दिल्ली पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार ने प्रत्येक ट्रैफिक सर्कल को अतिक्रमण, सड़क किनारे अवैध पार्किंग या गंभीर जाम जैसी समस्याओं से प्रभावित कम से कम एक ‘समस्याग्रस्त क्षेत्र’ चिन्हित करने का निर्देश दिया है।
यह कवायद ट्रैफिक व्यवस्था सुधारने, नियमों का सख्ती से पालन कराने और अवैध पार्किंग पर रोक लगाने के व्यापक प्रयास का हिस्सा है। लेकिन सवाल है कि क्या किसी सार्वजनिक सड़क के पास रहने से किसी निवासी को वहां पार्किंग की जगह पर कोई खास अधिकार मिल जाता है?
सार्वजनिक सड़क का मालिकाना हक
सार्वजनिक सड़क के किनारे घर होने मात्र से किसी व्यक्ति का उस सड़क पर कोई मालिकाना हक नहीं हो जाता। दिल्ली नगर निगम अधिनियम, 1957 स्पष्ट रूप से कहता है कि एक ‘सार्वजनिक सड़क’पर नगर निगम का मालिकाना हक होता है। धारा 298 के अनुसार, सभी सार्वजनिक सड़कें निगम के अधीन हैं। ये सड़कें आयुक्त के नियंत्रण में रहती हैं और उनका रखरखाव, नियंत्रण उप-नियमों के तहत किया जाता है।
दूसरे शब्दों में, घर के बाहर की सड़क नगर निगम की होती है, न कि वहां रहने वाले व्यक्ति की। अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो किसी मकान मालिक को अपनी संपत्ति के बाहर सड़क के किसी हिस्से पर विशेष अधिकार देता हो। किसी पार्किंग जगह का लंबे समय तक इस्तेमाल करने से भी उस पर कोई विशेष अधिकार नहीं बन जाता।
पार्किंग वैध है, लेकिन नियंत्रित है
सार्वजनिक सड़क पर वाहन पार्क करना अपने आप में अवैध नहीं है। मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 117 के तहत, राज्य सरकार यह तय कर सकती है कि वाहन कहां और कितनी देर तक पार्क किए जा सकते हैं। वह सार्वजनिक सेवा वाहनों के लिए भी लंबे समय तक रुकने की जगह तय कर सकती है।
अधिनियम की धारा 122 के तहत, किसी वाहन को सार्वजनिक जगह पर इस तरह खड़ा करना मना है, जिससे दूसरों के लिए खतरा, रुकावट या परेशानी पैदा हो। धारा 127 के तहत, पार्किंग नियमों का उल्लंघन करने वाले लावारिस या बिना निगरानी के वाहनों को क्रेन से हटाया जा सकता है या लॉक किया जा सकता है।
दिल्ली के अपने कुछ अतिरिक्त नियम भी हैं। मोटर वाहन अधिनियम के तहत बनाए गए ‘दिल्ली पार्किंग स्थल रखरखाव एवं प्रबंधन नियम, 2019’, सड़क के किसी भी मोड़/चौराहे के 25 मीटर के भीतर सड़क पर पार्किंग को प्रतिबंधित करते हैं और हरित क्षेत्रों, पार्कों, फुटपाथों, बस स्टॉप और कुछ अन्य स्थानों में पार्किंग पर रोक लगाते हैं।
नियम 11 के तहत, एरिया पार्किंग योजना में आवासीय इलाकों की पार्किंग व्यवस्था भी शामिल होगी। यह योजना स्थानीय निवासियों और रेजिडेंट वेलफेयर एसोसिएशन (RWA) की सलाह से बनाई जाएगी। साथ ही, कॉलोनी की सड़कों पर आपातकालीन वाहनों के लिए एक लेन खाली रखना जरूरी होगा।
इसी तरह, दिल्ली मोटर वाहन नियम, 1993 जिलाधिकारी को राज्य परिवहन प्राधिकरण, पुलिस उपायुक्त (यातायात) और संबंधित स्थानीय प्राधिकरण के परामर्श के बाद अपने अधिकार क्षेत्र में पार्किंग स्थलों को निर्धारित और अधिसूचित करने का अधिकार देते हैं।
दरअसल, घर के बाहर सड़क किनारे की पार्किंग उस सार्वजनिक प्राधिकरण के अधीन होती है, जो उस सड़क का प्रबंधन और नियंत्रण करता है, न कि वहां रहने वाले निवासी के।
अदालत ने क्या कहा है
सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली के पार्किंग संकट पर सीधे तौर पर अपनी बात रखी है। एम.सी. मेहता बनाम भारत संघ (2019) के मामले में, न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता की पीठ ने इस मुद्दे को ‘कारों की बढ़ती संख्या और जमीन की घटती उपलब्धता के बीच संघर्ष’ से उत्पन्न समस्या के रूप में वर्णित किया और टिप्पणी की कि पार्किंग प्रबंधन का शहरी नियोजन पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।
कोर्ट ने दिल्ली सरकार को दिल्ली पार्किंग स्थल रखरखाव एवं प्रबंधन नियम, 2019 अधिसूचित करने का निर्देश दिया। पीठ ने यह भी कहा कि एक प्रभावी पार्किंग नीति भीड़भाड़, प्रदूषण और अपराध को कम करने में मदद कर सकती है।
कोर्ट ने आवासीय इलाकों की व्यावहारिक स्थिति को भी माना। उसने कहा कि कुछ कॉलोनियों में सड़कों पर पार्किंग की अनुमति देना जरूरी है, क्योंकि घरों के अंदर उपलब्ध पार्किंग की तुलना में वाहनों की संख्या कहीं अधिक है।
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