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Explained: क्‍या है व‍िकस‍ित देश की पर‍िभाषा? 2047 तक भारत बन सकता है? समझ‍िए

प्रति व्यक्ति आय के मामले में नॉर्वे वर्ष 1966 में यानी 56 साल पहले भारत के मौजूदा स्तर पर था।

Explained: क्‍या है व‍िकस‍ित देश की पर‍िभाषा? 2047 तक भारत बन सकता है? समझ‍िए
प्रति व्यक्ति आय के मामले में नॉर्वे वर्ष 1966 में यानी 56 साल पहले भारत के मौजूदा स्तर पर था। (Photo Credit – PTI)

स्वतंत्रता दिवस के भाषण में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीयों से पांच प्रतिज्ञा लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, ”2047 में देश 100वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा। हमारा पहला संकल्प अगले 25 साल में भारत को विकसित देश बनाना है।” अब सवाल उठता है कि यह विकसित देश कैसा होता है और भारत को विकसित देश बनने के लिए क्या करना होगा?

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एक विकसित देश कैसा होता है?

अलग-अलग वैश्विक निकाय और एजेंसियां देशों का अलग-अलग श्रेणियों में बांटती हैं। संयुक्त राष्ट्र की ‘World Economic Situation and Prospects’ देशों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत करती है: पहली श्रेणी में उन देशों को रखा गया गया है जिनकी अर्थव्यवस्था पूरी तरह विकसित हो चुकी हैं। दूसरी श्रेणी में उन देशों को रखा गया है जिनकी अर्थव्यवस्था तेजी से बदल रही हैं। तीसरी श्रेणी में उन देशों को रखा गया है जिनकी अर्थव्यवस्था अभी विकसित हो रही हैं यानी विकासशील हैं।

इस वर्गीकरण का मतलब साफ है कि कोई देश सिर्फ अपनी भौगोलिक स्थिति की वजह से विकसित या विकासशील नहीं होता। ऐसा नहीं है कि सभी यूरोपीय देश “विकसित” हैं और सभी एशियाई देश “विकासशील”।

आर्थिक स्थितियों के आधार पर देशों को वर्गीकृत करने के लिए संयुक्त राष्ट्र ‘ग्रॉस नेशनल इनकम’ (GNI) और प्रति व्यक्ति आय (वर्तमान अमेरिकी डॉलर में) को ध्यान में रखकर विश्व बैंक के कैटिगराइजेशन उपयोग करता है।

लेकिन संयुक्त राष्ट्र के ‘विकसित’ और ‘विकासशील’ के मानक का अक्सर विरोध किया जाता है। पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चीन को विकासशील देश के रूप में वर्गीकृत करने की आलोचना की थी। क्योंकि उससे चीन को विश्व व्यापार संगठन में कुछ लाभ लेने का मौका मिल रहा था। ट्रंप ने कहा था कि अगर चीन विकासशील देश है तो अमेरिका को भी बनाया जाना चाहिए।

क्यों किया जाता है UN के वर्गीकरण का विरोध?

यह तर्क दिया जा सकता है कि संयुक्त राष्ट्र का वर्गीकरण बहुत सटीक नहीं है। यूएन के अनुसार यूएस, यूके और नॉर्वे समेत कुल 31 देश विकसित देशों की श्रेणी में आते हैं। 17 तेजी से बदलती अर्थव्यवस्था (Economies in transition) वाले देश हैं। इसके अलावा शेष सभी देशों को विकासशील देशों की श्रेणी में रखा गया है।

चीन और सोमालिया दोनों विकासशील देशों की श्रेणी में हैं, जबकि चीन का प्रति व्यक्ति आय सोमालिया से 26 गुना है। वहीं नॉर्वे का प्रति व्यक्ति आय चीन से सिर्फ सात गुना ज्यादा है लेकिन वह विकसित देशों की श्रेणी में है।

फिर ऐसे भी देश हैं – जैसे यूक्रेन, उसकी प्रति व्यक्ति जीएनआई $4,120 (चीन का एक तिहाई) है। लेकिन उसे विकासशील देशों से ऊपर बदलती अर्थव्यवस्था वाले देश की श्रेणी में रखा गया है।

भारत कहां खड़ा है?

भारत वर्तमान में तथाकथित विकसित देशों के साथ-साथ कुछ विकासशील देशों से भी बहुत पीछे है। अक्सर, बहस सकल घरेलू उत्पाद (GDP) को केंद्र में रखकर होता है। उस हिसाब से भारत दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक है – भले ही अमेरिका और चीन बहुत आगे हैं।

विकसित देश के रूप में वर्गीकृत होने के लिए किसी देश के लोगों की औसत आय अधिक मायने रखती है। प्रति व्यक्ति आय के मामले में भारत बांग्लादेश से भी पीछे है। चीन की प्रति व्यक्ति आय भारत से 5.5 गुना और ब्रिटेन की लगभग 33 गुना है।

प्रति व्यक्ति आय से अक्सर असमानता और जीवन की समग्र गुणवत्ता भी दिखाई देती है। इसे मैप करने का एक तरीका मानव विकास सूचकांक (एचडीआई) है। इसमें तीन कारकों को देखकर निष्कर्ष निकाला जाता है: नागरिकों का स्वास्थ्य, शिक्षा की गुणवत्ता और जीवन स्तर। मानव विकास सूचकांक के कुछ क्षेत्रों में भारत ने सुधार किया है। उदाहरण के लिए भारत में जन्म के समय जीवन प्रत्याशा 1947 में लगभग 40 वर्ष होती थी, जो अब लगभग 70 वर्ष हो गई है। प्राथमिक, माध्यमिक और तृतीयक स्तर की शिक्षा के लिए नामांकन भी बढ़ा है।

कितनी दूरी तय करनी बाकी है?

विकसित देशों या चीन की तुलना में भारत को अभी लंबी दूरी तय करनी है। विश्व बैंक द्वारा भारत पर 2018 की डायग्नोस्टिक रिपोर्ट में कहा गया है: “भले ही भारत क्रय शक्ति समानता (पीपीपी) के मामले में दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, फिर भी अधिकांश भारतीय अन्य मध्यम आय या अमीर देशों के लोगों की तुलना में अपेक्षाकृत गरीब हैं। भारत में अमीर परिवारों को भी अमीर देशों में गरीब परिवारों के स्तर तक पहुंचने के लिए अपनी कुल खपत को बढ़ाना होगा।”

भारत 2047 तक कितना हासिल कर सकता है?

यह आकलन करने का एक तरीका यह देखना है कि अन्य देशों को वहां पहुंचने में कितना समय लगा। उदाहरण के लिए प्रति व्यक्ति आय के मामले में नॉर्वे वर्ष 1966 में यानी 56 साल पहले भारत के मौजूदा स्तर पर था।

भारत की चीन से तुलना करना अधिक उपयोगी है। अभी चीन जिस मुकाम पर पहुंचा था, वहां तक पहुंचने में भारत को 15 साल लगेंगे, अगर बढ़ने की रफ्तार चीन जितनी ही रही तो। हालांकि चीन की वर्तमान प्रति व्यक्ति आय विकसित देशों ने कई दशक पहले हासिल कर ली थी। अभी चीन का जितना प्रति व्यक्ति आय है, यूके ने उतना 1987 में हासिल कर लिया था, अमेरिका और नॉर्वे ने 1979 में हासिल कर लिया था।

विश्व बैंक की 2018 की रिपोर्ट से भी पता चलता है कि भारत 2047 तक क्या हासिल कर सकता है। रिपोर्ट के मुताबिक, ”2047 तक भारत के कम से कम आधे नागरिक वैश्विक मध्यम वर्ग के रैंक में शामिल हो सकते हैं। अधिकांश परिभाषाओं से इसका मतलब यह होगा कि घरों में बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य, स्वच्छ पानी, बेहतर स्वच्छता, बिजली, एक सुरक्षित वातावरण, किफायती आवास और छुट्टी मनाने के लिए पर्याप्त आय होगा।”

लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए एक शर्त है: लोगों की गरीबी कम करनी होगी और  सार्वजनिक सेवा वितरण में काफी सुधार करना होगा। गौरतलब है कि 2013 तक भारत में 21.8 मिलियन नागरिक बेहद गरीब लोगों की श्रेणी में थे। यह आंकड़ा भारत को दुनिया में सबसे अधिक गरीब लोगों का घर घोषित करता है।

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