आने वाली सर्दियों में वायु प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार कुछ नए कदम उठाने की तैयारी में है। राज्य के पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने सोमवार को इन उपायों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि इसके तहत 10 दिसंबर 2026 से 20 जनवरी 2027 तक निर्माण और तोड़फोड़ के काम पर पूरी तरह रोक रहेगी। इसके अलावा दिल्ली के सभी पेट्रोल, डीजल, सीएनजी और एलपीजी पंपों को पूरे साल सिर्फ उन्हीं वाहनों में ईंधन भरने का निर्देश दिया गया है, जिनके पास वैध प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (PUCC) होगा।
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में सोमवार को हुई एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की मौजूदगी में पत्रकारों को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि बैठक में प्रस्तावित कदमों के तहत सरकार की ‘नो पीयूसीसी, नो फ्यूल’ नीति को और सख्ती से लागू किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली के सभी 500 पेट्रोल पंपों पर पुराने और इस्तेमाल की तय अवधि पूरी कर चुके वाहनों के खिलाफ सख्त अभियान चलाया जाएगा। इन पेट्रोल पंपों पर स्वचालित नंबर प्लेट पहचान प्रणाली (ANPR) कैमरे लगे हैं।
सिरसा ने बताया कि लोगों को जागरूक करने के लिए अक्टूबर में व्यापक अभियान चलाया जाएगा और नवंबर में प्रदूषण जांच केंद्रों को बेहतर बनाया जाएगा। इसके अलावा तीन स्वचालित वाहन जांच केंद्रों के जरिए 2.5 लाख वाहनों की फिटनेस जांच की जाएगी।
इससे पहले शनिवार को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने 1 अक्टूबर से ऐसे वाहनों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने की घोषणा की थी, जिनके पास वैध PUCC नहीं है।
आइए जानते हैं कि आखिर PUCC क्या होता है? वाहन मालिक इसे कैसे बनवा सकते हैं? और प्रदूषण की जांच कैसे की जाती है?
PUC सर्टिफिकेट क्या होता है?
जैसा कि इसके नाम से पता चलता है, PUC प्रमाणपत्र यह प्रमाणित करता है कि वाहन से होने वाला प्रदूषण तय सीमा के भीतर है। यानी वाहन से निकलने वाला धुआं और अन्य उत्सर्जन सरकार की ओर से तय मानकों के मुताबिक हैं। सभी वाहनों के लिए PUC प्रमाणपत्र जरूरी है और इसे समय-समय पर दोबारा बनवाना पड़ता है। ऐसा न करने पर प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े कानूनों के तहत जुर्माना लगाया जा सकता है। राज्य सरकार की ओर से अधिकृत अधिकारी वाहन चालक से यह प्रमाणपत्र दिखाने के लिए कह सकता है।
परिवहन विभाग की वेबसाइट के मुताबिक, दिल्ली में 730 से ज्यादा अधिकृत PUC केंद्र हैं। इनमें करीब 441 केंद्र पेट्रोल, सीएनजी और एलपीजी वाहनों की जांच करते हैं, जबकि 295 केंद्र डीजल वाहनों की जांच के लिए हैं। इन केंद्रों पर वाहन की प्रदूषण जांच की जाती है और अगर वह तय उत्सर्जन मानकों पर खरा उतरता है तो उसे PUCC जारी किया जाता है।
PUCC में वाहन से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां होती हैं। इसमें प्रमाणपत्र का क्रमांक, वाहन का पंजीकरण नंबर, जांच की तारीख, उत्सर्जन की मात्रा और PUC की वैधता की तारीख शामिल होती है।
प्रदूषण की जांच कैसे की जाती है?
प्रदूषण की जांच के लिए इस्तेमाल होने वाली कंप्यूटरीकृत व्यवस्था सोसाइटी ऑफ इंडियन ऑटोमोबाइल मैन्युफैक्चरर्स ने विकसित की है। इसमें एक गैस एनालाइजर को कंप्यूटर से जोड़ा जाता है। कंप्यूटर के साथ कैमरा और प्रिंटर भी जुड़े होते हैं।
गैस एनालाइजर वाहन से निकलने वाले प्रदूषण की मात्रा को मापता है और इसकी जानकारी सीधे कंप्यूटर को भेजता है। वहीं कैमरा वाहन की नंबर प्लेट की तस्वीर लेता है।
अगर वाहन से निकलने वाले प्रदूषक तय सीमा के भीतर पाए जाते हैं, तो उसके लिए PUC प्रमाणपत्र जारी किया जा सकता है।
क्या PUC प्रमाणपत्र रखना कानूनी रूप से जरूरी है?
हां, यह कानूनी रूप से जरूरी है। मोटर वाहन अधिनियम की धारा 190(2) के तहत ईंधन से चलने वाले सभी वाहनों के लिए यह प्रमाणपत्र रखना जरूरी है। केंद्रीय मोटर वाहन नियम (CMVR), 1989 में भी वैध PUCC रखना अनिवार्य किया गया है। अधिकृत जांच अधिकारी के मांगने पर इसे दिखाना होता है।
पत्र सूचना कार्यालय (PIB) की 22 जुलाई 2021 को जारी एक जानकारी में केंद्र सरकार ने पूरे देश में जारी होने वाले PUCC के लिए एक समान प्रारूप तय करने की जानकारी दी थी। इसमें केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के नियम 115(7) का हवाला देते हुए कहा गया था कि हर वाहन के लिए पहली बार पंजीकरण की तारीख से एक साल पूरा होने के बाद वैध PUCC रखना जरूरी है।
सरकार ने यह भी कहा था कि यह प्रमाणपत्र हमेशा वाहन में रखा जाना चाहिए और अधिकृत अधिकारी के मांगने पर उसे दिखाना होगा।
BS-IV या BS-VI मानकों के तहत बने वाहनों के लिए PUC प्रमाणपत्र की वैधता 12 महीने होती है। वहीं पुराने उत्सर्जन मानकों के तहत बने वाहनों के लिए PUCC की वैधता छह महीने होती है।
BS का मतलब भारत स्टेज उत्सर्जन मानक है। भारत में फिलहाल BS-VI मानक लागू हैं। इन्हें वर्ष 2020 में पूरे देश में लागू किया गया था। इन मानकों के तहत नाइट्रोजन ऑक्साइड और सूक्ष्म कणों जैसे प्रदूषकों के उत्सर्जन की तय सीमा को काफी कम किया गया है।
PUC प्रमाणपत्र बनवाने की कीमत वाहन के प्रकार के आधार पर 50 से 150 रुपये के बीच होती है। हालांकि, वैध प्रमाणपत्र न होने पर इसकी कीमत काफी ज्यादा हो सकती है। शनिवार को दिल्ली सरकार ने बताया कि मौजूदा नियमों के तहत बिना वैध PUCC के वाहन चलाने पर 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया जा सकता है।
नियमों में इससे भी कड़ी सजा का प्रावधान है। इसमें तीन महीने तक वाहन चलाने के लाइसेंस से अयोग्य ठहराया जाना और गंभीर मामलों में छह महीने तक की जेल भी शामिल है।
PUC प्रमाणपत्र ऑनलाइन कैसे डाउनलोड करें?
अधिकृत केंद्र पर वाहन की प्रदूषण जांच कराने के बाद वाहन मालिक अपना PUC प्रमाणपत्र ऑनलाइन प्राप्त कर सकते हैं।
इसके लिए परिवहन सेवा की वेबसाइट पर वाहन का पंजीकरण नंबर, चेसिस नंबर के आखिरी पांच अंक और सुरक्षा कोड दर्ज करना होता है।
क्या इलेक्ट्रिक वाहनों को PUC प्रमाणपत्र से छूट है? इसका जवाब है- हाँ। इलेक्ट्रिक वाहन बिजली से चलते हैं और उनसे धुआं या प्रदूषणकारी गैसों का उत्सर्जन नहीं होता। इसलिए इलेक्ट्रिक वाहन मालिकों के लिए PUC प्रमाणपत्र बनवाना अनिवार्य नहीं है।
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