नेटफ्लिक्स की मोस्ट अवेटेड सीरीज ‘ऑपरेशन सफेद सागर’ रिलीज हो गई है, जो दर्शकों को बहुत पसंद आ रही है। इस शो में जिमी शेरगिल ने विंग कमांडर बीएस धनोआ का किरदार निभाया है, जिसकी काफी चर्चा हो रही है। सीरीज में देखने को मिला कि शांत, सख्त और दमदार अंदाज में नजर आने वाले धनोआ को अपनी बात मनवाने के लिए ऊंची आवाज की जरूरत नहीं पड़ती। चलिए हम आपको बताते हैं कि आखिर बीएस धनोआ कौन हैं।

कौन हैं बीएस धनोआ?

बीएस धनोआ यानी बिरेंद्र सिंह धनोआ साल 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय वायुसेना की नंबर 17 स्क्वाड्रन, जिसे ‘गोल्डन एरोज’ के नाम से जाना जाता है के कमांडिंग ऑफिसर थे। उस समय भारतीय वायुसेना को पहली बार इतनी ऊंचाई वाले पहाड़ी इलाके में एक मुश्किल तरह की जंग लड़नी पड़ रही थी। ऐसे समय में धनोआ की जिम्मेदारी अपने जवानों और पायलटों को ऐसे माहौल में आगे ले जाने की थी, जहां हर फैसला बेहद अहम था।

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फाइटर पायलट से कारगिल के कमांडर तक

बिरेंद्र सिंह धनोआ जून 1978 में भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में शामिल हुए थे। अपने लंबे करियर में उन्होंने MiG-21, Jaguar, MiG-29 और Su-30MKI जैसे कई लड़ाकू विमानों को उड़ाया। वह एक योग्य फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर भी थे। 1999 में जब कारगिल युद्ध शुरू हुआ, तब धनोआ गोल्डन एरोज के कमांडिंग ऑफिसर थे। यह स्क्वाड्रन MiG-21 विमानों से लैस थी। कारगिल युद्ध के दौरान भारतीय सेना की मदद के लिए चलाए गए वायुसेना के ऑपरेशन सफेद सागर में गोल्डन एरोज की अहम भूमिका रही।

हालात बेहद मुश्किल थे। विमानों को बहुत ऊंचे पहाड़ी इलाकों के ऊपर उड़ान भरनी थी। ऊंचाई, मौसम, कम विजिबिलिटी और हथियारों के इस्तेमाल जैसी कई चुनौतियां सामने थीं। इसके बावजूद धनोआ की अगुवाई में गोल्डन एरोज ने खुद को इन हालात के हिसाब से ढाला। उनकी आधिकारिक जीवनी के मुताबिक, स्क्वाड्रन ने ऊंचाई वाले इलाकों में रात के समय बमबारी करने के नए तरीके विकसित किए। खतरा बहुत बड़ा था, लेकिन स्क्वाड्रन ने अपनी जिम्मेदारी बखूबी निभाई।

बाद में गोल्डन एरोज को हेडक्वार्टर वेस्टर्न एयर कमांड की सर्वश्रेष्ठ फाइटर स्क्वाड्रन चुना गया। कारगिल युद्ध में उनकी सेवा के लिए धनोआ को युद्ध सेवा मेडल और वायु सेना मेडल से भी सम्मानित किया गया। हालांकि, बिरेंद्र सिंह धनोआ के लिए कारगिल सिर्फ सैन्य इतिहास का एक हिस्सा नहीं था। यह ऐसा समय था, जिसने पूरी पीढ़ी के वायुसेना अधिकारियों और जवानों की क्षमता की परीक्षा ली थी।

कारगिल को लेकर क्या बोले थे धनोआ

कारगिल के उन दिनों को याद करते हुए धनोआ ने पहले एएनआई से कहा था, “कारगिल, मई 1999 एक बड़ा सरप्राइज था। जब मेरी स्क्वाड्रन को वहां जाने के लिए कहा गया, तब हमें नहीं पता था कि हमें जंग में जाना पड़ सकता है। 21 मई को हमें एहसास हुआ कि कुछ हो सकता है। हम सभी बहुत उत्साहित थे, क्योंकि 1971 के बाद पहली बार हम अपने हथियारों का इस्तेमाल जंग में करने जा रहे थे।”

कारगिल के बाद भी जारी रहा सफर

बिरेंद्र सिंह धनोआ की कहानी की सबसे खास बात यह है कि कारगिल के बाद उनका सफर खत्म नहीं हुआ। इसके बाद उन्होंने भारतीय वायुसेना में कई महत्वपूर्ण ऑपरेशनल और कमांड पदों पर काम किया। उन्होंने एयर हेडक्वार्टर के साथ-साथ वेस्टर्न और ईस्टर्न एयर कमांड में भी वरिष्ठ जिम्मेदारियां संभालीं। धीरे-धीरे उनका करियर उन्हें वायुसेना के सबसे ऊंचे पद तक ले गया।

दिसंबर 2016 में धनोआ भारतीय वायुसेना के चीफ ऑफ एयर स्टाफ बने। उन्होंने सितंबर 2019 तक इस पद पर काम किया। 2019 में वह चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी के चेयरमैन भी रहे। एयर चीफ के तौर पर उनका कार्यकाल बेहद महत्वपूर्ण रहा। इसी दौरान फरवरी 2019 में बालाकोट एयर स्ट्राइक हुई। उनके कार्यकाल में वायुसेना की ऑपरेशनल तैयारी, ट्रेनिंग और क्षमता को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया।

जो व्यक्ति कभी MiG-21 विमानों की एक स्क्वाड्रन को कारगिल की मुश्किल पहाड़ियों के ऊपर लीड कर रहा था, वही आगे चलकर पूरी भारतीय वायुसेना की कमान संभालने तक पहुंचा।

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