जब सुनील दत्त ने नरगिस को किया प्रपोज, सामने से नहीं आया था कोई जवाब; बोरिया बिस्तर बांध गांव जाने लगे थे एक्टर

सुनील दत्त की किस्मत जब उन्हें बंबई ले आई, तो उनकी मुलाकात नरगिस से हुई। सुनील दत्त ने बताया था कि उस वक्त नरगिस उन्हें ‘बिरजू’ कहकर पुकारा करती थीं। नरगिस दत्त हेल्पफुल नेचर की थीं

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सुनील दत्त और नरगिस (फोटो सोर्स – इंडियन एक्सप्रेस)

सुनील दत्त ने 1955 में फिल्म ‘रेलवे प्लैटफॉर्म’ से अपने करियर की शुरुआत की थी। वहीं 1957 में ‘मदर इंडिया’ फिल्म में एक्टर ने नरगिस के साथ काम किया था। नरगिस और सुनील दत्त जब पहली बार मिले थे तब उन्हें नहीं पता था कि वह एक दूसरे के लिए ही बने हैं। दरअसल, सुनील दत्त एक बेहद मामूली परिवार से आते थे। उनकी आंखों में ख्वाब था कि उनकी होने वाली पत्नी उनकी मां जैसी ही हो।

वीर सांघवी के टॉक शो में एक बार सुनील दत्त ने इस बारे में जिक्र किया था। उन्होंने बताया था कि ‘मैं एक रूढ़िवादी हिंदू परिवार से हैं। 5 साल की उम्र में मेरे सिर से पिता का सांया उठ गया था। मां विधवा थी, 6 महीने का भाई था और 3 साल की छोटी बहन थी। हम विभाजन के बाद यहां आए थे। मेरी मां ने बड़ी मुश्किलों से हमें पाला। हमारे पास उस वक्त सब कुछ था। उस वक्त हम गांव में थे तो जो जो जरूरतें होती थीं वो सब पूरी होती थीं। मेरी मां चक्की में आटा पीसती थीं।’

ऐसे में सुनील दत्त की किस्मत जब उन्हें बंबई ले आई, तो उनकी मुलाकात नरगिस से हुई। सुनील दत्त ने बताया था कि उस वक्त नरगिस उन्हें ‘बिरजू’ कहकर पुकारा करती थीं। नरगिस दत्त हेल्पफुल नेचर की थीं। ऐसे में एक दिन सुनील दत्त बहुत परेशान थे तो वह स्टूडियोके बार बैठे थे। जब नरगिस ने उन्हें ऐसे बैठे देखा तो उनकी उदासी की वजह पूछी। ऐसे में सुनील दत्त ने बताया कि उनकी बहन की गर्दन पर एक स्लिट हो गया है, टीबी जैसा। मुश्किल ये थी कि सुनील दत्त किसी भी डॉक्टर को नहीं जानते थे। ऐसे में नरगिस दत्त ने कहा- ‘बिरजू परेशान मत हो इसका इलाज आजकल हो जाता है आसानी से।’ सुनील दत्त से यह कहते ही नरगिस वहां से चली गईं।

इसके बाद सुनील दत्त ने जिक्र किया-‘मैं परेशान था तो अपने घर नहीं गया, किसी दोस्त के यहां ठहर गया। अगले दिन जब मैं घर पहुंचा तो मेरी बहन ने मेरे पास आकर कहा कि कल उसका ऑपरेशन है। ये सुनते ही मैंने पूछा कि तुम किस डॉक्टर के पास गईं? मैं हैरान था। तब बहन ने बताया कि नरगिस जी उनके पास आई थीं और मेरी बहन को अस्पताल लेकर गई थीं। इस बात से मेरा दिल उनका मुरीद हो गया।’

उस वक्त सुनील दत्त की बहन की बेटी को नरगिस ने ही संभाला था, वह ही बच्ची को अपने घर 3 दिन के लिए ले गई थीं। सुनील ने उस वक्त कहा था कि ‘भगवान ऐसी ही कोई लड़की मेरी जिंदगी में भी आ जाए।’

सुनील दत्त ने आगे बताया था- ‘एक दिन वह बहन से घर मिलने आई थीं। तो जब वह जाने लगीं तो मैंने उनसे पूछा कि क्या मैं आपको घर छोड़ दूं। तो उन्होंने कहा नहीं कासिम भाई घर छोड़ देंगे। मैंने जब दोबारा उनसे पूछा तो वह मान गईं। तब मेरे पास छोटी सी फीएट कार हुआ करती थी। हम दोनों गाड़ी में बैठे थे। तभी मैंने हिम्मत कर उनसे कहा कि नरगिस जी मैं आपसे कुछ कहना चाहता हूं। तो उन्होंने कहा हां कहो न बिरजू। मैंने पूछा क्या आप मुझसे शादी करेंगी? ये सुनते ही नरगिस मौन हो गईं। उनका घर आया और वह गाड़ी से उतर गईं।’

सुनील दत्त ने बताया था कि ‘नरगिस का कुछ न कहना मेरे लिए एक जवाब था। जिसके बारे में सोच सोच कर मैं बहुत शर्मिंदा हुआ। बाद में मैंने तय किया कि मैं अपनी फिल्मों का बचा हुआ काम पूरा कर के वापस गांव चला जाऊंगा और खेती बाड़ी करूंगा। कुछ दिन बात जब ऐसे ही एक शाम मैं घर लौटा तो मेरी बहन बहुत खुश नजर आई। मैंने पूछा कि उसकी खुशी का कारण क्या है? तो उसने बताया कि -नरगिस जी मान गईं। मैंने पूछा क्या मान गईं? तो बहन ने कहा था कि बनो मत, जो तुमने पूछा था उसके लिए नरगिस जी मान गईं।’

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