इन दिनों नेटफ्लिक्स पर रिलीज हुई ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ चर्चा का विषय बनी हुई है। यह सीरीज कारगिल युद्ध में सर्वोच्च बलिदान देने वाले भारतीय वायुसेना के जांबाज अधिकारी स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा के साहस, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान पर आधारित है, जो अब नई पीढ़ी तक भी पहुंचेगी।

सीरीज में अभिनेता सिद्धार्थ ने स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा की भूमिका निभाई है। इसकी कहानी 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना के गोल्डन एरोज स्क्वाड्रन द्वारा संचालित मिशनों, उनके अदम्य साहस और देश के प्रति समर्पण को दर्शाती है। यह केवल एक युद्ध कथा नहीं, बल्कि उन वीर जवानों को श्रद्धांजलि भी है, जिन्होंने राष्ट्र की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया।

अजय आहूजा का आखिरी मिशन

27 मई 1999 को स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा ऑपरेशन सफेद सागर के तहत बटालिक सेक्टर में फोटो रिकॉनिसेंस मिशन का नेतृत्व कर रहे थे। इसी दौरान फ्लाइट लेफ्टिनेंट के. नचिकेता का मिग-27 दुश्मन की फायरिंग के बीच तकनीकी खराबी का शिकार हो गया, जिसके बाद उन्हें दुश्मन के कब्जे वाले इलाके में इजेक्ट करना पड़ा।

हालांकि अजय आहूजा जानते थे कि उस क्षेत्र में पाकिस्तान ने स्टिंगर जैसी सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें तैनात कर रखी हैं, लेकिन उन्होंने अपने साथी पायलट का पता लगाने और बचाव अभियान में मदद करने के लिए वहीं उड़ान जारी रखी। लगातार चक्कर लगाने के दौरान उनके मिग-21 विमान को स्टिंगर मिसाइल ने निशाना बना लिया। वे सुरक्षित इजेक्ट तो हो गए, लेकिन नियंत्रण रेखा पार कर पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में उतर गए।

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इजेक्ट करने के बाद पकड़े गए थे अजय आहूजा

भारतीय अधिकारियों के अनुसार, अजय आहूजा इजेक्ट करने के बाद जीवित थे, लेकिन उन्हें पाकिस्तान की सेना ने बंदी बना लिया। अगले दिन उनका पार्थिव शरीर भारत को सौंपा गया। पोस्टमार्टम में गोली लगने के निशान मिलने के बाद भारत ने पाकिस्तान पर जिनेवा कन्वेंशन के उल्लंघन का आरोप लगाया, जबकि पाकिस्तान ने इन आरोपों से इनकार किया। वहीं दूसरी ओर, फ्लाइट लेफ्टिनेंट के. नचिकेता भी पाकिस्तान की गिरफ्त में चले गए थे, लेकिन आठ दिन बाद उन्हें सुरक्षित भारत लौटा दिया गया।

वीर चक्र से सम्मानित हुए अजय आहूजा

स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा कारगिल युद्ध में शहीद होने वाले भारतीय वायुसेना के पहले अधिकारी बने। उनके अदम्य साहस और बलिदान के लिए उन्हें मरणोपरांत वीर चक्र से सम्मानित किया गया, जो भारत का तीसरा सर्वोच्च युद्धकालीन वीरता पुरस्कार है।

कारगिल युद्ध के दौरान अजय आहूजा के कमांडिंग ऑफिसर रहे पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल बी.एस. धनोआ ने उनकी बहादुरी को याद करते हुए कहा था कि अजय आहूजा ने अपने साथी फ्लाइट लेफ्टिनेंट के. नचिकेता की जान बचाने के लिए अपने कर्तव्य से कहीं बढ़कर काम किया। उन्होंने अपनी जान की परवाह किए बिना हेलिकॉप्टर को दुर्घटनास्थल तक पहुंचाने में मदद की और इसी दौरान सर्वोच्च बलिदान दिया।

वर्दी के पीछे का इंसान

राजस्थान के कोटा में जन्मे अजय आहूजा ने नेशनल डिफेंस अकादमी (NDA) से प्रशिक्षण लेने के बाद 1985 में भारतीय वायुसेना जॉइन की। 14 साल के करियर में उन्होंने मिग-21 और मिग-23 जैसे लड़ाकू विमान उड़ाए और एक फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर के रूप में 1,000 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव हासिल किया।

कारगिल युद्ध के समय वे भारतीय वायुसेना की नंबर 17 स्क्वाड्रन ‘गोल्डन एरोज़’ के फ्लाइट कमांडर थे। यह यूनिट दुश्मन की गतिविधियों की निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने में अहम भूमिका निभा रही थी।

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पत्नी ने सुनाया भावुक किस्सा

अजय आहूजा की पत्नी अलका आहूजा ने एक इंटरव्यू में बताया कि शादी के तुरंत बाद अजय ने उनसे कहा था कि वह उनकी “दूसरी पत्नी” हैं। जब उन्होंने इसका कारण पूछा तो अजय ने कहा कि उनकी पहली पत्नी भारतीय वायुसेना है। अलका के मुताबिक, बाद में उन्होंने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देकर इस बात को सच साबित कर दिया।

सिद्धार्थ ने पहना अजय आहूजा का असली विंग बैज

‘ऑपरेशन सफेद सागर’ के निर्माताओं ने अलका आहूजा से मुलाकात की। उन्होंने अपने पति का मूल विंग बैज टीम को सौंपा, जिसे अभिनेता सिद्धार्थ ने सीरीज की शूटिंग के दौरान पहना। निर्माताओं ने उनके घर को अजय आहूजा की यादों से जुड़ा एक स्मारक जैसा बताया।

क्या है ‘ऑपरेशन सफेद सागर’?

‘ऑपरेशन सफेद सागर’ 1999 के कारगिल युद्ध में भारतीय वायुसेना की भूमिका पर आधारित सीरीज है। यह पूरी जंग की कहानी नहीं, बल्कि वायुसेना के नजरिए से युद्ध के अहम अभियानों को दिखाती है। सीरीज में सिद्धार्थ स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा की भूमिका निभा रहे हैं, जबकि जिमी शेरगिल का किरदार पूर्व वायुसेना प्रमुख बी.एस. धनोआ से प्रेरित है। इसके अलावा कई कलाकार भारतीय वायुसेना के अधिकारियों और जवानों की भूमिका में नजर आएंगे।