भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के अध्यक्ष तुहिन कांत पांडे ने कहा है कि नए क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (CAS) तंत्र में किसी भी तरह की हेराफेरी से सख्ती से निपटा जाएगा। इसी मामले में, सेबी ने अंतरिम आदेश जारी कर मानसी शेयर एंड स्टॉक ब्रोकिंग और जेपी मॉर्गन के स्वामित्व वाली कॉपथॉल मॉरीशस इन्वेस्टमेंट नाम की दो संस्थाओं पर CAS प्रणाली में हेराफेरी करने का आरोप लगाया है।

अपनी तरह के इस पहले मामले में, SEBI ने दोनों संस्थाओं पर कुल 3.7 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया है और उन्हें बाजार में कारोबार करने से रोक दिया है। लेकिन इस कथित हेराफेरी का पता SEBI को कैसे चला? इसे समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि यह नई प्रणाली कैसे काम करती है।

क्लोजिंग ऑक्शन सेशन कैसे काम करता है?

CAS प्रणाली विशेष नीलामी प्रक्रिया है, जिसके तहत शेयरों की खरीद-बिक्री सामान्य ट्रेडिंग के रुकने के बाद की जाती है। 3:15 सामान्य ट्रेडिंग रुकने के बाद अगले पांच मिनट में शेयरों के लिए संदर्भ मूल्य (reference price) की गणना की जाती है। फिर 3:20 में नीलामी की प्रक्रिया शुरू होती है, जो 3:30 तक चलती है। हालांकि, अंतिम समय में किसी भी हेराफेरी से बचने के लिए एक्सचेंजों द्वारा 3:28 बजे से 3:30 बजे के बीच इसे बंद किया जा सकता है।

वर्तमान में, केवल वायदा और विकल्प (Futures and Options) शेयरों के लिए ही क्लोजिंग ऑक्शन होता है। बाकी शेयरों में 3:30 बजे तक सामान्य कारोबार जारी रहता है और उनकी क्लोजिंग प्राइस पारंपरिक वॉल्यूम-वेटेड एवरेज प्राइस (VWAP) पद्धति से तय की जाती है।

VWAP एक ऐसी पद्धति है, जिसमें किसी शेयर या इंडेक्स की क्लोजिंग प्राइस ट्रेडिंग सत्र के अंतिम 30 मिनट के दौरान हुई खरीद-बिक्री की कीमत और कारोबार की मात्रा को ध्यान में रखकर तय किया जाता है।

कीमतों में संदिग्ध उछाल

यह मामला तब सामने आया, जब सेबी के निगरानी तंत्र ने पाया कि 13 अगस्त को CAS सत्र के दौरान कुल 42 सेकंड की तीन अलग-अलग अवधि में सेंसेक्स का सांकेतिक मूल्य (Indicative Price) तेजी से बढ़ा। यह मूल्य बताता है कि CAS सत्र के अंत में इंडेक्स किस कीमत पर बंद हो सकता है।

जब सेबी ने खातों की जांच की, तो पाया कि इस उछाल के पीछे ‘कॉपथॉल’ नाम की कंपनी का हाथ था। जब-जब कीमत अचानक ऊपर गई, उस दौरान बाजार में जितनी भी भारी खरीदारी हो रही थी, उसमें से 85% से 99% तक अकेले कॉपथॉल की थी।

बड़े ऑर्डर दिए गए, जिनमें से अधिकांश रद्द कर दिए गए

इन ऑर्डरों में सेंसेक्स के लगभग सभी शेयरों को उनकी मौजूदा कीमत से करीब 3% ज्यादा कीमत पर खरीदा गया था। लेकिन जैसे ही सेंसेक्स ऊपर गया, इनमें से कई ऑर्डर वापस ले लिए गए। इससे कॉपथॉल को फायदा हुआ, क्योंकि उसने सेंसेक्स के ऊंचे स्तर पर बंद होने की उम्मीद में दांव लगाया था।

ये ऑर्डर लगभग सभी सेंसेक्स घटकों में संदर्भ मूल्य से ऊपर 3% की ऊपरी सीमा पर या उसके आसपास दिए गए थे, जो कि सेबी द्वारा तय की गई अंतिम सीमा है। सेंसेक्स की कीमत में उछाल आने के बाद इनमें से एक बड़ा हिस्सा रद्द कर दिया गया, जिससे कॉपथॉल को फायदा हुआ।

इसी दौरान, सेबी ने पाया कि मानसी नाम की ब्रोकिंग फर्म ने सेंसेक्स के कुछ चुनिंदा शेयरों को बेचने के लिए महज 5 मिनट के भीतर 145.65 करोड़ रुपये के बहुत बड़े ऑर्डर बाजार में डाल दिए। लेकिन उसने सिर्फ 3 सेकंड के भीतर ही इसे रद्द भी कर दिया। ऑर्डर के रद्द करने से सेंसेक्स का अनुमानित बंद भाव (IEP – Indicative Equilibrium Price) अचानक कम से कम 232.96 अंक नीचे गिर गया।

सेबी ने पाया कि कंपनी असल में कोई शेयर बेचना नहीं चाहती थी। उसने यह फर्जी बिकवाली सिर्फ इसलिए दिखाई थी ताकि सेंसेक्स की कीमत को जानबूझकर कम से कम 232.96 अंक नीचे रखा जा सके, क्योंकि कंपनी ने उस दिन ऐसे दांव लगा रखे थे, जिनसे सेंसेक्स का भाव जितना नीचे बंद होता, उसको उतना ही ज्यादा मुनाफा होता।

एक घरेलू ब्रोकिंग फर्म के ट्रेडर ने इस चालाकी को समझाते हुए कहा, “अगर आप इतने बड़े ऑर्डर डालते हैं और फिर तुरंत कुछ ही सेकंड में उन्हें रद्द कर देते हैं, तो साफ है कि आपकी नीयत ठीक नहीं है। इसका सीधा मकसद भारी लेन-देन का दिखावा करके कीमतों को अपनी मर्जी से ऊपर-नीचे करना और बाजार पर अपना कब्जा जमाना है। सेबी ने इसी तरह की बाजार की हेराफेरी के खिलाफ सख्त चेतावनी दी है।”

जांच में सेबी ने पाया कि इस चालाकी से कॉपथॉल ने 2.96 करोड़ रुपये और मानसी ने 71.64 लाख रुपये का अवैध मुनाफा कमाया। हालांकि, नियामक ने यह नहीं कहा कि इन दोनों कंपनियों ने आपस में मिलकर या सांठगांठ करके यह हेराफेरी की थी।

अपने आदेश में सेबी के पूर्णकालिक सदस्य कमलेश चंद्र वार्ष्णेय ने ऐसी हेराफेरी पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, “क्लोजिंग ऑक्शन में सही कीमतें तय होने की प्रक्रिया से खिलवाड़ या किसी भी तरह की धोखाधड़ी से सख्ती से निपटा जाएगा। अगर इस तरह की चालबाजी को बढ़ावा मिला या बाकी खिलाड़ियों ने भी इसे दोहराना शुरू कर दिया, तो इससे न सिर्फ इस नई व्यवस्था पर लोगों का भरोसा टूटेगा, बल्कि शेयर बाजार का पूरा कामकाज भी बुरी तरह ठप हो जाएगा।”

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