उत्तर प्रदेश में तीन दिनों तक हुई लगातार भारी बारिश से कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात पैदा हो गए हैं। इससे सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है और फसलों को भी नुकसान पहुंचा है।
राज्य के राहत आयुक्त कार्यालय की ओर से साझा किए गए आंकड़ों के मुताबिक, शुक्रवार (25 सितंबर) से रविवार सुबह तक बारिश और तूफान से जुड़ी घटनाओं में 56 लोगों की मौत हो गई और 46 लोग घायल हुए हैं।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 1,021 मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, बरेली और राज्य के कई अन्य हिस्सों में भारी बारिश हुई। 30-40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चली तेज हवाओं के साथ हुई बारिश के कारण कई जगह पेड़ और बिजली के खंभे गिर गए। सड़कें, गलियां और गांव पानी में डूब गए।
मौसम विभाग ने रविवार को राज्य के कुछ हिस्सों में भारी बारिश का अनुमान जताया था। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, रविवार को खत्म हुए 24 घंटों में राज्य में 45.1 मिली मीटर बारिश हुई, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 1.8 मिमी होती है। राज्य के 75 में से 56 जिलों में सामान्य से काफी ज्यादा बारिश दर्ज की गई।
मौसम विभाग के मुताबिक, दो अलग-अलग मौसम प्रणालियों के आपस में मिलने की वजह से पिछले तीन दिनों से उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में बाढ़ जैसे हालात बने हैं। ये दो मौसम प्रणाली हैं-निम्न दाब का क्षेत्र और पश्चीमी विक्षोभ।
निम्न दाब क्षेत्र की मौजूदगी
मौसम विभाग ने शनिवार को जारी प्रेस विज्ञप्ति में बताया था कि बंगाल की खाड़ी के ऊपर एक मजबूत निम्न दाब का क्षेत्र बना हुआ है। यह उत्तरी आंध्र प्रदेश-दक्षिणी ओडिशा तट से टकराने के बाद कमजोर हुआ, लेकिन उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश और उससे लगे दक्षिण-पूर्वी उत्तर प्रदेश के ऊपर आकर केंद्रित हो गया।
कम दबाव का क्षेत्र वह होता है, जहाँ वायुमंडलीय दबाव आसपास के इलाकों की तुलना में कम होता है। जमीन पर ज्यादा धूप पड़ने से किसी इलाके में हवा गर्म होकर ऊपर उठती है और कम दबाव का क्षेत्र बनता है। इसी दौरान नमी वाली हवा कम दबाव वाले क्षेत्र के केंद्र की ओर आती है और फिर ऊपर की ओर उठती है। ऊंचाई पर पहुँचने के बाद हवा ठंडी होने लगती है और संघनित होकर बादल बन जाती है, जिससे बारिश होती है।
मौसम विभाग के मुताबिक, यह दबाव क्षेत्र तेज हवाओं और भारी बारिश का कारण बन सकता है। जब यह कमजोर हो जाता है तो हवा की रफ्तार घट जाती है और बारिश की तीव्रता भी कम हो जाती है।
पश्चिमी विक्षोभ का आगमन
मौसम विभाग ने 26 सितंबर को ही जारी विज्ञप्ति में कहा था कि पश्चिमी विक्षोभ के साथ कम दबाव के क्षेत्र के टकराने की संभावना है, जिससे राज्य में तेज झोंकेदार हवाओं के साथ भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है। मध्य तराई क्षेत्र में कुछ जगहों पर बेहद भारी बारिश होने की संभावना थी।
पश्चीमी विक्षोभ पश्चिमी शीतोष्ण चक्रवात हैं, जो भूमध्य सागर के इलाके में बनते है। उपोष्णकटिबंधीय पश्चिमी जेट स्ट्रीम इन्हें भारत की ओर लाते हैं। काला सागर, कैस्पियन सागर और अरब सागर से गुजरते हुए इनमें नमी भर जाती है और जब ये हिमालय से टकराते हैं, तो उत्तरी भारत में बारिश होती है।
इन्हीं दो मौसम प्रणालियों के आपस में मिलने के कारण लौटते मानसून के बावजूद उत्तर प्रदेश में भारी बारिश हुई।
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