खज़ाना खाली है तो किसानों के कर्ज कहां से माफ करोगे? रजत शर्मा ने पूछा था योगी आदित्यनाथ से सवाल, ये दिया था जवाब

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से एक इंटरव्यू में किसानों का कर्जमाफ को लेकर सवाल पूछा गया था। इसके जवाब में उन्होंने कुछ ऐसा कहा था।

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यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)

उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव नज़दीक आने के बाद ही सियासी हलचल भी तेज हो गई है। बीजेपी के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चुनाव प्रचार कर रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी की तरफ से अखिलेश यादव चुनाव मैदान में हैं। योगी से जब एक इंटरव्यू में चुनाव को लेकर पूछा गया था तो उन्होंने कहा था कि बीजेपी पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आ रही है। इसके साथ ही गृह मंत्री अमित शाह ने भी साफ कर दिया है कि बीजेपी के सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ही बनेंगे।

सियासी अटकलों के बीच योगी आदित्यनाथ का एक पुराना इंटरव्यू वायरल हो रहा है। वायरल हो रहे इंटरव्यू में वरिष्ठ पत्रकार रजत शर्मा ने योगी से किसानों के कर्ज माफ करने को लेकर सवाल पूछ था। रजत शर्मा ने सवाल किया था, ‘अगर खजाना खाली है तो किसानों का कर्ज कैसे माफ करेंगे। 36,000 करोड़ रुपए कहां से देंगे?’ इसके जवाब में योगी आदित्यनाथ कहते हैं, ‘हम कर रहे हैं किसानों का कर्ज माफ। ऐसा सिर्फ हमारी सरकार में ही हो सकता है। जबकि पहले की सरकारों में ऐसा बिल्कुल संभव नहीं था।’

योगी आदित्यनाथ ने आगे कहा था, ‘पहले सरकारों में वित्तीय अनुशासनहीनता बहुत ज्यादा थी। गोमती रिवर फ्रंट का पीपीआर बनता है 160 करोड़ का। डीपीआर बनते बनते वो चला जाता है 660 करोड़। दो वर्ष में योजना पूरी होनी थी। ये योजना दो वर्ष में पूरी होनी थी। जनवरी 2015 से प्रारंभ हुई योजना, जनवरी 2017 में समाप्त होनी थी। अधिक से अधिक डीपीआर 660 करोड़ में समाप्त हो जाना चाहिए था। 1437 करोड़ खर्च हो चुके हैं, लेकिन योजना अभी भी अधूरी है। ये प्रदेश की वित्तीय अनुशासनहीनता की पराकाष्ठा है।’

ईद क्यों नहीं मनाते? योगी आदित्यनाथ ने कहा था, ‘मैं उन लोगों में से नहीं हूं जो घर में टीका लगाते हैं और पूजा करते हैं, लेकिन बाद में बाहर निकलकर टोपी लगा लेते हैं। अगर समाजवादी पार्टी के लोगों को ऐसा लगता है कि मैं ईद नहीं मनाता तो ये उनकी गलती है। उन्हें पहले ये देखना चाहिए कि मैंने ईद की मुबारकबाद दी थी या नहीं। वैसे भी समाजवादी थोड़े कम पढ़े-लिखे होते हैं। अगर वो चाहते तो टीवी चैनल भी देख सकते थे।’

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