scorecardresearch

‘मौत मुबारक हो मीना, ये दुनिया आप जैसे लोगों के लिए नहीं है’- मीना कुमारी की मौत पर नरगिस ने क्यों कही थी ऐसी बात, जानें- वजह

दिवंगत अभिनेत्री मीना कुमारी की मौत के बाद उनकी करीबी दोस्त नरगिस ने उनके लिए एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने उनके जीवन के बारे में कई बातें बताई थी।

meena kumari, nargis, jansatta,
मीना कुमारी के निधन पर नरगिस ने दी थी मुबारकबाद (फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस)

दिवंगत अभिनेत्री मीना कुमारी को उनके पूरे 33 साल के शानदार करियर के लिर जाना जाता है। उन्होंने खुद को ‘ऐतिहासिक रूप से अतुलनीय’ अभिनेत्री के रूप में स्थापित किया है। वहीं उनका निजी जीवन भी अक्सर चर्चा में रहा है। लेखक कमल आरोही के साथ उनकी नाखुश शादी और धर्मेंद्र के साथ असफल रिश्ते के कारण भी वो सुर्खियों में रही थीं।

गैरतलब है साल 1972 में उनकी मृत्यु हो गई थी। उनके अंतिम संस्कार के दौरान उन्हें श्रद्धांजलि देने नरगिस दत्त आई थीं। उस वक्त उन्होंने कहा था ‘मीना, मौत मुबारक हो’। वहीं नरगिस ने उनकी मृत्यु के बाद उनके लिए एक पत्र लिखा था, जो एक उर्दू पत्रिका में प्रकाशित हुआ था। जिसमें उन्होंने अपने करीबी रिश्ते को दर्शाया था।

उन्होंने अपने इस पत्र की शुरुआत करते हुए लिखा था। जिसमें उन्होंने लिखा था ‘आपकी मृत्यु पर बधाई मैंने पहले कभी ये नहीं कहा। मीना, आज आपकी बड़ी बहन आपको आपकी मृत्यु पर बधाई देती है और आपसे इस दुनिया में फिर कभी कदम न रखने के लिए कहती है। ये जगह आप जैसे लोगों के लिए नहीं है’। उन्होंने अपने इस पत्र में ये भी याद किया था कि मीना कुमार के साथ उसकी दोस्ती कब और किस तरह शुरू हुई थी।

उन्होंने लिखा था ‘शूटिंग के दौरान, मेरे पति सुनील दत्त ने मुझे बच्चों के साथ सेट पर आमंत्रित किया था। वहां मैं और मीना बहुत अच्छे दोस्त बन गए। एक बार जब मैं दत्त साहब के साथ डिनर पर गई, तो मीना ने अपनी इच्छा से संजय और नम्रता की देखभाल की थी, साथ ही उनके कपड़े बदलकर उनके लिए दूध भी बनाया था।

नरगिस ने इस पत्र में ये भी खुलासा किया था कि एक फिल्म की शूटिंग के लिए मद्रास की यात्रा के दौरान, उन्होंने मीना को होटल के बगीचे में पुताई करते भी देखा था और जब उन्होंने पूछा तो मीना ने कहा कि वो ठीक है, ये सिर्फ तंबाकू हो सकता है। नरगिस को इस बात पर पूरी तरह से विश्वास नहीं हुआ था और उनके इस संदेह की पुष्टि तब हुई जब उन्होंने अपने कमरे से ‘झगड़ने की आवाजें सुनीं’।

नरगिस ने आगे लिखा था ‘मैंने कमाल अमरोही के सेक्रेटरी बकर से सीधी बात की ‘आप लोग मीना को क्यों मारना चाहते हैं? उन्होंने तुम्हारे लिए कितना काम किया है, वो तुम्हें कब तक खिलाएगी?’ जिसका जवाब देते हुए उन्होंने कहा था ‘जब सही समय आएगा तो हम उन्हें आराम देंगे’।

इस वाकये के बाद वो बॉम्बे लौट आए, और नरगिस ने कहा कि वो काफी लंबे समय तक नहीं मिले। बाद में उन्हें पता चला कि मीना कुमार कमाल के घर से निकल गई थी और महमूद के घर में रहने लगी थी। बता दें, फिल्म ‘पिंजरे के पंछी’ के सेट पर मीना कुमारी का बकर के साथ झगड़ा हुआ था और वो झगड़ा इतना भयानक था कि उन्होंने कमल के घर में फिर कभी कदम नहीं रखा। उस दौरान मीना के शराब के नशे की खबरें सामने आने लगीं थीं। शराब के अधिक सेवन की वजह से उनकी हालत खराब हो गई और उन्हें पीलिया हो गया था।

इस दौरान जब नरगिस उनसे मिलने अस्पताल गई तो उसने पूछा ‘मंजू तुम आजाद हो, लेकिन ऐसी आजादी का क्या फायदा अगर तुम खुद को मारने पर तुली हुई हो?’ जिसका जबाब देते हुए उन्होंने कहा था ‘बाजी, मेरे धैर्य की एक सीमा है। कमल साहब के सचिव की मुझ पर हाथ उठाने की हिम्मत कैसे हुई? जब मैंने कमल साहब को इस घटना के बारे में बताया था, तो मैंने सोचा कि वह दौड़कर आएंगे और बकर को गोली मार देंगे। लेकिन उन्होंने कहा ‘घर आओ, मैं वहां चीजें तय करूंगा। उसके पास फैसला करने के लिए क्या था? अब ये मैं हूं जिसने उसके पास वापस नहीं जाने का फैसला किया है’।

वहीं इसके बाद धर्मेंद्र, मीना कुमारी के जीवन में आए। जिससे उन्हें कुछ समय के लिए खुशी का मिली। नरगिस ने इस बारे में लिखा था ‘अगर मीना ने कभी किसी से बेहद प्यार किया है, तो वो शख्स हैं धर्मेंद्र हैं। मीना अगर कभी किसी के प्यार में दीवानी हुई थी तो वो धर्मेंद्र थे‘। नरगिस ने कहा ये भी कहा था कि ये उनके जीवन का ‘सबसे खूबसूरत’ दौर था। हालांकि, एक गलतफहमी के कारण उनके बीच दरार आ गई और उनका दिल टूट गया था। इसके बाद वो धीरे-धीरे मौत की ओर बढ़ने लगी।

पढें मनोरंजन (Entertainment News) खबरें, ताजा हिंदी समाचार (Latest Hindi News)के लिए डाउनलोड करें Hindi News App.