भारत में ‘सरकारी नौकरी’ का सपना इतना बड़ा है कि लगभग हर युवा एक न एक बार सरकारी नौकरी में शामिल होने के बारे में सोचता है। इसी का परिणाम है कि हर साल करोड़ो युवा केंद्र और राज्य सरकारों में खाली पड़े पदों के लिए आवेदन करते हैं।
बात सिर्फ सामान्य शैक्षणिक पृष्ठभूमि वाले युवाओं तक सीमित नहीं है। डॉक्टर, इंजीनियर और अन्य तकनीकी पेशेवर भी सरकारी नौकरियों को प्राथमिकता देते हैं। इसके पीछे कई आर्थिक और सामाजिक कारण हैं, जिनमें निजी क्षेत्र में पर्याप्त नौकरियों की कमी, सरकारी नौकरी को लेकर सामाजिक सोच और बेहतर करियर की उम्मीद प्रमुख हैं। इसके साथ ही उद्यम के लिए पर्याप्त सरकारी समर्थन न मिलना भी युवाओं को सरकारी नौकरी की ओर आकर्षित करता है।
हालांकि, पेपर लीक और सरकारी भर्ती परीक्षाओं को लेकर हाल में हुए विरोध प्रदर्शनों ने सरकारी नौकरी के संबंध में कई सवाल खड़े किए हैं। आखिर सरकारी भर्ती प्रक्रिया काम कैसे करती है? यह कितने लोगों को रोजगार दे सकती है? वास्तव में कितनी सरकारी नौकरियां मौजूद हैं? आइए इसे विस्तार से समझते हैं।
सरकारी कार्यबल का आकार कितना है?
डॉक्टरों और तकनीकी विशेषज्ञों के अलावा, सरकारी कर्मचारियों को मुख्य रूप से ग्रुप A, B और C में बांटा जाता है। पहले ग्रुप D की भी एक अलग श्रेणी होती थी, जिसमें चपरासी जैसे पद शामिल थे। अब ग्रुप D के पदों को ग्रुप C में शामिल कर दिया गया है।
उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2023 तक केंद्र सरकार के तहत कुल 30.62 लाख कर्मचारी कार्यरत थे। इसमें केंद्र शासित प्रदेशों और विदेशों में स्थित भारतीय मिशनों के कर्मचारी भी शामिल हैं। वहीं, सरकार में 40 लाख से अधिक पद स्वीकृत थे। यह आंकड़ा केवल स्थायी कर्मचारियों का है, इसमें संविदा कर्मचारियों और कंसल्टेंट्स को शामिल नहीं किया गया है। सरकार ने 2023-24 में इन कर्मचारियों के वेतन पर 2.95 लाख करोड़ रुपये खर्च किए, जिसका 80% से अधिक हिस्सा रक्षा, रेलवे, डाक सेवाओं और गृह मामलों पर खर्च हुआ।
हालांकि, केंद्र और राज्य सरकारों के सभी कर्मचारियों का सटीक आंकड़ा उपलब्ध नहीं है, फिर भी अनुमान के मुताबिक देश में सरकारी कर्मचारियों की संख्या 1.5 करोड़ से अधिक है। इसमें नागरिक प्रशासन, सशस्त्र बल, पुलिस, स्वास्थ्यकर्मी, शिक्षक और अन्य कर्मचारी शामिल हैं।
आइए सबसे पहले केंद्र सरकार में भर्ती प्रक्रिया को समझें।
केंद्र सरकार में भर्ती कैसे होती है?
केंद्र सरकार की भर्तियां संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रक्षा मंत्रालय (सेना, नौसेना और वायु सेना सहित), रेल मंत्रालय, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (PSUs) और विश्वविद्यालयों जैसी एजेंसियों द्वारा की जाती हैं। हर साल कई करोड़ लोग इन माध्यमों से केंद्र सरकार की सेवा में प्रवेश करने का प्रयास करते हैं। हालांकि, इनमें से केवल 1.20 लाख के करीब लोग ही हर साल चुने जाते हैं।
केंद्र सरकार में भर्ती के लिए नीतियां कौन बनाता है?
कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन मंत्रालय केंद्र सरकार के कर्मचारियों से जुड़े मामलों को देखता है। यह तय करता है कि सरकारी कर्मचारियों की भर्ती कैसे होगी, उनकी सेवा की शर्तें क्या होंगी और उन्हें दूसरे विभागों में कब भेजा जा सकता है। यह मंत्रालय अलग-अलग सरकारी विभागों को कर्मचारियों से जुड़े मामलों में सलाह भी देता है। इस मंत्रालय के तहत कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग (DoPT) केंद्र सरकार में भर्ती से जुड़ी नीतियां बनाता है और भर्ती प्रक्रिया पर नजर रखता है।
केंद्र सरकार में अधिकारियों की भर्ती के लिए संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) एक प्रमुख संस्था है। इसकी सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा सिविल सेवा परीक्षा (CSE) है, जिसके जरिए IAS, IPS समेत 19 सिविल सेवाओं के लिए अधिकारियों का चयन किया जाता है। आयोग की ज्यादातर परीक्षाएं तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार—में होती हैं। हालांकि, कुछ पदों पर भर्ती केवल साक्षात्कार के आधार पर भी की जाती है।
कर्मचारी चयन आयोग (SSC) की भूमिका
कर्मचारी चयन आयोग (SSC) केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों में ग्रुप B और ग्रुप C के ज्यादातर गैर-राजपत्रित पदों पर भर्ती करता है। इनमें क्लर्क, तकनीकी कर्मचारी, सहायक और अन्य प्रशासनिक एवं सपोर्ट स्टाफ के पद शामिल हैं।
SSC मंत्रालयों और विभागों की जरूरत के मुताबिक असिस्टेंट और लोअर डिवीजन क्लर्क (LDC) जैसे पदों पर भी भर्ती करता है।
UPSC की तरह SSC भी कई परीक्षाएं आयोजित करता है। इनमें कंबाइंड ग्रेजुएट लेवल (CGL) परीक्षा; कंबाइंड हायर सेकेंडरी लेवल (CHSL) परीक्षा; जूनियर इंजीनियर (JE) परीक्षा; दिल्ली पुलिस और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों में सब-इंस्पेक्टर परीक्षा; कंबाइंड हिंदी ट्रांसलेटर परीक्षा; स्टेनोग्राफर ग्रेड ‘C’ और ‘D’ परीक्षा; तथा मल्टी-टास्किंग (गैर-तकनीकी) स्टाफ और हवलदार परीक्षा शामिल हैं।
SSC ने 2024-25 में 20 परीक्षाएं आयोजित कीं, जिनमें कुल 2.05 करोड़ अभ्यर्थी शामिल हुए। इनमें सबसे बड़ी परीक्षा मल्टी-टास्किंग स्टाफ (MTS) और हवलदार भर्ती परीक्षा थी। इसमें 130 शहरों के 279 केंद्रों पर 55.99 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए, लेकिन चयन सिर्फ 83,857 का हुआ।
SSC की परीक्षाओं में महिला अभ्यर्थियों की संख्या भी काफी अधिक रही। 2024 में आयोजित 10 परीक्षाओं में कुल 1.85 करोड़ अभ्यर्थी शामिल हुए। इनमें 1.27 करोड़ महिलाएं, 57.69 लाख पुरुष और 149 ट्रांसजेंडर अभ्यर्थी थे।
केंद्र सरकार की ज्यादातर बड़ी भर्तियों के लिए न्यूनतम योग्यता स्नातक है। वहीं, कुछ निचले स्तर के पदों के लिए 12वीं पास होना पर्याप्त है।
पहले ग्रुप D में चपरासी जैसे पद भी होते थे, लेकिन अब इन्हें ग्रुप C में शामिल कर दिया गया है और इन पदों पर सीधे भर्ती नहीं होती। चपरासी और सफाईकर्मियों जैसे काम अब काफी हद तक हाउसकीपिंग कंपनियों को आउटसोर्स किए जा रहे हैं।
रेलवे: केंद्र सरकार का सबसे बड़ा नियोक्ता
रेलवे 12 लाख से ज्यादा कर्मचारियों के साथ केंद्र सरकार का सबसे बड़ा नियोक्ता है। रेलवे हर साल भर्ती कैलेंडर जारी करता है और देशभर में भर्ती परीक्षाएं आयोजित करता है।
संसद में दी गई जानकारी के अनुसार, 2014-15 से 30 जून 2026 तक रेलवे ने इन परीक्षाओं के जरिए 5.56 लाख लोगों की भर्ती की।
साल 2024 में रेलवे ने 92,116 खाली पदों को भरने के लिए 10 रोजगार अधिसूचनाएं जारी कीं। इनमें असिस्टेंट लोको पायलट, टेक्नीशियन, सब-इंस्पेक्टर, आरपीएफ कांस्टेबल, जूनियर इंजीनियर, पैरामेडिकल स्टाफ, क्लर्क और ट्रैक मेंटेनर जैसे कई पद शामिल थे। इन पदों के लिए हुई कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं (CBT) में 3.58 करोड़ अभ्यर्थी शामिल हुए। रेलवे ने 2025 में भर्ती के लिए 9 अधिसूचनाएं जारी की।
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की भूमिका
संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) मुख्य रूप से केंद्र सरकार में ग्रुप A और ग्रुप B के वरिष्ठ और मध्य स्तर के अधिकारियों की भर्ती करता है। इसके अलावा आयोग कुछ अन्य सरकारी पदों के लिए भी चयन प्रक्रिया आयोजित करता है।
2022-23 में UPSC ने 22 परीक्षाएं आयोजित कीं, जिनमें 25.70 लाख अभ्यर्थी शामिल हुए। इनमें से आयोग ने 7,999 अभ्यर्थियों की नियुक्ति की सिफारिश की। इनमें 6,074 उम्मीदवार विभिन्न सिविल सेवाओं के लिए और 1,925 उम्मीदवार रक्षा सेवाओं के लिए चुने गए। सिविल सेवाओं के आंकड़े में आरक्षित सूची के 134 उम्मीदवार भी शामिल हैं।
राज्य सरकारों में क्या व्यवस्था है?
अखिल भारतीय सेवाओं की व्यवस्था में राज्य सेवाओं के अधिकारी भी एक निश्चित अवधि की सेवा पूरी करने के बाद IAS, IPS या भारतीय वन सेवा (IFoS) में पदोन्नत हो सकते हैं। राज्य स्तर पर IAS, IPS और PCS/PPS अधिकारी मिलकर प्रशासन और कानून-व्यवस्था से जुड़े काम संभालते हैं।
UPSC की तरह राज्य लोक सेवा आयोग भी आमतौर पर भर्ती के लिए तीन चरणों—प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार—का पालन करते हैं। हालांकि, कई राज्यों में समय-समय पर भर्ती को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। झारखंड इसका हालिया उदाहरण है।
मोटे अनुमान के मुताबिक, देश के सभी राज्य लोक सेवा आयोग मिलकर हर साल करीब 25,000 से 30,000 उम्मीदवारों की भर्ती की सिफारिश करते हैं।
राज्य सरकारों के कर्मचारियों की कुल संख्या का कोई एकीकृत आंकड़ा उपलब्ध नहीं है। उदाहरण के लिए, उत्तर प्रदेश में करीब 16.35 लाख सरकारी कर्मचारी हैं, जिनमें लगभग 4 लाख पुलिसकर्मी शामिल हैं। तमिलनाडु में करीब 12 लाख, केरल में 5.5 लाख, ओडिशा में 4 लाख और जम्मू-कश्मीर में करीब 4.5 लाख राज्य कर्मचारी हैं।
वहीं, पश्चिम बंगाल सरकार ने हाल ही में खाली पदों को भरने के लिए करीब 1 लाख कर्मचारियों की भर्ती करने का ऐलान किया है।
राज्य अधीनस्थ चयन आयोग (Subordinate Selection Commissions)
चूंकि अधिकांश सरकारी कर्मचारी ग्रुप C में हैं, इसलिए पुलिस कांस्टेबल और सब-इंस्पेक्टर सहित ऐसे कई पद राज्य कर्मचारी चयन आयोगों, अधीनस्थ चयन आयोगों और पुलिस भर्ती बोर्डों जैसे अलग भर्ती निकायों के माध्यम से भरे जाते हैं।
इन परीक्षाओं को आयोजित करना एक बड़ी चुनौती है क्योंकि पेपर लीक एक बड़ी समस्या बन चुका है। लेकिन निजी क्षेत्र में नौकरियों की कमी से जूझ रहे कई युवाओं के लिए यह एकमात्र विकल्प भी है। कुछ साल पहले, उत्तर प्रदेश में 60,244 पुलिस कांस्टेबल पदों के लिए 48 लाख से अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था—यानी प्रत्येक पद के लिए 80 दावेदार।
सरकारी नौकरी के प्रति आकर्षण के पीछे क्या है?
सरकारी नौकरी मिलने की संभावना कम होने के बावजूद देश के लाखों युवा प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में सालों लगा देते हैं। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह युवा बेरोजगारी और अच्छी नौकरियों की कमी है।
सरकारी नौकरी मिलने से सिर्फ व्यक्ति ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार की आर्थिक और सामाजिक स्थिति बेहतर हो सकती है। इसके अलावा सरकारी नौकरी में कई ऐसी सुविधाएं हैं, जो इसे युवाओं के लिए आकर्षक बनाती हैं।
सबसे बड़ी वजह नौकरी की सुरक्षा है। प्रोबेशन पूरा होने के बाद नौकरी आमतौर पर सेवानिवृत्ति तक सुरक्षित रहती है। हालांकि, कुछ नियमों के तहत सरकार किसी कर्मचारी को समय से पहले सेवानिवृत कर सकती है, लेकिन ऐसा बहुत कम होता है।
कोरोना महामारी के दौरान सरकारी और निजी नौकरियों के बीच यह अंतर साफ दिखाई दिया। निजी कंपनियों में कई लोगों की नौकरी गई या वेतन में कटौती हुई, जबकि सरकारी कर्मचारियों को वेतन और भत्ते मिलते रहे।
सरकारी कर्मचारियों का वेतन वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर तय होता है। इसमें समय-समय पर वेतन बढ़ोतरी के साथ महंगाई भत्ता (DA) और दूसरी सुविधाएं भी मिलती हैं।
सेवानिवृति के बाद भी सरकारी कर्मचारियों को PF, ग्रेच्युटी और चिकित्सा जैसी सुविधाएं मिलती हैं। पुरानी पेंशन योजना (OPS) में जीवनभर पेंशन का प्रावधान था, जबकि मौजूदा व्यवस्था में भी सेवानिवृति के लिए वित्तीय सुरक्षा के कई विकल्प मौजूद हैं।
इसके अलावा, नौकरी और राज्य के नियमों के अनुसार रियायती आवास, परिवार के लिए इलाज, जीवन बिमा और बच्चों की पढ़ाई से जुड़े भत्ते जैसी सुविधाएं भी मिल सकती हैं। तय काम के घंटे और निजी क्षेत्र की तुलना में कम काम का दबाव भी सरकारी नौकरी को आकर्षक बनाता है। यही वजह है कि कई युवा सरकारी नौकरी को स्थिर और सुरक्षित करियर के रूप में देखते हैं।
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