सीनियर एक्ट्रेस जीनत अमान ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का समर्थन किया है। वांगचुक के अनशन का 17वां दिन पूरा होने पर जीनत ने इंस्टाग्राम पर एक भावुक पोस्ट शेयर करते हुए केंद्र सरकार से उनसे बातचीत शुरू करने की अपील की।

जीनत अमान ने इंस्टाग्राम पर लिखा कि इस समय उनके विचार दिल्ली में बैठे सोनम वांगचुक के साथ हैं, जो अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के 17वें दिन में प्रवेश कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वांगचुक की तबीयत लगातार बिगड़ रही है, उनका मसल मास कम हो रहा है और वे बेहद दर्द में हैं।

जीनत अमान ने सोनम वांगचुक को दूरदर्शी बताते हुए उनके योगदान का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वांगचुक SECMOL के संस्थापक, आइस स्तूप के आविष्कारक, शिक्षा सुधारक, पर्यावरण कार्यकर्ता हैं और आमिर खान की फिल्म ‘3 इडियट्स’ के लोकप्रिय किरदार फुंसुख वांगडू की प्रेरणा भी रहे हैं।

सरकार से की बातचीत की अपील

जीनत अमान ने केंद्र सरकार से अपील करते हुए लिखा, “सोनम वांगचुक की इच्छा का सम्मान करते हुए मैं भारत सरकार से आग्रह करती हूं कि इस मुद्दे पर उनसे बातचीत शुरू करे। यह केवल एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे देश के भविष्य का सवाल है।”

उन्होंने आगे कहा, “हम ऐसा समाज नहीं बन सकते जो अपने सबसे बड़े दिमागों में से एक को चुपचाप कुर्बान होते देखता रहे। भारत की शांतिपूर्ण विरोध की लंबी परंपरा रही है और सत्ता में बैठे लोगों की जिम्मेदारी है कि ऐसे आंदोलनों का जवाब शांतिपूर्ण संवाद से दें।”

नसीरुद्दीन शाह और अरुंधति रॉय ने भी की अपील

इससे पहले लेखिका अरुंधति रॉय, अभिनेता नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह और अर्थशास्त्री जयति घोष ने भी संयुक्त बयान जारी कर सोनम वांगचुक के आंदोलन का समर्थन किया था। हालांकि उन्होंने वांगचुक से स्वास्थ्य को देखते हुए भूख हड़ताल समाप्त करने की अपील भी की।

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संयुक्त बयान में कहा गया, “हम आपके उद्देश्य, साहस और छात्रों-युवाओं के लिए किए जा रहे संघर्ष को सलाम करते हैं। लेकिन यह लड़ाई लंबी है। यह स्प्रिंट नहीं, मैराथन है। आने वाले दिनों में हमें आपके नेतृत्व और आपकी ताकत की जरूरत होगी। इसलिए कृपया अपने स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए भूख हड़ताल खत्म करने पर विचार करें।”

बयान में यह भी कहा गया कि सरकार की ओर से लगातार चुप्पी चिंता का विषय है और इससे अनशन पर बैठे लोगों की सेहत और अधिक बिगड़ सकती है।