भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के ऑनलाइन वोटर रजिस्ट्रेशन पोर्टल ECINET में अब आवेदकों के लिए बदलाव किया गया है। नई वोटर लिस्ट के लिए जारी स्पेशल इंटेंसिव रिविज़न (SIR) में अपने माता-पिता की स्थिति का विवरण भी आवेदक को देना होगा। इसमें पोलिंग बूथ नंबर और उस रोल पर मतदाता का सीरियल नंबर भी शामिल है। हालांकि नए पंजीकरण के लिए कानूनी फॉर्म (Form 6) में अभी तक कानून द्वारा तय प्रक्रिया के तहत बदलाव नहीं किया गया है।
नई प्रक्रिया क्या है?
ECINET पर यूजर्स मतदाता पंजीकरण कर सकते हैं। साथ ही मौजूदा वोटर लिस्ट में बदलाव और नाम हटाने के लिए फॉर्म भी जमा कर सकते हैं। Form 6 रिप्रेजेंटेशन ऑफ़ द पीपल एक्ट, 1950 और रजिस्ट्रेशन ऑफ़ इलेक्टर्स रूल्स, 1960 के तहत मतदाता का पंजीकरण फॉर्म है। ये ऑनलाइन जमा करने के लिए उपलब्ध है। इसी फॉर्म के एक कॉलम में आवेदक से पूछा गया है कि क्या उनके माता-पिता पिछले SIR में शामिल थे। यह कॉलम ‘डिक्लेरेशन फॉर्म’ नाम के एक सेक्शन के तहत दिया है।
ऐसे में कॉलम में अगर हां भरते हैं, तो मतदाताओं को विधानसभा सीट नंबर, पोलिंग बूथ नंबर (पार्ट नंबर) और वो सीरियल नंबर देना होगा जिस पर उनके पिता या माता का नाम पिछले SIR में पंजीकृत था।
अभी तक चुनाव आयोग ने 10 राज्यों और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में SIR पूरा कर लिया है। वहीं SIR का काम अभी 19 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में जारी है। बिहार को छोड़कर सभी राज्यों में SIR पूरा हो चुका है या चल रहा है।
हालांकि चुनाव आयोग के ऑनलाइन फ़ॉर्म 6 जमा करने की प्रक्रिया में आवेदक को अपने माता-पिता के बारे में नया ‘डिक्लेरेशन फ़ॉर्म’ भरना होगा। अगर आवेदक के माता-पिता पिछले SIR में नहीं थे, तो उन्हें वह ऑप्शन चुनना होगा और अपने माता-पिता के नाम और वोटर आइडेंटिटी कार्ड (EPIC) नंबर (अगर उपलब्ध हों) देने होंगे।
कानून क्या कहता है?
संविधान का आर्टिकल 326, किसी विधानसभा सीट पर आम तौर पर रहने वाले सभी वयस्क नागरिकों को वोटर के तौर पर पंजीकृत करने का अधिकार देता है, जब तक कि कानून उन्हें डिसक्वालिफाई न कर दे।
रिप्रेजेंटेशन ऑफ़ द पीपल एक्ट, 1950 केंद्र को चुनाव कराने और वोटरों के रजिस्ट्रेशन के बारे में नियम बनाने का अधिकार देता है। RPA का सेक्शन 28, (जिसका टाइटल नियम बनाने की पावर है) कहता है कि एक्ट के तहत बनाया गया हर नियम बनने के बाद जितनी जल्दी हो सके, संसद के हर सदन के सामने रखा जाएगा। फॉर्म 6, रजिस्ट्रेशन ऑफ़ इलेक्टर्स रूल्स, 1960 का एक हिस्सा है, जो एक्ट से निकला है। EC के पुराने अधिकारियों ने नाम न बताने की शर्त पर बताया कि फॉर्म में किसी भी बदलाव के लिए कानून और न्याय मंत्रालय द्वारा एक संशोधन और गजट नोटिफिकेशन की जरूरत होगी।
क्या अभी तक कोई बदलाव हुआ है?
नहीं। कानून और न्याय मंत्रालय ने अभी तक Form 6 में किसी भी बदलाव को नोटिफाई नहीं किया है, जैसा कि 24 जून, 2025 से ई-गजट वेबसाइट पर उपलब्ध नोटिफिकेशन में देखा जा सकता है। तब चुनाव आयोग ने पहली बार SIR की घोषणा की थी। असल में ECINET पर डाउनलोड के लिए उपलब्ध Form 6 (जिसे जाहिर तौर पर प्रिंट करके चुनाव अधिकारियों को फिजिकली जमा करने के लिए है) में नया SIR डिक्लेरेशन फॉर्म वाला हिस्सा नहीं है। चुनाव आयोग ने इसको लेकर पूछे गए सवालों का जवाब नहीं दिया।
नए मतदाताओं के लिए इसका क्या मतलब है?
नए आवेदक, खासकर वे लोग जो हाल ही में 18 साल के हुए हैं, उन्हें अब अपने माता-पिता का आखिरी SIR ढूंढना होगा। चूंकि चुनाव ने अभी तक इस बदलाव पर कोई कमेंट या घोषणा नहीं की है, इसलिए यह साफ नहीं है कि जो लोग डिटेल्स नहीं दे पाएंगे, उन्हें और ज़्यादा स्क्रूटनी का सामना करना पड़ेगा या नहीं।
इस घोषणा को पेश करना ऐसे समय में और भी ज़रूरी है जब चुनाव आयोग वोटर लिस्ट की एक ऐसी SIR कर रहा है जो पहले कभी नहीं हुई। वोटर लिस्ट को हर साल रिवाइज़ करने के बजाय नए सिरे से तैयार किया जा रहा है। अब तक वोटर लिस्ट से कुल 5.58 करोड़ नाम हटा दिए गए हैं। पिछले बड़े बदलावों में सभी वोटरों को अपनी पात्रता (जिसमें नागरिकता भी शामिल है) साबित करने के लिए फ़ॉर्म और डॉक्यूमेंट जमा करने की ज़रूरत नहीं थी। हालांकि SIR में जरूरी होता है।
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पंजाब में चुनाव आयोग की विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) प्रक्रिया जारी है। इसके तहत बूथ लेवल अधिकारी (BLO) घर-घर जाकर मतदाताओं का सत्यापन (वेरिफिकेशन) कर रहे हैं ताकि मतदाता सूची को अपडेट किया जा सके। पढ़ें पूरी खबर
