भी 94 फीसद है। आज 90 लाख से ज्यादा लोगों में 85-86 लाख लोग ठीक होकर घर जा चुके हैं और केवल चार लाख के करीब सक्रिय मामले हैं। ये सक्रिय मामले जो हैं ये भी ठीक होने की ओर अग्रसर हैं। आज ं यह भी एक दुविधा और समस्या है कि लोगों को लगता है कि ठीक तो हो ही जाएंगे इसलिए कोविड को लेकर तय नियमों को पालन नहीं कर रहे।

Amitabh Bachchanस्‍वास्‍थ्‍य मंत्री डॉ हर्षवर्धन (बाएं ) फिल्‍म अभिनेता अमिताभ बच्‍चन (दाएं)

अमिताभ बच्‍चन

अमिताभ बच्चन : मैं अपने दर्शकों क ो बताना चाहता हूं कि आज हमारे साथ हैं भारत के स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन जी। यह खुद भी एक बहुत दिग्गज डॉक्टर हैं। इनके नेतृत्व में देश कोरोना से लड़ रहा है। इस महामारी की चुनौतियों पर बात करने के लिए इनसे बेहतर भला और कौन हो सकता है। तो उन्हें हमने आज आमंत्रित किया है। हर्षवर्धन जी स्वागत है आपका, नमस्कार बहुत बहुत धन्यवाद आपका, आपने समय दिया। कुछ प्रश्न पूछने थे आपसे। पहला प्रश्न जो मन में आता है, वह यह कि कोरोना के रूप में इस विशाल संकट के बीच, देश के कोने-कोने में सेवा भाव की कई मिसालें प्रज्जवलित दिखी हैं। इन अनुभवों के बारे में आप क्या हमें बता सकते हैं। कुछ विवरण दें हमें?

हर्षवर्धन : अमिताभ जी आपने बहुत सुंदर और सात्विक प्रश्न पूछा है। इस संदर्भ में खाली अभी कोविड में ही नहीं, आज से 25-26 साल पहले, जब पहली बार भारत को पोलियो मुक्त करने का सपना भगवान की कृपा से मेरे हृदय में, मन में पैदा हुआ और दिल्ली में जब इसका कार्यक्रम प्रारंभ किया था तो पता नहीं कितने बड़े पैमाने पर साधारण इंसान और ढेर सारे स्वयंसेवी साथियों को मैंने देखा और उनके देखने के बाद मैं इस बात के लिए आश्वस्त हुआ कि भारत के डीएनए में एक परोपकार का और सेवा का भाव है।

हमारे लोगों के रक्त में एक अंतर्निहित अच्छाई, हमेशा एक इंसानियत का भाव, वह रक्त में प्रवाह के रूप में बहता है और कोविड की लड़ाई में तो देश में अगर यह कहें कि स्वयंसेवी संस्थाएं, सेवा का काम करने वालीं संस्थाएं, सरकार, ये सब तो देखिए इनकी जिम्मेदारी होती है। इनका जनादेश होता है, ये भी हजारों की तादाद में, मुझे याद है कि नीति आयोग ने देश भर में सेवा के क्षेत्र में काम करने वाली कई हजार स्वयंसेवी संस्थाओं के साथ मुझे वीडियो कांफ्रेंस से जोड़ा था और मैंने देखा कि कितने प्रकार की वह स्वयं जो लोग तकलीफ में थे उनके लिए काम कर रहे थे। लेकिन इससे भी ज्यादा बड़ा मेरे लिए जो इस कोविड में हीरो की तरह उभर कर आया वह एक आम इंसान था।

कुछ थोड़ा सा सिर्फ आपको उदाहरण के रूप में मैं कहूंगा कि जब पूर्णबंदी हुई तो हमने देखा कि लोग घरों के अंदर सिमट गए और तकलीफ लोगों को बढ़ रही थी और उस समय पर समाज में देखा कि कहीं किसी के घर में कोविड से लोग प्रभावित हो गए तो लोग व्यक्ति तौर पर उसका खाना बनाकर उनके घर बाहर रख दिया करते थे।

थोड़े दिन के बाद अखबार में जब इस तरह की खबरें आर्इं कि हमारे पक्षी, परिंदे, कुत्ते, गाय बहुत सारे ऐसे हमारी जो एक प्रकार से दिल को छूने वाली खबरें कि वो रेस्तरां बंद हो गया, लोग घर से बाहर नहीं निकले थे, लोग उनको भोजन परोस नहीं करते थे। इसके कारण उनको बहुत तकलीफ होने लगी तो बहुत बड़ी संख्या में देखा कि लोगों ने कैसे खुद बाहर आकर, खतरा मोल लेकर उनकी भी सेवा करने के लिए उनतो पानी पिलाने के लिए, कुत्तों को खाना खिलाने के लिए कितने प्रकार के प्रयास किए।

ऐसे पता नहीं कितने सारे किस्से हैं जिसमें ये भाव स्पष्ट रूप से उभर के आया है कि लोगों को जब सहायता की जरूरत पड़ती तो जितने लोगों को सहायता की जरूरत पड़ती उससे कई गुणा ज्यादा लोग समाज में खुद खड़े हो जाते हैं। हमारे लाखों प्रवासी मजदूरों को कितनी तरह की तकलीफ हुई लेकिन कितने सारे लोग उनकी सहायता के लिए खड़े हो गए और तकलीफ का समय भी गुजर गया और कोविड के खिलाफ जंग पर भी कोई दुष्प्रभाव नहीं पड़ा। मैं तो देश के हर आम आदमी को सलाम करता हूं, हर भारतवासी को सलाम करता हूं। मैं उनके परोपकार की भावना को दिल की गहराइयों से सलाम करता हूं। मैं सभी स्वयंसेवी संस्थाओं से जुड़े लोगों को भी सलाम करता हूं।

अमिताभ बच्चन : कोरोना काल में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों ने जो सेवा की है उसके लिए पूरा देश सिर झुकाकर उन्हें नमन करता है। हम इन कोरोना योद्धाओं को योद्धा कहेंगे। इन कोरोना योद्धाओं के लिए सरकार कुछ करेगी और हमारी जनता उनके लिए क्या कर सकती है?

हर्षवर्धन : देखिए, सरकार कर भी रही है और करती रहेगी। मैं समझता हूं कि अपनी तरफ से जनता ने कोई कसर नहीं छोड़ी है। मैं हमेशा जब भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के उस 20 मार्च के इनोवेटिव प्रयोग को याद करता हूं, जब उन्होंने कहा कि जनता कर्फ्यु में सब अपनी इच्छा से घर के अंदर रहें।

शाम को पांच बजे अपने घर बाहर आकर अपने सांकेतिक तरीके से देश के कोरोना योद्धाओं को, डॉक्टरों को और नर्सों को सलाम करें। उसके लिए किसी ने थाली बजाई, किसी ने दीपक जलाया। मुझे एक वीडियो आज भी याद है एक बुजुर्ग महिला, जो शायद मजदूरी करती थीं, र्इंटों के ऊपर बैठकर एक लकड़ी से थाली को बजा रही थीं। अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का यह उनका तरीका था।

मैं समझता हूं कि प्रधानमंत्री जी ने लगातार कोविड योद्धाओं को जिस प्रकार से उत्साहित किया है और उनके सम्मान के लिए देशवासियों से लगातार बात की है। जहां तक सरकार का प्रश्न है तो हमने तो बहुत की शुरुआती दौर में देश भर के सभी कोविड योद्धाओं के लिए भारत सरकार के स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बड़ी योजना बनाई थी। अगर दुर्भाग्य से किसी कोविड योद्धा की मृत्यु हो जाती है तो उसके लिए 50 लाख रुपए तक का बीमा है। दुर्भाग्य से हमारे पास चार सौ से पांच सौ ऐसे कोरोना योद्धाओं हैं जो इस दौरान शहीद हुए हैं।

इनमें से बहुत सारे बीमा के दावाओं को निपटा दिया गया है जबकि कुछ के दावाओं के निपटान की प्रक्रिया जारी है। अभी हमने कोरोना योद्धाओं के बच्चों के लिए मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस में पांच सीटों को आरक्षित किया है। आपका जो प्रश्न है कि समाज क्या कर सकता है, तो मैं समझता हूं कि समाज उनके सम्मान की रक्षा के लिए, उनको सम्मान देने के लिए, अपने-अपने क्षेत्र में समाज के लोग अपनी अपनी हैसियत के हिसाब से, अपनी अपनी योजना के हिसाब से, योजना बनाकर इन कोविड योद्धाओं के बच्चों की सहायता कर सकते हैं।

मैं समझता हूं कि यह अवसर कोविड योद्धाओं के साथ साथ उनकी माताओं और उनके परिवारजनों को भी सलाम करने का है, उनका अभिनंदन करने का है। कोरोना योद्धा थक गए हैं लेकिन कभी नहीं कहते हैं कि हम थक गए हैं और पूरे भारत में 135 करोड़ के देश में मैंने अभी तक एक भी ऐसा किस्सा नहीं सुना जहां किसी मां ने, किसी बहन ने अपने परिवार के बच्चों को कहा हो कि बहुत हो गया अब कोविड वार्ड में जाना बंद करो, तुम्हारे प्राणों को खतरा हो सकता है।

मैं समझता हैं कि ये जो भाव है उसका कर्ज किसी भी योजना या धनराशि से नहीं चुकाया जा सकता है। कोविड योद्धाओं में हमारे स्वास्थ्यकर्मी ही नहीं है बल्कि इसमें पहली पंक्ति के कर्मचारी भी शामिल हैं। इसमें पत्रकार भी शामिल हैं जो ग्राउंड जीरो पर जाकर लोगों की मदद की है, लोगों के बीच जानकारी का प्रसार किया है।

कितने सारे कोविड योद्धा के रूप में पत्रकार भी हैं जो मृत्यु का शिकार हुए हैं। इसके सबके बलिदान को हमेशा याद किया जाएगा कि किसी प्रकार तकलीफ के समय इन्होंने लोगों की मदद की। मैं समाज के लोगों का भी अभिनंदन करना चाहता हूं देश और दुनिया के कोरोना योद्धाओं के लिए लोगों में गहरी सच्ची संवेदना और सम्मान का भाव पूरी तरह से जागृत हो चुका है।

अमिताभ बच्चन : टीके को लेकर तमाम बातें की जा रही हैं और तरह तरह की उम्मीद भी जगाई जा रही है। आपको क्या लगता है, आपके मुताबिक ये टीका कब तक बन जाएगा या आ जाएगा। देश के हर नागरिक को टीका लगाना पड़ेगा, तो ये टीका लगाने में आपको क्या लगता है कि कितना वक्त लगेगा। क्या अनुमान है आपका?

हर्षवर्धन : देखिए, अमितजी आपने वह प्रश्न पूछा है जो आज सारे भारतवासियों के और शायद दुनिया के हर व्यक्ति के मन में है। भारत की टीके के शोध करने की दृष्टि से जो योग्यता और क्षमता है और भारत की टीका बनाने की योग्यता और क्षमता, वह दुनिया में जगजाहिर है। विकासशील देशों को सौ फीसद टीका भारत उपलब्ध करता है। अगर पूरी दुनिया की बात करें तो एक चौथाई देशों को भारत टीका उपलब्ध करता है। आज पूरी दुनिया में टीके पर शोध हो रहा है।

अब तक सौ टीकों पर दुनिया में काम हो रहा है जिनमें से 30 टीके भारत में काम हो रहा है। इन 30 में से पांच टीके परीक्षण के विभिन्न चरणों में पहुंच गए हैं। दो ऐसे हैं जो प्री क्लीनिकल के तीसरे चरण के भी एडवांस्ड चरण में पहुंच गए हैं। हमारे देश में जो टीके उपलब्ध होने वाले हैं, वह अपने देश के विज्ञानियों के प्रयास से, हमारे अपने उद्योग के प्रयास से उपलब्ध होगा।

मुझे जो आंतरिक रिपोर्ट मिली है उसके मुताबिक मैं आपको अच्छी खबर देना चाहता हूं। जैसे ही 2021 शुरू होगा, तो मुझे पूरी उम्मीद है कि पहले दो तीन महीने में देश के लोगों के लिए एक बेहतर टीका उपलब्ध होगा। अब आपका जो दूसरा प्रश्न है कि क्या ये टीका सारे देश के लोगों को लगाने के लिए उपलब्ध होगा। तो जैसा कि हम जानते हैं कि एक साथ 135 करोड़ लोगों के लिए शायद उत्पादन न हो पाए। लेकिन हमने योजनाबद्ध तरीके से ऐसा सोचा है कि जून-जुलाई तक हम लगभग देश के 30 करोड़ लोगों को यह टीका प्राथमिकता के आधार पर उपलब्ध करा देंगे।

प्राथमिकता के तहत सबसे पहले स्वास्थ्यकर्मियों को, निजी और सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं में काम करने वाले सभी कर्मियों को टीका दिया जाएगा। इसके बाद पहली पंक्ति में कार्य करने वालों को, पुलिस वालों को, नगर निगम के कर्मचारियों को, अर्धसैनिक बलों के जवानों को और सेना के जवानों को टीका दिया जाएगा। इसके बाद हमारे 65 सालों से ऊपर के लोगों को और फिर 50 साल से अधिक के लोगों को और उसके बाद अन्य बीमारियों से पीड़ित लोगों को टीका दिया जाएगा।

जैसा कि आप जानते हैं कि भारत के पास टीकाकरण का प्रर्याप्त अनुभव है। दुनिया के 60 फीसद पोलियो के मामले भारत में होते थे। हमने एक बड़ा सपना देखा और 2014 में भारत को पोलियो से पूरी तरह से मुक्त कर दिया। देश में लाखों सेंटर पर कोल्ड चेन के जरिए टीके को माइनस 20 डिग्री सेल्सियस के तापमान पर उपलब्ध कराया जाता था और दो बूंद बच्चे के मुंह में डाली जाती थीं जिसका अमितजी आपने भी अभियान चलाया था। आज दुनिया का सबसे बड़ा और मजबूत टीकाकरण कार्यक्रम हम कर रहे हैं जिसके तहत बारह टीके सभी बच्चों को दिए जाते हैं।

इसी तरह से अभी हमने दुनिया मीजल्स रूबेला के 30 करोड़ टीके उपलब्ध कराए थे। इसलिए हमारे पास पर्याप्त अनुभव उपलब्ध है। दो महीने से हम अगले साल होने वाले टीकाकरण की तैयारी कर रहे हैं। हमने अपनी तैयारियों में राज्यों को भी शामिल किया है। इसके साथ-साथ पहले हमारा एक ईवीआइएन प्लेटफॉर्म बनाया है जिसे कोविड प्लेटफॉर्म से बदल दिया गया है।

अब इस प्लेटफॉर्म के ऊपर ऐसे सभी लोगों जिनका टीका दिया जाना है, उनकी सूची होगी। उनको कब टीका मिलेगा, कहां पर उनका जाना है, उसका उनको एसएमएस भेजा जाएगा। यहीं से टीकाकरण का प्रमाणपत्र भी दिया जाएगा और अगला टीका कब दिया जाएगा इसकी जानकारी भी दी जाएगी।

इसके अलावा देश में टीका कहां-कहां उपलब्ध है और कितने तापमान पर उपलब्ध है इसकी भी जानकारी उपलब्ध होगी। फिर इस काम को करने वाले लोगों का प्रशिक्षण से लेकर टीका देने वाले और अन्य लोगों को प्रशिक्षित किया जाएगा। एनजीओ के लोगों के साथ भी अपने बैठकें शुरू कर दी हैं। तो ऐसे में हम कह सकते हैं कि भारत की पर्याप्त तैयारी भी है और भारत के पास पर्याप्त अनुभव भी है।

अमिताभ बच्चन : जब तक टीका नहीं आता है तब तक देशवासियों को क्या करना चाहिए? आपके पास उनके लिए क्या सलाह होगी?

हर्षवर्धन : मैंने लोगों से कहा है कि टीका जब आएगा, आएगा। लेकिन कोरोना के खिलाफ सबसे असरदार सोशल टीका है। मैं सोशल टीके को मास्क के रूप में बताया था। मास्क को पूरी तरह से नाक और मुंह ढंकने के लिए उपयोग किया जाए। इसका सही तरीके से उपयोग करना है और बातचीत करते समय भी हमें मास्क नहीं हटाना है।

इसके साथ ही दो गज की दूरी बनाकर रखना, हाथों को पानी और साबुन से धाकर रखना और खासी, जुकाम करते समय अपनी कोहनी से अपनी नाक को दबाना शामिल है। आज इस लड़ाई के ग्यारहवें महीने में मैं बहुत आत्मविश्वास के साथ कह सकता हूं कि मैं दिल्ली के सभी अस्पतालों में गया हूं, सभी कोविड वार्ड में गया हूं, इतने लोगों से मिला हूं और इसी सोशल टीके ने मेरी अभी तक रक्षा की है। मेरे अलावा बहुत सारे लोग इसकी वजह से सुरक्षित हैं।

मैंने अपने देशवासियों से कहना चाहता हूं कि वो जो टेलीफोन की ट्यून सुनते हैं, उस पर सौ फीसद सच्चाई और ईमानदारी से करें। इसमें आप अमितजी बहुत मदद कर रहे हैं। आपके करोड़पति कार्यक्रम को बहुत लोग देखते हैं और आप बीच बीच में इसके बारे में बताते हैं, उससे भी असर होता है। अगर आप कुछ सवाल कोविड से संबंधित उसमें डाल देते तो इस लड़ाई में बहुत फायदा होगा।

अमिताभ बच्चन : एक और बात पूछनी थी आपसे। क्या भारत में पहले कभी इस तरह के टीके पर काम हुआ है? आपकी राय में इस टीके को सभी लोगों तक पहुंचने में बहुत सारी मुसीबतें आएंगी, चुनौतियां आएंगी, आपको क्या लगता है?

हर्षवर्धन : अमिताभ जी, देखिए मुझे पता नहीं था कि आपका ये प्रश्न आने वाला है लेकिन मैंने जो पिछले प्रश्न का उत्तर दिया है उसमें इसका कुछ अंश आ गया है। भारत टीके के क्षेत्र में, शोध और विकास में ऐसा नहीं है कि पहली बार काम कर रहा है। छोटे बच्चे में होने वाली बीमारी रोटा वायरस के टीके पर शोध हमारे यहां हुआ है। टाइफाइड के टीके पर शोध भी हमारे यहां हुआ है।

इसके अलावा जापानी इंटेफलाइटिस और मलेरिया के टीके पर हमारे यहां शोध हो रहा है। सामान्य तौर पर किसी बीमारी के टीके को विकसित करने में कई कई साल लग जाते हैं। कई बार तो दस-दस साल लग जाते हैं। कोरोना के आपातकाल में तो देश के वैज्ञानिकों ने एक साल के अंदर टीका विकसित करने का कमाल किया है।

देश ही क्या दुनिया के वैज्ञानिकों ने यह कमाल कर दिखाया है। जहां तक देश के लोगों को इतनी सारे, इतने बड़े देश में दूरदराज के गांव में, आदिवासी क्षेत्र में, पहाड़ पर, जंगल में, सब जगह पर लोग रहते हैं, सब जगह पर टीका उपलब्ध करानी की बात है तो टीके को लाने-लेजाने की व्यवस्था पर तीन महीने से काम कर रहे हैं।

इस दौरान हम देख रहे हैं कि टीका ले जाने के लिए कितने वाहन चाहिए, कितने और रेफिकजीरेटर चाहिए, कितनी रेफिजीरेटर वैन चाहिए, कितने करोड़ो सिरिंज चाहिए आदि। जैसा कि मैंने पहले ही आपको टीके के लिए विकसित प्लेटफॉर्म के बांरे में बताया है। इस प्लेटफॉर्म पर सभी जानकारियां उपलब्ध होंगी। इतना ही नहीं हम अपने प्लेटफॉर्म के माध्यम से अन्य देशों की मदद भी कर सकेंगे।

यह योग्यता और क्षमता भी भारत ने विकसित की है। इसके अलावा हमने टीकाकरण के दौरान बुरी से बुरी स्थिति का सामना करने के लिए भी रणनीति बनाई है। इसके लिए भी एक समूह बनाया गया है। इसके बाद हमारा विशेषज्ञों का एक समूह भी है जिसमें सभी विभागों के सचिव हैं। इसमें एम्स और सेना के अलावा भी अन्य क्षेत्रों के विशेषज्ञ शामिल हैं।

यह समूह हर चीज पर विस्तार से चर्चा कर रहा है। यह विशेषज्ञ समूह लगातार टीका बनाने वालों के संपर्क में है। इस दौरान योजना में बारीक से बारीक कल्पना कर रहे हैं। हमारे लिए सबसे सौभाग्य की बात है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी इस विशेष पर खुद मोनिटर कर रहे हैं। वह दो-दो, तीन-तीन घंटे की बैठक करते हैं। पिछले सप्ताह उन्होंने इस संबंध में विस्तार से बैठक की थी।

वो लगातार मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक करते हैं, सारे अधिकारियों के साथ करते हैं और अन्य मंत्रालयों के साथ बैठक करते हैं। इसलिए यह हमारे लिए सौभाग्य की बात है कि हमें बहुत ही दूरदर्शी नेतृत्व मिला है जो हमें हर कार्य को सफलतापूर्वक करने के लिए प्रेरित करते हैं और मार्गदर्शन भी करते हैं।

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