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राज्यसभा में क्‍यों होते हैं नॉमिनेटेड सांसद और किसको किया जाता है नॉमिनेट, जानें सबकुछ

संविधान के प्रारूप को तैयार करने वाली कमेटी के सदस्य एन गोपालस्वामी आयंगर का मानना था कि ”हमें ऐसे लोगों को मौका देना चाहिए, जो राजनीति का हिस्सा नहीं हैं लेकिन देश के विकास में उनका योगदान बहुत खास रहा है। उनके ज्ञान और अनुभव से सदन को लाभ होगा।”

राज्यसभा का गठन 1952 में हुआ था (फोटो क्रेडिट- एक्सप्रेस आर्काइव)

सरकार ने बुधवार (6 जुलाई) को एथलीट पीटी उषा, संगीतकार इलैया राजा, समाजसेवी व आध्यात्मिक नेता वीरेंद्र हेगड़े और स्क्रीनराइटर वी. विजयेंद्र प्रसाद को राज्यसभा के लिए मनोनीत किया है। ऊपरी सदन में भेजे जा रहे इन चारों हस्तियों का दक्षिण भारत के चार अलग-अलग राज्य केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश से ताल्लुक है।

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राष्ट्रपति द्वारा नामित इन सभी सदस्यों का कार्यकाल जुलाई 2028 तक का होगा। इस तरह राज्यसभा में नामित सदस्यों की कुल संख्या 9 हो जाएगी। पहले पांच और सदस्यों को मनोनीत किया गया था, जिसमें वकील महेश जेठमलानी, नृत्यांगना सोनल मानसिंह, लेखक राकेश सिन्हा, भाजपा नेता राम शकल और पूर्व मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई शामिल हैं। राज्यसभा में नामित सदस्यों के लिए तीन सीटें अभी भी खाली हैं।

मनोनीत सदस्यों के बारे में संविधान क्या कहता है? : संविधान के अनुच्छेद 80 में राज्यसभा सदस्यों की अधिकतम संख्या 250 तय की गई है। इनमें से 12 सदस्य राष्ट्रपति द्वारा मनोनीत होते हैं। शेष 238 सदस्य संघ और राज्य के प्रतिनिधि चुनते हैं। राज्य की आबादी के हिसाब से सीटों की संख्या तय होती है। भारत के राज्य और केंद्र शासित प्रदेशों की आबादी की गणना के आधार पर सीटों की संख्या 233 ही पहुंची है। इसमें 12 नामित सदस्यों की संख्या जोड़ने पर राज्यसभा सदस्यों की कुल संख्या फिलहाल 245 हो पायी हैं। राज्यसभा द्वारा नामित 12 सदस्य ऐसे शख्स होते हैं, जिन्होंने साहित्य, विज्ञान, कला और समाज सेवा जैसे क्षेत्र में विशिष्ट योगदान दिया हो।

राज्यसभा का गठन 1952 में हुआ था। तब सरकार के वफादार 142 व्यक्तियों को इसके सदस्यों के रूप में नामित किया गया था। इसमें विद्वान, न्यायविद, शिक्षाविद, इतिहासकार, वैज्ञानिक, साहित्यकार, पत्रकार, इंजीनियर, अर्थशास्त्री, प्रशासक, कलाकार, खिलाड़ी, सामाजिक कार्यकर्ता और राजनेता शामिल थे।

मनोनीत सदस्य राज्यसभा में क्या करते हैं? : राज्यसभा के मनोनीत सदस्यों को वो सभी शक्तियां और सुविधाएं प्राप्त होती हैं, जो निर्वाचित सांसदों को मिलता है। वे सामान्य तरीके से सदन की कार्यवाही में भाग ले सकते हैं। हालांकि कई मनोनीत सदस्यों की इस बात के लिए आलोचना होती है कि वह सदन में अनुपस्थित रहते हैं और विधायी कार्यों में अधिक रुचि नहीं लेते। क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर, अभिनेत्री रेखा और व्यवसायी अनु आगा को इन्हीं वजहों से आलोचना झेलनी पड़ी थी। मनोनीत सदस्य राष्ट्रपति चुनाव में मतदान नहीं कर सकते, हालांकि उन्हें उपराष्ट्रपति के चुनाव में वोट देने का अधिकार होता है।

राज्यसभा के लिए सदस्यों को मनोनीत क्यों किया जाता है? : संविधान के प्रारूप को तैयार करने वाली कमेटी के सदस्य एन गोपालस्वामी आयंगर का मानना था कि ”हमें ऐसे लोगों को मौका देना चाहिए, जो राजनीति का हिस्सा नहीं हैं लेकिन देश के विकास में उनका योगदान बहुत खास रहा है। उनके ज्ञान और अनुभव से सदन को लाभ होगा।”

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