ब्रिटेन ने मंगलवार को घोषणा की कि वह वेस्ट बैंक में अवैध इजरायली बस्तियों से आने वाले सभी सामानों के आयात पर प्रतिबंध लगाएगा।

ब्रिटेन के विदेश मंत्री एड मिलिबैंड ने हाउस ऑफ कॉमन्स में कहा कि ब्रिटिश सरकार का मानना है कि इन अवैध इजरायली बस्तियों में रहने वालों द्वारा वेस्ट बैंक में फिलस्तीनियों का ‘जातीय सफाया’ किया जा रहा है। साथ ही मंत्री ने इस इलाके पर इजरायल के कब्जे को गैर-कानूनी घोषित कर दिया।

मिलिबैंड के अनुसार, यह फैसला ब्रिटेन की कंपनियों को निर्माण, बुनियादी ढांचा, रियल एस्टेट, विज्ञापन और वित्त सेवाएं प्रदान करने से रोकेगा। ये सेवाएं इन बस्तियों के विस्तार को और बढ़ाती हैं।

मंत्री ने कहा कि ये नए उपाय इसलिए लागू किए जा रहे हैं, क्योंकि सरकार को लगता है कि इजरायल टू-स्टेट सॉल्यूशन को बिल्कुल खत्म करने की कोशिश में लगा हुआ है। मिलिबैंड की घोषणा के बाद कनाडा और फ्रांस सहित 12 देशों द्वारा एक संयुक्त बयान दिया गया, जिसमें टू-स्टेट सॉल्यूशन का समर्थन किया गया और अवैध इजरायली बस्तियों के साथ व्यापार पर प्रतिबंधों का समर्थन किया गया। कुछ देशों ने कहा कि वे भी इन उपायों पर विचार कर रहे हैं।

ब्रिटेन ने इजरायल से क्या प्रतिबंधित किया है और अभी क्यों किया है?

इस फैसले के बाद इजरायली बस्तियों में उत्पादित कृषि उत्पादों, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों और दूसरे तैयार सामानों को ब्रिटेन के बाजार में बेचने पर रोक लग जाएगी। यह रोक कब्जे वाले वेस्ट बैंक के उन इलाकों पर लागू होगी, जिनमें पूर्वी यरुशलम भी शामिल है।

इसके अलावा, ब्रिटेन सरकार कंपनियों को इजरायली बस्तियों से जुड़ी कुछ सेवाएं देने पर भी कानूनी रोक लगाएगी। इनमें वित्तीय सेवा, बुनियादी ढांचे से जुड़ी सेवाएं और रियल एस्टेट की मार्केटिंग जैसी सेवाएं शामिल हैं। साथ ही, हिंसा और बस्तियों के विस्तार में शामिल संगठनों और लोगों पर प्रतिबंध भी बढ़ाए जाएंगे।

इस फैसले को इजरायल की ओर से संवेदनशील इलाकों में नई निर्माण परियोजनाओं को मंजूरी देने की प्रतिक्रिया के तौर पर देखा जा रहा है। इनमें खास तौर पर ‘E1 कॉरिडोर’ शामिल है, जो पूर्वी यरुशलम और माले अदुमिम बस्ती के बीच स्थित है।

अगर E1 इलाके में निर्माण होता है, तो वेस्ट बैंक के उत्तरी और दक्षिणी हिस्सों के बीच संपर्क टूट सकता है। इससे पूर्वी यरुशलम भी वेस्ट बैंक के बाकी हिस्सों से और अलग-थलग पड़ सकता है। इसका सीधा असर उन इलाकों पर पड़ेगा, जिन्हें भविष्य के फिलिस्तीनी राज्य के हिस्से के तौर पर देखा जाता है।

यह फैसला 19 जुलाई 2024 को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय (ICJ) की दी गई सलाह के बाद भी आया है। ICJ ने कहा था कि कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्र में इजरायल की लगातार मौजूदगी अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है।

अदालत ने यह भी कहा था कि इजरायल द्वारा वेस्ट बैंक और पूर्वी यरुशलम में अपने नागरिकों को बसाना और वहां उनकी मौजूदगी बनाए रखना चौथे जिनेवा कन्वेंशन के अनुच्छेद 49(6) का उल्लंघन है। फैसले के पैराग्राफ 278 में खास तौर पर कहा गया कि दूसरे देशों की जिम्मेदारी है कि वे इजरायल की इस गैरकानूनी मौजूदगी से पैदा हुई स्थिति को कानूनी मान्यता न दें। साथ ही, उन्हें ऐसी कोई मदद या सहयोग नहीं देना चाहिए, जिससे इस स्थिति को बनाए रखने में सहायता मिले।

E1 कॉरिडोर में निर्माण का विरोध क्यों?

E1 कॉरिडोर वेस्ट बैंक को दो हिस्सों में बांटता है। यह वेस्ट बैंक के नक्शे पर उत्तर से दक्षिण की तरफ फैला हुआ है। अगर इजरायल E1 इलाके में बस्तियां और मकान बना देता है, तो वेस्ट बैंक का उत्तरी हिस्सा (जैसे रामल्लाह) और दक्षिणी हिस्सा (जैसे बेथलेहम और हेब्रोन) आपस में पूरी तरह कट जाएंगे। फलस्तीनियों के लिए अपने ही देश में एक शहर से दूसरे शहर जाना असंभव हो जाएगा।

इसके कारण पूर्वी यरुशलम बिल्कुल अलग पड़ जाएगा। उल्लेखनीय है कि फलस्तीनी लोग भविष्य में बनने वाले अपने स्वतंत्र देश की राजधानी ‘पूर्वी यरुशलम’ को बनाना चाहते हैं। यदि E1 में इजरायली निर्माण पूरा हो जाता है, तो पूर्वी यरुशलम बाकी वेस्ट बैंक से पूरी तरह से कट जाएगा और इजरायली बस्तियों से घिर जाएगा।

इन बस्तियों से इजरायल को कितना फायदा होता है?

अंकटाड (UNCTAD) की 2022 की एक रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया था कि इन अवैध बस्तियों ने 2000 और 2020 के बीच इजरायल की अर्थव्यवस्था में सालाना लगभग 30 बिलियन डॉलर का योगदान दिया।

इस प्रतिबंध का इजरायल की अर्थव्यवस्था पर क्या असर पड़ेगा?

इस प्रतिबंध से इजरायल की पूरी अर्थव्यवस्था पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा। इसकी वजह यह है कि इजरायल की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा हाई-टेक सामान, आधुनिक रक्षा उपकरण और दवाइयों के निर्यात से चलता है। इनमें से ज्यादातर उत्पाद इजरायल की 1967 से पहले की सीमाओं के भीतर बनाए जाते हैं।

हालांकि, इस प्रतिबंध का असर इजरायली बस्तियों में काम करने वाले कुछ खास कारोबारों पर सीधा पड़ सकता है। खास तौर पर जॉर्डन घाटी के खजूर उत्पादकों और बरकान के औद्योगिक कारखानों को नुकसान हो सकता है।

एक और समस्या यह है कि इजरायली निर्यातक इन बस्तियों में बने सामान पर अक्सर अलग से यह नहीं बताते कि वह बस्ती में बना है। वे ऐसे सामान को सामान्य ‘Made in Israel’ प्रमाणपत्र के तहत निर्यात करते हैं और व्यापार में मिलने वाली रियायतों का फायदा उठाते हैं।

इसलिए ब्रिटेन के प्रतिबंध को लागू करने के लिए यह पता लगाना जरूरी होगा कि कोई सामान वास्तव में कहां बना है और उसकी आपूर्ति श्रृंखला में कौन-कौन से इलाके शामिल हैं। इसके लिए कंपनियों को अपने सप्लाई नेटवर्क की ज्यादा बारीकी से जांच करनी होगी। इससे लागत बढ़ सकती है।

ब्रिटेन और इजरायल के बीच हर साल करीब 6.2 अरब पाउंड का द्विपक्षीय व्यापार होता है। बस्तियों से आने वाले सामान का हिस्सा इसमें बहुत छोटा है। इसका सटीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, लेकिन अनुमान के मुताबिक इन बस्तियों से ब्रिटेन को हर साल 2 करोड़ से 5 करोड़ पाउंड का सामान निर्यात किया जाता है।

फिलिस्तीनी मजदूरों पर प्रतिबंध का क्या असर पड़ सकता है?

फिलिस्तीनी मजदूरों और इजरायली बस्तियों की अर्थव्यवस्था के बीच संबंध काफी जटिल है। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) के मुताबिक, 7 अक्टूबर 2023 के हमले से पहले करीब 40,000 फिलिस्तीनी एरिया C की इजरायली बस्तियों और उनसे जुड़े औद्योगिक इलाकों में काम करते थे। इनमें ज्यादातर लोग निर्माण, खेती और कारखानों में मजदूरी जैसे काम करते थे।

7 अक्टूबर के हमलों के बाद इजरायल में फिलिस्तीनियों के काम करने पर बड़े पैमाने पर रोक लगा दी गई। हालांकि, 2024 में पेरिस स्थित नोरिया रिसर्च की एक रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 10,000 फिलिस्तीनी मजदूरों को वेस्ट बैंक के इजरायली औद्योगिक इलाकों में काम जारी रखने की अनुमति दी गई थी। इसके लिए उन्हें स्थानीय स्तर पर सैन्य सुरक्षा मंजूरी लेनी पड़ती थी।

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