रात में सोने का समय हो गया है। आपने अलार्म लगाया और देखा कि फोन की बैटरी सिर्फ 23 फीसदी बची है। आपने बिस्तर के पास ही उसे चार्जर से लगा दिया और सो गए। सुबह तक फोन करीब सात से आठ घंटे चार्ज होता रहा। अगर आप फास्ट चार्जर इस्तेमाल करते हैं तो फोन को 100 फीसदी तक चार्ज होने के लिए इतने समय की जरूरत नहीं थी।
शायद आपको पता हो कि फोन को इतनी देर तक चार्जिंग पर लगाए रखना उसकी बैटरी के लिए ठीक नहीं है। फोन में इस्तेमाल होने वाली लिथियम-आयन बैटरी को बार-बार चार्ज और डिस्चार्ज करने से उसकी क्षमता धीरे-धीरे कम होती जाती है और उसकी उम्र भी घटती है।
पहले सीधी सी सलाह दी जाती थी कि फोन को रात भर चार्ज पर नहीं छोड़ना चाहिए और उसे 100 फिसदी चार्ज करने से बचना चाहिए। बैटरी ज्यादा दिन तक चले इसके लिए उसे 20 से 80 फीसदी के बीच रखना बेहतर माना जाता था।
सैद्धांतिक रूप से यह सलाह आज भी सही है, क्योंकि फोन के अंदर इस्तेमाल होने वाली बैटरी की मूल रासायनिक प्रक्रिया में कोई बड़ा बदलाव नहीं आया है। बैटरी को बार-बार पूरी तरह 0 फीसदी तक खत्म करके फिर 100 फीसदी तक चार्ज करने से उसकी उम्र कम होती है।
आधुनिक स्मार्टफोन में हालांकि बैटरी की सेहत बनाए रखने और चार्जिंग को नियंत्रित करने के लिए बेहतर तकनीक आ गई है। इसलिए आज सवाल थोड़ा अलग हो गया है।
बेहतर चार्जिंग नियंत्रण
आधुनिक फोन अब सिर्फ यह नहीं कहते कि रातभर फोन चार्ज न करें, बल्कि वे रात के दौरान चार्जिंग को खुद नियंत्रित कर सकते हैं।
एपल ने 2019 से ऑप्टिमाइज्ड बैटरी चार्जिंग की सुविधा दे रखी है। यह फीचर यूजर की रोजाना चार्जिंग की आदतों को समझता है। अगर फोन लंबे समय तक चार्जर से जुड़ा रहने वाला है तो यह एक निश्चित स्तर के बाद चार्जिंग की गति कम कर देता है या उसे रोक देता है।
सैमसंग और गूगल पिक्सल फोन में भी इसी तरह की सुविधाएं हैं। पिक्सल फोन में एडेप्टिव चार्जिंग फीचर है। यह भी यूजर की चार्जिंग की आदतों को समझता है और रात में चार्जिंग की गति कम कर देता है। इसका लक्ष्य यह होता है कि जब आप आम तौर पर फोन को चार्जर से हटाते हैं, उससे कुछ समय पहले ही बैटरी 100 फीसदी तक पहुंचे।
सैमसंग फोन में स्लीप टाइम प्रोटेक्शन फीचर है। यह सोने के दौरान चार्जिंग को करीब 80 फीसदी पर रोक देता है और फिर आपके जागने के समय के आसपास बैटरी को 100 फीसदी तक पहुंचाने के लिए चार्जिंग को दोबारा बढ़ाता है।
नए आईफोन 17 के साथ एपल ने एडेप्टिव पावर मोड भी पेश किया है। यह आपकी सामान्य बैटरी खपत को समझता है और अनुमान लगाता है कि दिन में कब बैटरी कम पड़ सकती है। इसके बाद यह बिजली के इस्तेमाल में बदलाव करता है, ताकि बैटरी ज्यादा देर तक चल सके।
चार्जिंग की सीमा तय करना
तो क्या फोन को सिर्फ 80 फीसदी तक चार्ज करना बेहतर है? बैटरी को लंबे समय तक ज्यादा चार्ज पर रखने से बचना उसकी उम्र को बढ़ा सकता है। लेकिन अब फोन बनाने वाली कंपनियां भी 80 फीसदी तक चार्ज करने को ही एकमात्र विकल्प नहीं मानतीं।
सैमसंग के नए फोन में उपयोगकर्ता बैटरी प्रोटेक्शन की सुविधा के तहत चार्जिंग की अधिकतम सीमा अपनी जरूरत के मुताबिक तय कर सकते हैं। इसमें 80, 85, 90 या 95 फीसदी तक की सीमा चुनी जा सकती है।
एपल के आईफोन 15 और उसके बाद के मॉडल में भी ऐसी ही सुविधा है। इसमें यूजर 80 से 100 फीसदी के बीच 5 फीसदी के अंतर से चार्जिंग की सीमा तय कर सकते हैं। फोन यूजर की चार्जिंग आदतों के आधार पर खुद भी एक सीमा सुझा सकता है।
गूगल पिक्सल 6ए और उसके बाद के मॉडल में एडेप्टिव चार्जिंग के बजाय सीधे 80 फीसदी की चार्जिंग सीमा तय की जा सकती है। यह उन लोगों के लिए उपयोगी विकल्प है, जिनका दिन खत्म होने तक भी फोन में कुछ बैटरी बची रहती है।
फोन को गर्मी से बचाएं
चार्जिंग से जुड़ी ये नई सुविधाएं बैटरी की उम्र बढ़ाने में मदद कर सकती हैं, लेकिन वे एक और महत्वपूर्ण चीज से पूरी तरह नहीं बचातीं—गर्मी।
लिथियम-आयन बैटरी में इस्तेमाल होने वाले रसायन ज्यादा तापमान के प्रति संवेदनशील होते हैं। अगर बैटरी को लंबे समय तक गर्म जगह पर रखा जाए तो उसकी क्षमता धीरे-धीरे कम हो सकती है। अगर उसी समय बैटरी चार्ज भी हो रही हो तो यह असर और बढ़ सकता है।
फोन भी अब गर्मी को लेकर खुद प्रतिक्रिया देने लगे हैं। जब डिवाइस को ज्यादा तापमान का पता चलता है तो वह चार्जिंग की गति या सीमा को अपने आप कम कर सकता है।
इस मामले में सामान्य सलाह अब भी वही है। फोन को बहुत ज्यादा गर्मी से हमेशा बचाकर रखें। उसे गर्म कार के अंदर या सीधे धूप में न छोड़ें।
अगर आप रात में फोन चार्ज करते हैं तो उसे तकिए के नीचे या बिस्तर के किसी ऐसे हिस्से में न रखें, जहां गर्मी बाहर न निकल पाए। इससे फोन ज्यादा गर्म हो सकता है और उसके ओवरहीट होने का खतरा बढ़ सकता है।
तो क्या फोन को रातभर चार्ज कर सकते हैं?
ज्यादातर आधुनिक स्मार्टफोन इस्तेमाल करने वालों के लिए इसका जवाब हां है। फोन अब चार्जिंग को अपने आप नियंत्रित कर लेते हैं। इसलिए आपको रात में उठकर ठीक 80 फीसदी पर फोन को चार्जर से निकालने की जरूरत नहीं है।
इसके बजाय देखें कि आपके फोन में चार्जिंग से जुड़ी कौन-कौन सी सुविधाएं उपलब्ध हैं। अगर आपकी रोजाना की दिनचर्या के मुताबिक ठीक लगे तो ऑप्टिमाइज्ड, एडेप्टिव या स्लीप-अवेयर चार्जिंग का इस्तेमाल करें। अगर आपको हर दिन 100 फीसदी बैटरी की जरूरत नहीं पड़ती तो चार्जिंग की कम सीमा तय करने पर भी विचार कर सकते हैं।
सबसे जरूरी बात यह है कि फोन को बहुत ज्यादा गर्म होने से बचाएं।
फोन की बैटरी अभी भी समय के साथ कमजोर होती है, लेकिन अब स्मार्ट चार्जिंग जैसी तकनीकों की मदद से उसे लंबे समय तक चलाया जा सकता है। इसलिए अपने फोन की चार्जिंग सेटिंग्स जरूर देखें और तकनीक को बैटरी की सेहत बनाए रखने का कुछ काम करने दें।
(यह लेख मीना झा ने लिखा है। वह ऑस्ट्रेलिया की CQ यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर हैं।)
यह भी पढ़ें-ग्रेटर नोएडा में शख्स की जेब में फटा ब्रांडेड मोबाइल, दोनों हाथ और शरीर का हिस्सा झुलसा, जानें फोन फटने की क्या हो सकती है वजह?
मोबाइल फोन का इस्तेमाल जितना सुविधाजनक है उतना ही इस गैजेट के नुकसान भी हैं। फिर चाहे इस गैजेट की लत लगना है या फिर मोबाइल की बैटरी फट जाना। जी हां, यूपी के ग्रेटर नोएडा से स्मार्टफोन की बैटरी फटने का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। बैटरी फटने की वजह से फोन का मालिक गंभीर रूप से घायल भी हो गया है। घायल का अस्पताल में इलाज किया जा रहा है। यह घटना बुधवार (12 अगस्त) की है। पूरी खबर के लिए यहाँ क्लिक करें।
