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ट्विन टावर के 59 बायर्स को अभी तक नहीं मिला रिफंड, प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इन 9 दस्तावेजों की जरूर करें जांच

कोर्ट के आदेशानुसार Twin Towers में फ्लैट बुक कराने वालों को रिफंड देने का काम 31 मार्च, 2022 को ही पूरा हो जाना चाहिए था।

ट्विन टावर के 59 बायर्स को अभी तक नहीं मिला रिफंड, प्रॉपर्टी खरीदने से पहले इन 9 दस्तावेजों की जरूर करें जांच
प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credit – freepik.com)

नोएडा के सुपरटेक ट्विन टावर्स (एपेक्स और सेयेन) को ध्वस्त किया जा चुका है। कोर्ट के आदेशानुसार सुपरटेक को टावर्स में फ्लैट बुक करने वालों को उनका पैसा ब्याज समेत वापस करना है। 32 मंजिला एपेक्स में हर मंजिल पर 14 फ्लैट बनाए गए थे। वहीं 31 मंजिला सेयेन में हर मंजिल पर 12 स्टूडियो अपार्टमेंट का निर्माण हुआ था।

दोनों टावर में करीब 950 फ्लैट्स थे, जिनमें से करीब 711 की बुकिंग हो चुकी थी। अदालत के आदेश और लगातार निगरानी के बावजूद अभी तक 59 बायर्स को रिफंड नहीं मिला है। जबकि कोर्ट के फैसले के अनुसार रिफंड का काम 31 मार्च, 2022 को ही पूरा हो जाना चाहिए था। सुपरटेक ने 652 बायर्स को अपने दूसरे प्रोजेक्ट्स में प्रॉपर्टी देकर रिफंड सेटलमेंट किया है।

ट्विन टावर के ध्वस्तीकरण ने प्रॉपर्टी में निवेश करने वालों या महानगरों में घर खरीदने का सपना देखने वालों को एक बार फिर चिंता में डाल दिया है। सवाल उठने लगा है कि आखिर किन दस्तावेजों से पता करें कि प्रॉपर्टी सही है या नहीं?

इन दस्तावेजों की करें जांच:

एग्रीमेंट टू सेल: यह संपत्ति को बेचने की उम्मीद से तैयार किया गया पहला दस्तावेज होता है। इसमें संपत्ति का विस्तृत विवरण होता है। साथ ही खरीदार और विक्रेता के बीच तय हुई तमाम शर्तों को भी लिखा गया होता है। इसमें सहमति के अनुसार तय हुई खरीद मूल्य, राशि के पूर्ण भुगतान की आखिरी तारीख आदि को शामिल गया होता है।

एब्सोल्यूट सेल डीड और टाइटल डीड: सेल डीड या टाइटल डीड कुछ सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों में से एक है। इसमें संपत्ति के स्वामित्व के वास्तविक हस्तांतरण का रिकॉर्ड होता है। इसे सब-रजिस्ट्रार के कार्यालय में पंजीकृत करना होता है।

टाइटल सर्च रिपोर्ट: होम लोन लेने के लिए यह दस्तावेज विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है। इस दस्तावेज से प्रॉपर्टी का चेन पता चलता है यानी कोई प्रॉपर्टी किस-किस के स्वामित्व से आप तक पहुंची है। संबंधित प्राधिकरण के साथ पंजीकृत इस डॉक्यूमेंट में टाइटल होल्डर्स का नाम और संयुक्त किरायेदारी आदि को भी शामिल किया गया होता है।

खाता प्रमाण पत्र: इस दस्तावेज़ को अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग नामों से जाना जाता है। यह इस बात का प्रमाण देता है कि संपत्ति का रिकॉर्ड स्थानीय नगरपालिका के रिकॉर्ड में मौजूद है।

प्रॉपर्टी टैक्स की रसीद: इससे पता चलता है कि प्रॉपर्टी के पिछले मालिक ने टैक्स का भुगतान किया है या नहीं है। कोई बकाया तो नहीं छोड़ा गया। साथ ही रशीद संपत्ति की कानूनी स्थिति को भी सत्यापित करता है। इसलिए इसे प्रॉपर्टी के सही होने का एक महत्वपूर्ण साक्ष्य भी माना जा सकता है।

एन्कम्ब्रेन्स सर्टिफिकेट: इस दस्तावेज से यह प्रमाणित होता है कि संपत्ति सभी ऋणों से मुक्त है। यानी प्रॉपर्टी पर कोई लोन उधार नहीं है। यह बैंकों से संपत्ति पर लोन लेने के लिए एक महत्वपूर्ण दस्तावेज है। इसमें संपत्ति से संबंधित लेनदेन का विवरण भी होता है।

ऑक्यूपेंसी प्रमाण पत्र: इसे दखल प्रमाण पत्र भी कहते हैं। भवन के निर्माण के बाद यह दस्तावेज नगर निगम से मिलता है। इससे साबित होता है कि निर्माण कार्य स्वीकृत योजना के अनुसार ही हुआ है और अब दखल (कब्जा) के लिए तैयार है।

बकाया लोन संबंधी बैंक स्टेटमेंट: यदि खरीदी जा रही संपत्ति पर कोई लोन बकाया है, तो उस लोन से संबंधित बैंक स्टेटमेंट ले लेना सुरक्षित होता है। इससे लोन की राशि, ब्याज, इंस्टॉलमेंट आदि सब स्पष्ट हो जाता है।

नॉन ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट(NOC): कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले डेवलपर से विभिन्न विभागों का NOC मांग कर देख लेना आवश्यक होता है। इससे यह प्रमाणित है कि डेवलपर सीवेज बोर्ड, प्रदूषण बोर्ड, पर्यावरण विभाग, यातायात और समन्वय विभाग, आदि से निर्माण की अनुमति ली है या नहीं।

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First published on: 31-08-2022 at 01:53:19 pm
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