Gen Z और युवा उपभोक्ताओं के बीच कॉन्सर्ट, यात्रा और लाइफस्टाइल अनुभवों पर खर्च तेजी से बढ़ रहा है, और इसके लिए क्रेडिट कार्ड तथा ‘बाय नाउ, पे लेटर’ जैसे विकल्पों का इस्तेमाल भी बढ़ता दिख रहा है। जून में मुंबई की दो लड़कियां अपनी मां के साथ दक्षिण कोरिया के बुसान शहर में BTS कॉन्सर्ट देखने गईं, जहां यात्रा और इवेंट से जुड़े खर्च का बड़ा हिस्सा क्रेडिट कार्ड से चुकाया गया।

इसी तरह, पिछले साल एक युवा जोड़ा छुट्टियां मनाने थाईलैंड गया और क्रेडिट कार्ड के जरिए अपने तय बजट से कहीं अधिक खर्च कर बैठा। Reddit पर साझा एक पर्सनल फाइनेंस पोस्ट के मुताबिक, बाद में वे नकदी प्रवाह बनाए रखने के लिए थर्ड-पार्टी वेंडर्स के जरिए पैसे घुमाने लगे। यह पोस्ट कर्ज लेकर छोटी-मोटी विलासिता की चीजों पर खर्च करने के खतरे के बारे में चेतावनी देती है।

हालांकि हाल के वर्षों में भारत में परिवारों पर कर्ज तेजी से बढ़ा है, लेकिन फाइनेंशियल सेक्टर के रेगुलेटर्स इस कर्ज की बनावट को लेकर खास तौर पर चिंतित हैं। नॉन-हाउसिंग रिटेल लोन (जिनका इस्तेमाल अधिकतर उपभोग के लिए किया जाता है) अब परिवारों के कुल कर्ज का आधे से ज्यादा हिस्सा हैं। ये लोन हाउसिंग, एग्रीकल्चर और बिजनेस लोन की तुलना में तेजी से बढ़े हैं। पॉलिसी बनाने वालों के बीच हुई अंदरूनी चर्चाओं में इस ट्रेंड की ओर इशारा किया गया है।

मार्च 2026 तक, नॉन-हाउसिंग रिटेल लोन (मुख्य रूप से उपभोग वाले हिस्से में) परिवारों के कुल कर्ज का 58.4% थे, जो मार्च 2025 में कुल घरेलू कर्ज का 54.9% थे। वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, प्रति उधारकर्ता औसत बकाया कर्ज मार्च 2018 के अंत में 3.41 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर मार्च 2025 के अंत में 4.78 लाख करोड़ रुपये हो गया।

पर्सनल लोन की कुछ श्रेणियों में सबसे ज़्यादा बढ़ोतरी देखी गई है। सोने के गहनों के बदले लिए गए बकाया लोन मार्च 2022 में 74,738 करोड़ रुपये से बढ़कर मार्च 2026 में 4.61 लाख करोड़ रुपये हो गए, जबकि अन्य पर्सनल लोन का बकाया मार्च 2022 में 9.02 लाख करोड़ रुपये की तुलना में मार्च 2026 में 17.32 लाख करोड़ रुपये था। सोमवार को संसद में साझा किए गए आंकड़ों से यह जानकारी मिली।

हालांकि घरेलू लोन से भारतीय फाइनेंशियल सिस्टम को होने वाले जोखिम अभी भी सीमित हैं, लेकिन भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने घरेलू कर्ज के बढ़ने, खासकर कम रेटिंग वाले उधारकर्ताओं के बीच, पर चिंता जताई है और कहा है कि इस पर “बारीकी से नज़र रखने” की जरूरत है।

मार्च 2026 के आखिर में, सिक्योर्ड रिटेल लोन में ग्रॉस NPA रेश्यो 0.7% और अनसिक्योर्ड रिटेल लोन में 1.7% था। RBI ने अपनी हालिया फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट में कहा था कि “इन सेक्टर में एक्सपोज़र पर कड़ी नज़र रखने की ज़रूरत है क्योंकि एसेट क्वालिटी से जुड़े जोखिम बढ़ सकते हैं, खासकर अगर वेस्ट एशिया में संघर्ष के कारण आर्थिक हालात खराब होते हैं और उधार लेने वालों के कैश फ्लो पर असर पड़ता है”।

अनसिक्योर्ड पर्सनल लोन एक खास जोखिम वाला क्षेत्र बना हुआ है: 50,000 रुपये से कम के छोटे पर्सनल लोन सेगमेंट में, फिनटेक कंपनियों ने 41.6% की जबरदस्त क्रेडिट बढ़ोतरी के बाद 56.8% मार्केट शेयर हासिल किया है, जो पूरे सेगमेंट की 20.1% की ग्रोथ से कहीं ज्यादा है।

मार्च 2026 तक डिफॉल्ट या पेमेंट में देरी (डेलिंक्वेंसी) का आंकड़ा 6.4% था। फिनटेक लोन बुक का लगभग 70.5% हिस्सा अनसिक्योर्ड है और इनमें से लगभग आधे लोन 35 साल से कम उम्र के लोगों को दिए गए हैं।

CIBIL TransUnion के हालिया डेटा के अनुसार, भारत की क्रेडिट के लिए योग्य आबादी में से क्रेडिट-एक्टिव लोगों का हिस्सा एक दशक पहले के 11% से बढ़कर अब लगभग 28% हो गया है। क्रेडिट के लिए योग्य 89 करोड़ लोगों में से लगभग एक-तिहाई ने पिछले साल लोन लिया है, या उनका लोन चल रहा है, या वे EMI या क्रेडिट कार्ड बिल चुका रहे हैं।

इस क्रेडिट-एक्टिव आबादी में से लगभग आधे लोगों के पास कंजम्पशन लोन जैसे क्रेडिट कार्ड, पर्सनल लोन या कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन है, जबकि लगभग 10% लोगों के पास एंटरप्रेन्योरियल लोन या बिज़नेस-ओरिएंटेड लोन है। TransUnion CIBIL डेटा से पता चला है कि 2017 और 2024 के बीच कंजम्पशन लोन और बिज़नेस लोन लेने वाले क्रेडिट-एक्टिव ग्राहकों की संख्या में क्रमशः चार गुना और दस गुना बढ़ोतरी हुई है। कंजम्पशन के लिए लोन लेने में युवा ग्राहकों, जिनमें Gen Z भी शामिल हैं, की बड़ी भूमिका रही है; अक्सर इन लोन का रीपेमेंट समय तीन साल से कम होता है।

जनसत्ता के सहयोगी द इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक एक क्रेडिट ब्यूरो के अधिकारी ने कहा, “हमें लगातार इस बात पर नजर रखनी होगी कि क्रेडिट ग्रोथ को बढ़ावा देते समय, क्या हम जरूरत-आधारित क्रेडिट को भी बढ़ावा दे रहे हैं। दूसरी बात है भुगतान करने की क्षमता, खासकर युवा उधारकर्ताओं जैसे कुछ वर्गों में, जहां कर्ज का बोझ बढ़ गया है। उदाहरण के लिए, कंजम्पशन लोन (खपत के लिए लिए गए लोन) के मामले में, कर्ज देने वाला शायद पूरी तरह से आय की जानकारी की पुष्टि न कर पाए और यह न जान पाए कि बढ़े हुए कर्ज के बोझ के कारण उपभोक्ता भुगतान करने की स्थिति में है या नहीं।”

बहुत ज्यादा कर्ज वाले उपभोक्ताओं की हिस्सेदारी तीन गुना बढ़ गई। FY17 में 5% से बढ़कर FY24 में 18% हो गई और फिर इंडस्ट्री के दखल के बाद FY26 में थोड़ी कम होकर 15% पर आ गई; इसमें ज़्यादातर कर्ज युवा उपभोक्ताओं ने लिया था। देश के क्रेडिट-एक्टिव बेस में उनकी हिस्सेदारी 2017 में 33% से बढ़कर 2026 में 39% हो गई है।

भले ही बिना गारंटी वाले रिटेल लोन की रफ़्तार धीमी हुई है (जो रिटेल लोन का 25% और कुल एडवांस का 8.3% है) लेकिन कुल रिटेल पोर्टफोलियो की तुलना में इसकी एसेट क्वालिटी कमजोर हुई है। इसका ग्रॉस नॉन-परफॉर्मिंग एसेट (GNPA) रेश्यो 1.8% रहा, जबकि मार्च 2025 में यह 1.2% था; प्राइवेट सेक्टर के बैंकों में यह दबाव खास तौर पर देखा गया।

यह ट्रेंड बताता है कि लोग एसेट बनाने के बजाय तुरंत इस्तेमाल होने वाली चीज़ों के लिए कर्ज़ लेने की ओर ज़्यादा बढ़ रहे हैं। RBI के रजिस्टर्ड क्रेडिट ब्यूरो, CRIF High Mark के डेटा के मुताबिक, पिछले फाइनेंशियल ईयर में क्रेडिट कार्ड का बकाया कर्ज 3 लाख करोड़ रुपये से ज़्यादा हो गया, जबकि पेमेंट में देरी (90 से 360 दिनों के बीच बकाया पेमेंट) सालाना आधार पर 40% से ज़्यादा बढ़ गई।

एक अर्थशास्त्री ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “पॉलिसी बनाने वालों और बैंकिंग सेक्टर के बीच बातचीत में खर्च के लिए क्रेडिट ग्रोथ बढ़ने का मुद्दा बार-बार उठता रहा है। 2022 और 2023 में इस पर खास तौर पर चिंता जताई गई थी। अभी भी बढ़ती संख्या को देखते हुए इसे चिंता का विषय माना जाता है। लेकिन चूंकि इसमें शामिल रकम अपेक्षाकृत कम है, इसलिए इसके पैमाने को अभी चिंताजनक नहीं माना जा रहा है।”

कॉन्सर्ट, छुट्टियों में घूमना-फिरना

बैंक ऑफ बड़ौदा के अर्थशास्त्रियों दीपान्विता मजूमदार और जाह्नवी प्रभाकर के अनुमानों के मुताबिक, पिछले 24 महीनों में म्यूज़िक कॉन्सर्ट की वजह से ₹1,600-2,000 करोड़ का खर्च हुआ हो सकता है। कॉन्सर्ट में जाने वालों में एक बड़ा हिस्सा Gen Z कंज्यूमर्स का है और कुछ मामलों में खर्च के लिए कई क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल किया गया।

Airbnb की जनवरी 2026 की ‘एक्सपीरियंस-लेड ट्रैवल इनसाइट्स’ रिपोर्ट में भी Gen Z के बीच म्यूज़िक से जुड़े ट्रेंड पर ज़ोर दिया गया। इसमें पाया गया कि 62% लोगों ने इस साल कॉन्सर्ट और म्यूज़िक फेस्टिवल के लिए यात्रा करने की योजना बनाई थी, जबकि 76% ने कहा कि वे ऐसे इवेंट में शामिल होने के लिए पहली बार किसी शहर में गए थे।

लोगों ने इवेंट से जुड़ी अपनी हालिया यात्रा पर ₹51,000 खर्च किए। 10 में से 6 युवा यात्री अपनी मासिक आय का 21-40% हिस्सा म्यूज़िक से जुड़ी यात्रा और अनुभवों पर खर्च करने को तैयार थे, जबकि 10 में से 1 व्यक्ति अपनी आय का आधा हिस्सा तक खर्च करने को तैयार था।

कंज्यूमर अपनी जीवनशैली से जुड़ी खरीदारी और अनुभवों के लिए बचत के बजाय क्रेडिट का इस्तेमाल भी तेज़ी से कर रहे हैं।

मुथूट फाइनेंस की रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 की पहली छमाही में भारत में लिए गए पर्सनल लोन में से 25% से ज़्यादा यात्रा के लिए थे। यह मिलेनियल्स और Gen Z के बीच “अभी जियो, बाद में भुगतान करो” (live now, pay later) वाले नजरिए की ओर एक बड़े बदलाव को दिखाता है।

पैसाबाज़ार के एक एनालिसिस से पता चला कि युवा पीढ़ियां कितनी जल्दी क्रेडिट सिस्टम में शामिल हो रही हैं। 1960 और 70 के दशक में लोग आम तौर पर 30 के दशक के आखिर या 40 के दशक की शुरुआत में अपना पहला लोन लेते थे, जो अक्सर होम या ऑटो लोन जैसे सिक्योर्ड लोन होते थे। 1990 के दशक में पैदा हुए लोग आम तौर पर 20 के दशक के बीच में क्रेडिट कार्ड, पर्सनल लोन या कंज्यूमर ड्यूरेबल लोन के ज़रिए क्रेडिट सिस्टम से जुड़ते थे।

2000 के बाद जन्मे युवा (Gen Z) पहले की पीढ़ियों की तुलना में बहुत कम उम्र में कर्ज लेना शुरू कर रहे हैं। वे अक्सर 22 साल के आसपास ही छोटे पर्सनल लोन, मोबाइल/गैजेट EMI, क्रेडिट कार्ड और Buy Now, Pay Later (BNPL) जैसे विकल्पों का इस्तेमाल करने लगते हैं।

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आपने कभी Zepto, Instamart या Blinkit से 10-15 मिनट में दूध, ब्रेड या किराने का सामान मंगाया है, तो आपके मन में भी सवाल जरूर आया होगा कि इतनी तेज डिलीवरी देने वाली कंपनियां आखिर कमाई कैसे करती हैं? ये कंपनियां कई बार भारी डिस्काउंट भी देती हैं, ऐसे में लगता है कि इन्हें फायदा कैसे होता होगा।

असल में क्विक कॉमर्स का बिजनेस मॉडल सिर्फ सामान बेचने तक सीमित नहीं है। कंपनियों की कमाई कई अलग-अलग स्रोतों से होती है। आइए जानते हैं इसके बारे में…