कार्डियोलॉजिस्ट के मुताबिक हार्ट अटैक तब आता है जब दिल की नसों (Coronary Arteries) में 80 से 90 प्रतिशत तक ब्लॉकेज हो जाता है। लेकिन कम उम्र में युवा दिल के रोगों का शिकार हो रहे हैं, ऐसे बढ़ते मामलों को देखकर कार्डियोलॉजिस्ट्स ने बताया कि कोलेस्ट्रॉल और ट्राइग्लिसराइड रातों रात नहीं पनपता, इसे दिल के लिए खतरा बनने में सालों लगते हैं। दिल के डॉक्टर ने बताया हार्ट में 30 से 40 प्रतिशत ब्लॉकेज भी साइलेंट हार्ट अटैक का कारण बन सकता है! दरअसल, कम ब्लॉकेज में मौजूद ‘सॉफ्ट प्लाक’ (Soft Plaque) अचानक फट जाता है, जिससे वहां तुरंत थक्का (Blood Clot) जम जाता है और नस 100% ब्लॉक हो जाती है। ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि इतने कम ब्लॉकेज का पता समय रहते कैसे लगाया जाए? किन कारणों की वजह से अचानक हार्ट अटैक आता है और इस स्थिति से कैसे बचा जा सकता है।

साओल हार्ट सेंटर के संस्थापक एवं निदेशक और पूर्व कंसल्टेंट, एम्स के डॉ. बिमल छाजेड़ ने बताया अगर आपको हार्ट अटैक को रोकना है या उसे रिवर्स करना है तो आपको सही समय पर सेहत के लिए काम करना शुरु करना होगा। दिल की सेहत को दुरुस्त करने में मरीज, मरीज की फैमिली और डॉक्टर तीनों मिलकर काम करें तो आसानी से इस परेशानी को रिवर्स किया जा सकता है। एक डॉक्टर जहां दवा देकर बीपी, शुगर,ट्राईग्लिसराइड और कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल कर सकता है वहीं फैमिली के स्पोर्ट से मतलब है कि घर में खाने में तेल को बंद करना,नॉनवेज बंद करना, हाई फैट ड्राई फ्रूट,फुल क्रीम दूध पर कंट्रोल कर डाइट में फल और सब्जियों को शामिल करना है। वहीं पेशेंट का काम है वॉक करें, योग करें,स्मोकिंग और अल्कोहल बंद करे, मोटापा और तनाव कम करें। अगर ये तीनों लोग मिलकर एक साथ काम करें तो एक भी हार्ट अटैक नहीं हो सकता है। आइए डॉक्टर से जानते हैं कि हार्ट अटै के लिए कौन-कौन से कारण जिम्मेदार हो सकते हैं, ब्लॉकेज का पता लगाने के लिए कौन-कौन से टेस्ट कराएं और हार्ट अटैक से बचाव कैसे करें।

कितना ब्लॉकेज दिल के लिए खतरा माना जाता है?

  1. 25–49% ब्लॉकेज: इसे आमतौर पर हल्का ब्लॉकेज माना जाता है। इससे तुरंत हार्ट अटैक का खतरा जरूरी नहीं होता, लेकिन इसे नजरअंदाज भी नहीं करना चाहिए। कभी-कभी ऐसे प्लाक फटने पर खून का थक्का बन सकता है और अचानक आर्टरी ब्लॉक हो सकती है।
  2. 50–69% ब्लॉकेज: इसे मध्यम स्तर का ब्लॉकेज माना जाता है। इस स्थिति में डॉक्टर जरूरत के अनुसार कुछ अतिरिक्त जांच करके देखते हैं कि ब्लॉकेज से दिल तक पहुंचने वाला खून वास्तव में कितना प्रभावित हो रहा है।
  3. 70% या इससे ज्यादा ब्लॉकेज: इसे आमतौर पर गंभीर या महत्वपूर्ण ब्लॉकेज माना जाता है। इस स्तर पर आर्टरी में खून का प्रवाह प्रभावित होने और दिल की मांसपेशी तक पर्याप्त ऑक्सीजन न पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है।

आसान भाषा में समझें तो ब्लॉकेज जितना ज्यादा होता है, उतना ही रक्त प्रवाह प्रभावित होने की संभावना बढ़ती है। लेकिन हार्ट अटैक का खतरा केवल ब्लॉकेज के प्रतिशत से तय नहीं होता। 30–40% ब्लॉकेज वाला व्यक्ति भी पूरी तरह खतरे से बाहर नहीं माना जा सकता।

30–40% ब्लॉकेज को भी नजरअंदाज क्यों नहीं करना चाहिए?

डॉक्टर ने बताया 30 से 40% ब्लॉकेज भी खतरनाक हो सकती है। कम ब्लॉकेज वाला प्लाक भी अस्थिर होकर फट सकता है, जिसके आसपास खून का थक्का बनकर आर्टरी को अचानक बंद कर सकता है और हार्ट अटैक हो सकता है। अमेरिकन हार्ट एसोसिएशेन के मुताबिक (AHA) non-obstructive coronary artery disease को harmless मानकर छोड़ना उचित नहीं है।

हार्ट अटैक के लिए कौन से कारण हैं जिम्मेदार

कोलेस्ट्रॉल बढ़ना

डॉ. छाजेर के अनुसार, बढ़ा हुआ कोलेस्ट्रॉल दिल के रोग के प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल है। रक्त में LDL जैसे खराब कोलेस्ट्रॉल का स्तर बढ़ने पर धमनियों में प्लाक जमा होने का खतरा बढ़ सकता है।

ट्राइग्लिसराइड बढ़ना

खून में ट्राइग्लिसराइड का स्तर अधिक होना भी हृदय रोग के जोखिम से जुड़ा है। इसलिए लिपिड प्रोफाइल में ट्राइग्लिसराइड को कंट्रोल रखना जरूरी है।

हाई ब्लड प्रेशर

लगातार बढ़ा हुआ ब्लड प्रेशर रक्त वाहिकाओं पर दबाव डालता है और समय के साथ दिल तथा धमनियों को नुकसान पहुंचा सकता है। यह हार्ट अटैक के महत्वपूर्ण जोखिम कारकों में से एक है।

ब्लड शुगर बढ़ना

डायबिटीज या लंबे समय तक ब्लड शुगर का अधिक रहना रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचा सकता है और हृदय रोग का जोखिम बढ़ाता है।

मोटापा

अधिक वजन, खासकर पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और असामान्य कोलेस्ट्रॉल जैसे कई जोखिम कारकों से जुड़ा है। इसलिए स्वस्थ वजन बनाए रखना हृदय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।

एक्सरसाइज न करना

शारीरिक गतिविधि की कमी हृदय रोग के जोखिम को बढ़ा सकती है। नियमित वॉकिंग और अन्य शारीरिक गतिविधियां वजन, ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और हृदय स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मदद कर सकती हैं।

ज्यादा तेल और अनहेल्दी फैट का सेवन

डॉ. छाजेर ने खाने में ज्यादा तेल लेने को भी जोखिम से जोड़ते हुए तेल का सेवन कम करने पर जोर दिया। खासकर ज्यादा संतृप्त वसा और ट्रांस फैट वाली डाइट को सीमित रखना हृदय स्वास्थ्य के लिए बेहतर माना जाता है।

तनाव

लगातार मानसिक तनाव भी हृदय स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है। तनाव के साथ नींद की कमी, शारीरिक निष्क्रियता और अस्वास्थ्यकर खान-पान जैसी आदतें जोखिम को और बढ़ा सकती हैं।

धूम्रपान और शराब

धूम्रपान और शराब का सेवन हार्ट अटैक के लिए जिम्मेदार हो सकता है इसलिए उससे बचना जरूरी है।

ब्लॉकेज का पता लगाने के लिए कौन-कौन से टेस्ट कराएं

ब्लॉकेज का पता लगाने के लिए एंजियोग्राफी, सीटी कोरोनरी एंजियोग्राम (CT Coronary Angiogram) और टीएमटी (TMT) जैसे टेस्ट कराके आप अपने दिल का सही हाल जान सकते हैं।

हार्ट अटैक से बचाव कैसे करें

कार्डियोलॉजिस्ट के मुताबिक दिल के रोगों से बचाव करने के लिए डाइट में फल और सब्जियों का सेवन करें। डाइट में फाइबर रिच फूड्स का सेवन करे।  संतुलित डाइट में पर्याप्त फल-सब्जियां शामिल करके आप दिल के रोगों से बचाव कर सकते हैं। दिल के रोगों से बचाव के लिए रोजाना वॉक और एक्सरसाइज करना भी जरूरी है। दिल के लिए कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड, बीपी और शुगर कंट्रोल रखना भी जरूरी है। डॉक्टर की सलाह के अनुसार नियमित जांच कराएं और जरूरत पड़ने पर दवाओं के जरिए इन सभी जोखिम कारकों को कंट्रोल रखें। दवा खुद से बंद या कम नहीं करनी चाहिए। नियमित वॉकिंग, एक्सरसाइज या योग करें और वजन को कंट्रोल करें। खाने में तेल और अस्वास्थ्यकर वसा कम करें। धूम्रपान छोड़ें और तनाव को मैनेज करें।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी सामान्य स्वास्थ्य जागरूकता के लिए है। हार्ट अटैक के जोखिम और बचाव के उपाय व्यक्ति की स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार अलग हो सकते हैं। दवाएं या इलाज डॉक्टर की सलाह के बिना बंद या शुरू न करें।