Indian Railway’s Dedicated Freight Corridor: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के वडोदरा में भारतीय रेलवे की महत्वाकांक्षी परियोजना ‘वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर’ (WDFC) के अंतिम तीन खंडों का औपचारिक उद्घाटन किया। 326 किलोमीटर लंबे इन खंडों को 20,700 करोड़ रुपये से अधिक की लागत से तैयार किया गया है। इसके साथ ही गुजरात से महाराष्ट्र को जोड़ने वाला यह पूरा रूट अब पूरी तरह से चालू हो गया है।

नवनिर्मित तीन प्रमुख खंडों में न्यू सानंद (उत्तर)-न्यू मकरपुरा, न्यू उंबरगांव-न्यू सफाले और न्यू सफाले-न्यू जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट (JNPT) शामिल हैं। ये तीनों खंड मिलकर वेस्टर्न कॉरिडोर के पूरा होने का मार्ग प्रशस्त करते हैं।

1506 किलोमीटर लंबा पूरा रूट

यह पूरा वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कुल 1,506 किलोमीटर लंबा है। यह उत्तर प्रदेश में दिल्ली के पास दादरी से शुरू होकर महाराष्ट्र के नवी मुंबई स्थित जवाहरलाल नेहरू पोर्ट ट्रस्ट तक जाता है। इसके पूरी तरह सक्रिय होने से उत्तर भारत का संपर्क सीधे बंदरगाहों से हो गया है।

सामानों की तेज आवाजाही का रूट

इस पश्चिमी गलियारे पर मुख्य रूप से गुजरात के पिपावाव, मुंद्रा और कांडला बंदरगाहों के साथ महाराष्ट्र के JNPT व मुंबई पोर्ट से आने वाले ISO कंटेनरों का परिवहन किया जाएगा। ये कंटेनर सीधे दिल्ली (तुगलकाबाद), यूपी (दादरी), पंजाब (धांधारी कलां) और राजस्थान (खातुवास) स्थित अंतर्देशीय कंटेनर डिपो तक पहुंचेंगे।

प्रमुख उत्पादों का होगा परिवहन

कंटेनर माल के अलावा इस समर्पित मार्ग पर कोयला, उर्वरक, खाद्यान्न, नमक, लोहा, इस्पात और सीमेंट जैसी आवश्यक वस्तुओं को भी देश के एक कोने से दूसरे कोने तक तेजी से भेजा जाएगा। JNPT से सीधी कनेक्टिविटी मिलने के कारण आने वाले समय में माल ढुलाई का आंकड़ा और बढ़ने की संभावना है।

ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का नेटवर्क

दूसरी ओर 1,337 किलोमीटर लंबा ‘ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर’ (EDFC) पंजाब के लुधियाना से शुरू होकर बिहार के सोननगर तक जाता है। यह मार्ग मुख्य रूप से पूर्वी भारत से देश के बाकी हिस्सों तक कोयले और विभिन्न खनिजों की ढुलाई को आसान बनाता है। EDFC को अक्टूबर 2023 में ही पूरी तरह से चालू कर दिया गया था।

बड़ी आबादी को बाईपास करता रूट

ईस्टर्न कॉरिडोर का निर्माण इस तरह किया गया है कि मालगाड़ियां मिर्जापुर, प्रयागराज, कानपुर, इटावा, अलीगढ़, मेरठ, अंबाला और साहनेवाल जैसे कई घनी आबादी वाले शहरों के बाहर से निकल जाती हैं। इससे शहरों के भीतर ट्रैफिक का दबाव भी घटता है और ट्रेनों की आवाजाही भी नहीं रुकती।

दोगुनी रफ्तार से दौड़ रहीं ट्रेनें

सामान्य रेल पटरियों पर चलने वाली मालगाड़ियों के मुकाबले DFC पर ट्रेनों की रफ्तार दोगुनी दर्ज की गई है। आंकड़े बताते हैं कि जहां सामान्य पटरियों पर मालगाड़ियां धीमी चलती हैं, वहीं DFC पर इनकी औसतन गति 50 किलोमीटर प्रति घंटे से अधिक रहती है।

माल ढुलाई में लगातार रिकॉर्ड वृद्धि

रेलवे ने वित्तीय वर्ष 2025-26 में 1,670 मिलियन टन की रिकॉर्ड माल ढुलाई की है। वर्तमान में ईस्टर्न और वेस्टर्न दोनों कॉरिडोर मिलाकर रोजाना करीब 426 मालगाड़ियों का संचालन किया जा रहा है, जिससे सामानों की डिलीवरी में लगने वाला समय और लागत दोनों कम हो गए हैं।

फ्रेट कॉरिडोर से जुड़ी अहम बातें

  • दोगुनी रफ्तार: DFC पटरियों पर मालगाड़ियां 50 किमी/घंटा से अधिक की औसत गति से दौड़ती हैं, जो सामान्य रेल नेटवर्क से दोगुनी स्पीड है।
  • बड़ी लॉजिस्टिक्स बचत: यात्री ट्रेनों से अलग ट्रैक होने के कारण सामानों के परिवहन में लगने वाला समय और लागत दोनों काफी कम हो गए हैं।
  • रेलवे की कमाई में बढ़ोतरी: भारतीय रेलवे की कुल आय में माल ढुलाई का हिस्सा 65% से अधिक है; 2030 तक रेल माल ढुलाई की हिस्सेदारी 45% तक बढ़ाने का लक्ष्य है।
  • अंतरराष्ट्रीय वित्तपोषण: इस विशाल प्रोजेक्ट के लिए जापान (JICA) और विश्व बैंक (World Bank) से वित्तीय सहायता/ऋण प्राप्त हुआ है।
  • तीसरे कॉरिडोर का ऐलान: सरकार ने सूरत (गुजरात) से डंकुनी (पश्चिम बंगाल) के बीच तीसरे नए फ्रेट कॉरिडोर की योजना पर भी काम शुरू कर दिया है।

रेलवे की कमाई और 2030 का लक्ष्य

भारतीय रेलवे की कुल कमाई में माल ढुलाई सेवाओं का हिस्सा 65 प्रतिशत से अधिक है। इस कमाई का उपयोग यात्री ट्रेनों की टिकट दरों पर मिलने वाली सब्सिडी में किया जाता है। राष्ट्रीय रेल योजना के तहत 2030 तक रेल द्वारा माल ढुलाई की कुल हिस्सेदारी को बढ़ाकर 45 प्रतिशत (3,000 मिलियन टन) करने का लक्ष्य रखा गया है।

जापान और विश्व बैंक की साझेदारी

इस विशाल परियोजना की पहली चर्चा अप्रैल 2005 में भारत और जापान के बीच हुई थी। बाद में 2007 में डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (DFCCIL) का गठन किया गया। इस परियोजना के लिए विश्व बैंक से 14,900 करोड़ रुपये और जापान अंतर्राष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (JICA) से 38,722 करोड़ रुपये का कर्ज मिला है।

भविष्य की योजनाएं और तीसरा नया कॉरिडोर

रेल नेटवर्क को और मजबूत करने के लिए केंद्र सरकार ने सूरत (गुजरात) को डंकुनी (पश्चिम बंगाल) से जोड़ने वाले एक तीसरे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर का भी ऐलान किया है। वर्तमान में इस नए तीसरे कॉरिडोर की विस्तृत रिपोर्ट (DPR) तैयार की जा रही है, जिसके बनने से देश में लॉजिस्टिक्स का पूरा खाका बदल जाएगा।

यह भी पढ़ें: अमृत भारत 3.0: 1st, 2nd और 3rd AC के साथ 6 स्लीपर कोच, जानिए कैसी है रेलवे की यह नई मॉडर्न ट्रेन

भारतीय रेलवे के यात्रियों के लिए एक बेहद राहत और खुशी की खबर सामने आई है। चेन्नई स्थित इंटीग्रल कोच फैक्टरी (ICF) से पहला ‘अमृत भारत 3.0’ ट्रेनसेट पूरी तरह बनकर बाहर आ गया है और रोल आउट हो चुका है। पढ़िए पूरी खबर…