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मिथुन को पहली फिल्म के लिए मिला नेशनल अवॉर्ड, फिर उसे बेचने की क्यों सोच रहे थे?

मिथुन का काम और किस्मत अच्छी थी। 24वें नेशनल अवॉर्ड्स में उन्हें बेस्ट एक्टर का खिताब मिला। पहली फिल्म से...

स्टार बनना और चमकना, आसां नहीं है। फिल्म इंडस्ट्री में हजारों एक्टर हैं, जो चप्पलें घिस कर आए। कमरतोड़ संघर्ष किया। खाने को रोटी और रहने को छत का अभाव झेला। लेकिन फिर भी हार न मानी। आगे बढ़े और बढ़ते गए। मिथुन चक्रवर्ती के साथ भी कहानी भी कुछ ऐसी ही है। यूं डांस फ्लोर तक नहीं पहुंचे। डिस्को डांसर बनने के लिए उन्होंने मोटा टैक्स चुकाया। सालों संघर्ष कर के। बात पुरानी जरूर है, लेकिन आज भी प्रासंगिक है। 1976 में उन्होंने डेब्यू किया था। फिल्म का नाम था- ‘मृगया’। यह ड्रामा फिल्म थी, जिसके डायरेक्टर मृणाल सेन थे।

मिथुन का काम और किस्मत अच्छी थी। 24वें नेशनल अवॉर्ड्स में उन्हें बेस्ट एक्टर का खिताब मिला। पहली फिल्म से इतना बड़ा सम्मान पाकर उनकी खुशी का ठिकाना नहीं था, लेकिन गम का अंबार भी पीछा नहीं छोड़ रहा था।

कारण थी उनकी आर्थिक हालत। वह पैसों की किल्लत के चलते अपना पहला अवॉर्ड बेचने तक के बारे में सोचने लगे थे। कहा जाता था कि जब उन्हें अवॉर्ड लेने जाना होता था, तो उनके पास उतने पैसे भी नहीं होते थे। वह भले ही एक्टर बन गए थे, लेकिन आलीशान जिंदगी नहीं जी पाते थे। एक बार कोई पत्रकार उनका इंटरव्यू करना चाह रहा था। बहुत दिनों से उनके पीछे लगा था। एक दिन अचानक वह हाथ आ ही गए। बातचीत के लिए पूछा, तो मिथुन ने एक शर्त रखी दी। वह थी- इंटरव्यू से पहले पेट भर खाना खिलाना।

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