Bhumihar vs Bhumihar Brahmin: बिहार में भूमिहार और भूमिहार ब्राह्मण जाति को लेकर एक बार फिर विवाद हो रहा है। बिहार में भूमिहार ब्राह्मण समाज की मांग है कि सरकारी दस्तावेजों और जाति प्रमाण पत्र में उनकी जाति का नाम सिर्फ भूमिहार नहीं बल्कि भूमिहार ब्राह्मण लिखा जाना चाहिए।
सवर्ण जाति में आने वाले भूमिहार ब्राह्मण समुदाय की बिहार में कुल आबादी 2.86% है जबकि राज्य की आबादी में ब्राह्मण 3.65 प्रतिशत और राजपूत समुदाय 3.45 प्रतिशत है।
आइए, इस पूरे विवाद को थोड़ा गहराई में जाकर समझते हैं।
भूमिहार शब्द का प्रयोग किए जाने की सिफारिश
बिहार राज्य सवर्ण आयोग की ओर से 2015 में भूमिहार ब्राह्मण की जगह पर भूमिहार शब्द का प्रयोग किए जाने की सिफारिश की गई थी। इसका भूमिहार ब्राह्मण संगठनों ने विरोध किया था। इस बारे में बिहार सरकार के सामने भगवान परशुराम परिषद के संस्थापक अवधेश मिश्रा और कैमूर निवासी अंजनी कुमार बेनीपुरी ने कुछ सवाल रखे थे।
भगवान परशुराम परिषद सहित कई प्रमुख भूमिहार संगठनों ने पिछले साल सितंबर में राज्य सरकार को पत्र लिखा था और मांग की थी कि सरकारी दस्तावेजों और जाति प्रमाण पत्रों में फिर से भूमिहार ब्राह्मण शब्द ही लिखा जाना चाहिए।
अंजनी कुमार बेनीपुरी ने राज्य सरकार को लिखे पत्र में कहा था कि जब 1931 के जाति सर्वेक्षण, राजस्व और भूमि स्वामित्व अभिलेखों में भूमिहार ब्राह्मण शब्द का इस्तेमाल किया गया है तो ऐसे में राज्य सवर्ण आयोग सिर्फ भूमिहार शब्द का प्रयोग करने के लिए कैसे कह सकता है। भूमिहार संगठनों ने इस मामले में राज्य सरकार को प्रदर्शन करने की चेतावनी दी थी।
जाति प्रमाण पत्र में भूमिहार शब्द का उल्लेख
2015 में बिहार सरकार की ओर से जारी किए गए जाति प्रमाण पत्र में भूमिहार शब्द का उल्लेख किया गया है और जब बिहार में जाति आधारित सर्वे रिपोर्ट 2022-23 आई तो उसमें जो 215 जातियां या जाति समूह थे, उसमें भूमिहार जाति ही लिखा गया।
जाति आधारित सर्वे रिपोर्ट में भूमिहार जाति को ब्राह्मण, राजपूत, कायस्थ, शेख, सैयद और पठान के साथ रखा गया था। इसके उलट, 1931 में हुई जाति जनगणना में भूमिहार ब्राह्मण शब्द का उल्लेख है।
अब क्यों शुरू हुआ झगड़ा?
बीते दिनों इसे लेकर विवाद तब तेज हुआ जब बिहार सरकार ने कहा कि भूमिहार जाति का नाम बदलकर भूमिहार ब्राह्मण करने की उसकी कोई योजना नहीं है। एक तरह से बिहार सरकार ने भूमिहार संगठनों के द्वारा लगातार की जा रही इस मांग को खारिज कर दिया।
बिहार सरकार के उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने बीजेपी विधायक जिबेश कुमार मिश्रा के द्वारा लाए गए एक प्रस्ताव पर कहा कि भूमिहार जाति को भूमिहार ब्राह्मण के रूप में दर्ज करने का अभी कोई प्रस्ताव नहीं है और सरकार का ऐसा करने का कोई इरादा भी नहीं है।
अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में शामिल करने की मांग
भूमिहार विधायकों ने सरकार के रुख को लेकर नाराजगी जाहिर की। बीजेपी के विधायक विशाल प्रशांत ने कहा कि भूमिहार ब्राह्मण समुदाय सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़ा हुआ है और इसे अनुसूचित जनजाति की श्रेणी में शामिल किया जाना चाहिए।
जिबेश कुमार मिश्रा ने कहा कि राज्य सरकार के दस्तावेजों और ऐतिहासिक अभिलेखों में इस जाति को भूमिहार ब्राह्मण के रूप में लिखा गया है लेकिन जाति प्रमाण पत्र में इसे केवल भूमिहार लिखा जा रहा है और इस वजह से भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है।
मिश्रा ने इस मामले में 1931 की जनगणना रिपोर्ट और राजस्व विभाग के भी कुछ रिकॉर्ड सामने रखे जिनमें इस जाति को भूमिहार ब्राह्मण के रूप में लिखा गया था। मिश्रा ने कहा कि इस बात की जांच होनी चाहिए कि भूमिहार ब्राह्मण को भूमिहार क्यों किया गया?
