विदेशी फंडिंग (Foreign Funding) को लेकर केंद्र सरकार संसद के मानसून सत्र में विदेशी अंशदान (विनियमन) संशोधन विधेयक, 2026 (FCRA Amendment Bill) को पारित कराने की तैयारी में है। सरकार का कहना है कि बदलते वैश्विक माहौल में विदेशी धन के जरिए लोकतांत्रिक संस्थाओं, चुनावी प्रक्रिया और सार्वजनिक विमर्श को प्रभावित करने की आशंकाएं बढ़ी हैं। इसलिए मौजूदा कानून को और प्रभावी बनाने की जरूरत है।

सरकार साफ कर चुकी है कि यह विधेयक विदेशी फंडिंग पर रोक लगाने के लिए नहीं है। उसका दावा है कि इसका उद्देश्य विदेश से आने वाले पैसे के स्रोत और उसके इस्तेमाल को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और राष्ट्रीय हितों के अनुरूप बनाना है।

तो आखिर FCRA क्या है? सरकार इसे बदलना क्यों चाहती है? अभी क्या नियम हैं और नए बिल के लागू होने के बाद क्या बदल जाएगा? आइए आसान भाषा में समझते हैं इसके बारे में विस्तार से…

आखिर सरकार इतनी सख्ती क्यों कर रही है?

यह सवाल अक्सर उठता है कि समाजसेवा, शिक्षा, स्वास्थ्य और राहत कार्य करने वाले NGOs तथा अन्य गैर-लाभकारी संगठनों पर सरकार लगातार सख्ती क्यों बढ़ा रही है। केंद्र सरकार का तर्क है कि पिछले कुछ सालो में सुरक्षा एजेंसियं के इनपुट, विदेशी फंडिंग के बढ़ते दायरे और दुनिया के कई देशों में विदेशी प्रभाव (Foreign Influence) को लेकर बढ़ी चिंताओं ने निगरानी को जरूरी बना दिया है।

गृह मंत्रालय के मुताबिक, 2012 में 52159 संस्थाएं FCRA के तहत पंजीकृत थीं लेकिन समय के साथ नियमों के उल्लंघन, रिन्यू ना होने और अन्य कारणों से बड़ी संख्या में लाइसेंस खत्म या रद्द हुए। वर्तमान में करीब 14455 संस्थाओं के पास ही सक्रिय FCRA लाइसेंस है।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इन संस्थाओं को हर साल लगभग 22 हजार करोड़ रुपये का विदेशी योगदान मिलता है। वहीं 2019-20 से 2021-22 के बीच 13500 से ज्यादा संस्थाओं को कुल 55700 करोड़ रुपये से ज्यादा की विदेशी फंडिंग मिली।

सरकार का कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में आने वाले विदेशी धन का इस्तेमाल पूरी तरह घोषित उद्देश्यों के अनुरूप और पारदर्शी होना चाहिए। इसी वजह से विदेशी फंडिंग की निगरानी और जवाबदेही को और मजबूत करने के लिए संशोधन लाया जा रहा है।

FCRA क्या है?

FCRA (Foreign Contribution Regulation Act) वह कानून है जो तय करता है कि भारत में कौन विदेशी चंदा ले सकता है, कितना ले सकता है और उसका इस्तेमाल किस उद्देश्य के लिए किया जा सकता है।

इस कानून का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि विदेश से आने वाला पैसा भारत की संप्रभुता, राष्ट्रीय सुरक्षा, लोकतांत्रिक व्यवस्था, चुनावी प्रक्रिया और सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित ना करे।

FCRA कानून कब बना?

1976: पहली बार FCRA कानून लागू किया गया।
2010: पुराने कानून की जगह नया FCRA Act, 2010 लागू हुआ।
2020: कानून में बड़े संशोधन किए गए।
2026: अब सरकार एक और संशोधन विधेयक लेकर आई है जिस पर मानसून सत्र में चर्चा होनी है।

विदेशी चंदा (Foreign Contribution) क्या होता है?

विदेशी सरकार, विदेशी कंपनी, विदेशी ट्रस्ट, अंतरराष्ट्रीय संस्था या विदेश में रहने वाले किसी व्यक्ति से मिलने वाला पैसा, सामान, सिक्योरिटीज़ या अन्य आर्थिक सहायता विदेशी अंशदान (Foreign Contribution) कहलाती है।

कौन FCRA के तहत रजिस्ट्रेशन करा सकता है?

ऐसी गैर-लाभकारी संस्थाएं (Not-for-Profit Organisations) (जो समाजसेवा या सार्वजनिक हित के क्षेत्र में काम करती हैं) FCRA के तहत पंजीकरण करा सकती हैं।

-NGO
-ट्रस्ट
-सोसायटी
-सेक्शन-8 कंपनी
-धार्मिक एवं चैरिटेबल संस्थाएं
-शैक्षणिक संस्थान
-सामाजिक और सांस्कृतिक संगठन

रजिस्ट्रेशन मिलने के बाद संस्था विदेशी फंड प्राप्त कर सकती है। यह रजिस्ट्रेशन 5 साल के लिए वैध होता है जिसके बाद नवीनीकरण कराना होता है।

किन लोगों को विदेशी चंदा लेने की अनुमति नहीं है?

FCRA के तहत कुछ श्रेणियों पर पहले से रोक है। इनमें शामिल हैं…

-सांसद और विधायक
-चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवार
-राजनीतिक दल
-न्यायाधीश
-सरकारी कर्मचारी
-चुनाव आयुक्त
-समाचार एवं करंट अफेयर्स से जुड़े कुछ मीडिया संस्थान और उनके मालिक/संपादक (कानून में निर्धारित श्रेणियां)

इन प्रतिबंधों का उद्देश्य लोकतांत्रिक संस्थाओं को विदेशी प्रभाव से बचाना है।

FCRA में अभी तक क्या नियम थे?

मौजूदा कानून के तहत जरूरी नियम:

-विदेशी फंड लेने के लिए FCRA रजिस्ट्रेशन या Prior Permission जरूरी है।
-विदेशी फंड केवल अधिकृत बैंक खाते में ही प्राप्त किया जा सकता है।
-हर साल सरकार को विदेशी फंड के उपयोग का पूरा हिसाब देना होता है।
-नियमों के उल्लंघन पर रजिस्ट्रेशन निलंबित या रद्द किया जा सकता है।
-2020 में क्या बड़े बदलाव हुए थे?
-प्रशासनिक खर्च की सीमा 50% से घटाकर 20% कर दी गई।
-एक NGO से दूसरे NGO को विदेशी फंड ट्रांसफर करने पर रोक लगा दी गई।
-सभी संस्थाओं के लिए SBI की नई दिल्ली मुख्य शाखा में FCRA खाता खोलना अनिवार्य किया गया।
-आधार पहचान से जुड़े प्रावधान जोड़े गए।

सरकार नया संशोधन क्यों ला रही है?

गृह मंत्रालय (MHA) का कहना है कि दुनिया के कई देशों ने विदेशी प्रभाव को लेकर अपने कानून सख्त किए हैं। मंत्रालय ने इसके लिए कई उदाहरण दिए हैं:

-अमेरिका का Foreign Agents Registration Act (FARA), जहां विदेशी सरकार या संस्था की ओर से राजनीतिक गतिविधियां करने वालों को रजिस्ट्रेशन कराना पड़ता है।
-ब्रिटेन की Foreign Influence Registration Scheme, जहां नियम तोड़ने पर जेल तक का प्रावधान है।
-यूरोपीय संघ (EU) भी विदेशी लॉबिंग को अधिक पारदर्शी बनाने की दिशा में कदम उठा रहा है।

सरकार का कहना है कि भारत को भी वैश्विक मानकों के अनुरूप अपने कानून को अपडेट करना जरूरी है।

नए विधेयक में क्या बदलने जा रहा है?

FCRA संशोधन विधेयक का सबसे अहम उद्देश्य विदेशी फंडिंग से जुड़े नियमों को और स्पष्ट तथा प्रभावी बनाना है। सरकार का कहना है कि मौजूदा कानून में कुछ ऐसे प्रावधान हैं जिनमें बदलाव की जरूरत महसूस की गई ताकि विदेशी अंशदान के इस्तेमाल पर निगरानी और जवाबदेही को और मजबूत किया जा सके। प्रस्तावित संशोधनों में सबसे बड़ा बदलाव उन संस्थाओं से जुड़ा है जिनका FCRA रजिस्ट्रेशन किसी वजह से पूरा हो जाता है।

अगर किसी संस्था का FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया जाता है, संस्था स्वयं अपना लाइसेंस सरेंडर कर देती है या समय पर रिन्यू नहीं होने के कारण उसका रजिस्ट्रेशन खत्म हो जाता है तो ऐसी स्थिति में विदेशी फंड से बनाई गई या खरीदी गई संपत्तियां सरकार द्वारा नामित ‘डिज़िग्नेटेड अथॉरिटी (Designated Authority)’ की निगरानी में चली जाएंगी। मौजूदा कानून में इस तरह की संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर स्पष्ट व्यवस्था नहीं थी जिसे अब इस संशोधन के जरिए स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है।

हालांकि, सरकार ने यह भी प्रावधान रखा है कि यदि बाद में संबंधित संस्था का FCRA पंजीकरण दोबारा बहाल हो जाता है तो तय नियमों और शर्तों के तहत उसकी संपत्तियां या बची हुई धनराशि उसे वापस दी जा सकेगी। यानी यह व्यवस्था स्थायी रूप से संपत्ति जब्त करने के लिए नहीं बल्कि रजिस्ट्रेशन की स्थिति स्पष्ट होने तक उसके संरक्षण और प्रबंधन के लिए बनाई गई है।

इसके अलावा, सरकार विदेशी फंड के स्रोत, उसके इस्तेमाल और उससे जुड़े रिकॉर्ड की निगरानी को और मजबूत करना चाहती है। इसके लिए रिपोर्टिंग और अनुपालन (Compliance) की प्रक्रिया को ज्यादा प्रभावी बनाया जाएगा ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि विदेश से प्राप्त धन का इस्तेमाल उसी उद्देश्य के लिए हो जिसके लिए उसे मंजूरी दी गई थी।

क्या सरकार विदेशी फंडिंग पर रोक लगा रही है?

इस संशोधन को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या सरकार अब NGOs और अन्य संस्थाओं के लिए विदेशी फंडिंग बंद करने जा रही है। गृह मंत्रालय ने इस धारणा को स्पष्ट रूप से खारिज किया है।

मंत्रालय का कहना है कि FCRA का उद्देश्य विदेशी चंदे पर प्रतिबंध लगाना नहीं बल्कि उसे पारदर्शी और जवाबदेह बनाना है। सरकार का दावा है कि यदि कोई संस्था कानून के तहत निर्धारित नियमों का पालन करती है तो उसे विदेशी फंड प्राप्त करने में कोई बाधा नहीं होगी।

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में लगभग 16200 संस्थाएं FCRA के तहत सक्रिय रूप से पंजीकृत थीं जिन्हें विदेशी योगदान के रूप में 22963 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। सरकार का कहना है कि यह आंकड़ा स्वयं बताता है कि कानून विदेशी फंडिंग को रोकने के लिए नहीं बल्कि उसके नियमन (Regulation) के लिए बनाया गया है।

क्या धार्मिक और सामाजिक संस्थाओं पर असर पड़ेगा?

गृह मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित संशोधन किसी धर्म, समुदाय या विशेष विचारधारा को निशाना बनाने के लिए नहीं है। मंत्रालय के अनुसार, धार्मिक, सामाजिक, शैक्षणिक और चैरिटेबल गतिविधियों में लगी संस्थाएं पहले की तरह विदेशी फंड प्राप्त कर सकेंगी बशर्ते वे FCRA के सभी नियमों और शर्तों का पालन करें।

सरकार का कहना है कि इन संशोधनों का मकसद केवल यह सुनिश्चित करना है कि विदेश से आने वाला धन अपने घोषित उद्देश्य के लिए ही इस्तेमाल हो और उसका इस्तेमाल किसी ऐसी गतिविधि में ना हो जिससे राष्ट्रीय सुरक्षा, सार्वजनिक व्यवस्था, लोकतांत्रिक संस्थाओं या देश के व्यापक हितों पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका हो। इसी वजह से सरकार विदेशी फंडिंग की निगरानी व्यवस्था को और मजबूत करने पर जोर दे रही है।

FAQ: आपके सवाल, आसान जवाब
सवाल: क्या विदेशी चंदा लेना पूरी तरह बंद हो जाएगा?
जवाब: नहीं। विदेशी फंडिंग जारी रहेगी लेकिन निगरानी और नियमों का पालन पहले से अधिक सख्त हो सकता है।

सवाल: क्या सभी NGOs को दोबारा रजिस्ट्रेशन कराना होगा?
जवाब: नहीं। जिनके पास वैध FCRA रजिस्ट्रेशन है, वे पहले की तरह काम कर सकेंगे। हालांकि, संशोधन लागू होने के बाद नए प्रावधानों का पालन करना होगा।

सवाल: सबसे बड़ा बदलाव क्या माना जा रहा है?
जवाब: अगर किसी संस्था का FCRA रजिस्ट्रेशन समाप्त या रद्द हो जाता है, तो विदेशी फंड से बनी संपत्तियों के प्रबंधन के लिए Designated Authority का प्रावधान सबसे अहम बदलाव माना जा रहा है।

सवाल: क्या यह कानून सिर्फ NGOs पर लागू होगा?
जवाब: नहीं। यह उन सभी पात्र संस्थाओं पर लागू होगा जो विदेश से आर्थिक सहायता प्राप्त करती हैं और FCRA के दायरे में आती हैं।

आगे क्या होगा?
FCRA संशोधन विधेयक को मानसून सत्र में चर्चा और पारित करने के लिए सूचीबद्ध किया गया है। संसद से मंजूरी मिलने के बाद नए प्रावधान लागू होंगे।

सरकार इसे राष्ट्रीय सुरक्षा, पारदर्शिता और जवाबदेही को मजबूत करने वाला कदम बता रही है। वहीं विपक्ष और नागरिक समाज के कुछ संगठन इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि नए नियमों का असर संस्थाओं के कामकाज और विदेशी फंडिंग के ढांचे पर कितना व्यापक होगा।

अभी क्या नियम हैं?बिल पास होने के बाद क्या बदलेगा?
1. रजिस्ट्रेशन खत्म होने पर संपत्तियों की स्थिति
अब तक यदि किसी संस्था का FCRA पंजीकरण रद्द होता था या वह स्वयं सरेंडर करती थी, तो विदेशी फंड से बनी संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर सीमित प्रावधान थे।
रिन्यूअल न होने पर भी कार्रवाई
अगर किसी संस्था का FCRA पंजीकरण रद्द हो जाता है, समाप्त हो जाता है या समय पर नवीनीकरण नहीं होता, तो विदेशी अंशदान से बनाई गई संपत्तियां सरकार द्वारा नामित Designated Authority के नियंत्रण में चली जाएंगी। जरूरत पड़ने पर इनका प्रबंधन, हस्तांतरण या कानून के अनुसार निस्तारण किया जा सकेगा।
2. मिश्रित (Mixed) फंड से बनी संपत्तियां
मौजूदा कानून में विदेशी और घरेलू फंड से बनी संपत्तियों के प्रबंधन को लेकर स्पष्ट व्यवस्था नहीं थी।
स्पष्ट प्रावधान
अगर किसी संपत्ति के निर्माण में विदेशी और भारतीय दोनों स्रोतों का पैसा लगा है, तो ऐसी संपत्ति भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत Designated Authority के दायरे में आ सकती है। संस्था को अपने घरेलू फंड वाले हिस्से का दावा नियमों के अनुसार प्रस्तुत करना होगा।
3. विदेशी फंड के इस्तेमाल के नियमF
FCRA फंड निर्धारित बैंकिंग व्यवस्था के तहत प्राप्त किया जाता है।
फंड ट्रांसफर पर सख्ती
विदेशी अंशदान को एक FCRA पंजीकृत संस्था से दूसरी संस्था या व्यक्ति को स्थानांतरित (Sub-grant) करने पर रोक जारी रहेगी। सरकार का कहना है कि इससे फंड के अंतिम उपयोग पर निगरानी आसान होगी।
4. प्रशासनिक खर्च
2020 से पहले विदेशी फंड का 50% तक प्रशासनिक खर्च पर इस्तेमाल किया जा सकता था।
20% की सीमा जारी
प्रशासनिक खर्च की अधिकतम सीमा 20% ही रहेगी, ताकि विदेशी फंड का अधिकांश हिस्सा उसी परियोजना या सामाजिक कार्य पर खर्च हो, जिसके लिए वह प्राप्त हुआ है।
5. पदाधिकारियों की जवाबदेही
संस्था के प्रमुख पदाधिकारियों की पहचान संबंधी जानकारी देना पहले से आवश्यक है।
जवाबदेही और स्पष्ट
मुख्य पदाधिकारियों, ट्रस्टियों और निदेशकों की पहचान संबंधी दस्तावेज (भारतीय नागरिकों के लिए आधार, विदेशी नागरिकों के लिए पासपोर्ट/OCI) उपलब्ध कराने होंगे। संस्था के बंद होने या लाइसेंस समाप्त होने की स्थिति में भी नियमानुसार सूचना देनी होगी।
6. नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई
FCRA उल्लंघन पर जांच और दंड का प्रावधान पहले से मौजूद है।
जांच और दंड में बदलाव
कुछ मामलों में जांच शुरू करने से पहले केंद्र सरकार की मंजूरी का प्रावधान जोड़ा गया है। साथ ही, कुछ अपराधों में सजा और प्रक्रिया से जुड़े प्रावधानों में भी संशोधन का प्रस्ताव है।