When you are afraid of questions, abuse, kill: swara bhaskar - Jansatta
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जब आप सवालों से डरते हैं तो गाली देते हैं, मारते हैं

अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने कहा कि मौजूदा विभाजनकारी राजनीति के कारण समाज में शराफत खत्म हो रही है। इस कारण राजनीति के साथ समाज भी फासीवाद की ओर जा रहा है।

Author नई दिल्ली | June 10, 2017 12:27 AM
अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने कहा कि मौजूदा विभाजनकारी राजनीति के कारण समाज में शराफत खत्म हो रही है।

अभिनेत्री स्वरा भास्कर ने कहा कि मौजूदा विभाजनकारी राजनीति के कारण समाज में शराफत खत्म हो रही है। इस कारण राजनीति के साथ समाज भी फासीवाद की ओर जा रहा है। स्वरा भास्कर जनसत्ता बारादरी की बैठक में सवालों के जवाब दे रही थीं। पिछले दिनों परेश रावल के अरुंधति रॉय पर किए आपत्तिजनक ट्वीट का स्वरा भास्कर ने कड़ा विरोध जताया था, और इसके कारण उन्हें भी ट्रोल होना पड़ा और भद्दे बयानों का सामना करना पड़ा था। हाल ही में दिल्ली में मॉब लिंचिंग के खिलाफ शुरू हुए अभियान में साझीदार बनीं भास्कर ने कहा कि भाजपा के सांसद ने जो ट्वीट किया वह एक युद्ध अपराध है। कुलभूषण जाधव का मामला जिस अंतरराष्ट्रीय अदालत में गया है, वही बताएगा कि यह अपराध है।

स्वरा भास्कर ने परेश रावल की भाषा पर कहा, ‘आप लोकसभा में चुनाव जीत कर आए हैं। लोकसभा वह सभा है जहां संविधान बना था, आप संविधान को बदलने की भी शक्ति रखते हैं। कम से कम आपको असंवैधानिक बातें नहीं करनी चाहिए’। बहुचर्चित फिल्में ‘निल बटे सन्नाटा’ व ‘अनारकली आॅफ आरा’ की अभिनेत्री ने कहा कि भारत सहित पूरी दुनिया में अभी दक्षिणपंथ की ओर जाने की प्रवृत्ति दिख रही है। असहिष्णुता बढ़ रही है। पहले हमें जो चीजें सबके सामने बोलने में शर्म आती थी, अब हम उसे टेबल पर चढ़ कर चिल्ला कर कहते हैं। पहले हमारी मानसिक ग्रंथी जैसी भी हो, लेकिन हम अल्पसंख्यकों के खिलाफ सार्वजनिक रूप से बोलने में परहेज करते थे, लेकिन अब दुस्साहस बढ़ गया है कि हम किसी को, कुछ भी कह सकते हैं। पहले कम से कम इतनी तो शराफत थी कि लड़की है तो मारेंगे नहीं, गाली नहीं देंगे। मौजूदा राजनीतिक व्यवस्था इस प्रवृत्ति को बढ़ावा दे रही है जिसका असर है कि सामाजिक शराफत खत्म हो गई है। जब कानून बनाने वाले आपराधिक बातें करेंगे तो ऐसा होगा ही। मौजूदा समय में अशांति और संघर्ष को लेकर भास्कर ने कहा कि जब आपके पास सवालों के जवाब नहीं होते हैं, कोई तर्क नहीं होता है तो आप गाली देते हैं और मारते हैं। सवालों से डरने वाले समाज की भीड़ अपने ही लोगों को पीट-पीट कर मार डालती है।

स्वरा भास्कर ने कहा कि इन दिनों जो सबसे नकारात्मक प्रवृत्ति दिख रही है वह राजनीति को खारिज करने की और इस शब्द को धूमिल करने की है। समाज कैसा होगा यह राजनीति तय करती है तो फिर समाज राजनीति से अलग कैसे रह सकता है? अगर हम राजनीतिक समझ नहीं विकसित करते और राजनीति में नहीं उतरते तो गुलाम ही रहते। भारत राजनीति के कारण ही आजाद हुआ था।

मौजूदा दौर की विभाजनकारी राजनीति पर सवालों को लेकर हिंदी अभिनेत्री ने कहा कि राजनीतिकों की हरकतें हमेशा से समस्यामूलक रही हैं। लेकिन यहां चिंता तो समाज और नागरिक को लेकर है। जब कानून बनाने वाले लोग ही गैरकानूनी बातें करने लगें, गाली-गलौच की भाषा का इस्तेमाल करें, स्त्री अस्मिता को विखंडित करें तो आम सभ्य नागरिकों की चुप्पी पर चिंता होती है। स्वरा भास्कर ने कहा कि सत्ता के शीर्ष से दिए गए असंवैधानिक संदेश का असर नागरिक समाज तक जाता है। उन्होंने कहा कि जब नोएडा में अफ्रीकी मूल के छात्रों पर नस्लीय हमला होता है तो उसके खिलाफ कोई सामूहिक आवाज नहीं उठती है। एक मार्च तक नहीं निकाला गया। हमने अफ्रीकी देशों के लोगों के लिए सांत्वना के दो शब्द नहीं कहे। उन्होंने कहा कि जब हम किसी को सुने बिना विभाजनकारी मानसिकता में सिर्फ मारने लगें, और उसे जायज भी ठहराने लगें तो यह समझ जाना चाहिए कि हमारा समाज फासीवाद की ओर जा रहा है।

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