ताज़ा खबर
 

जब सादगी पसंद स्मिता पाटिल को मरने के बाद दुल्हन की तरह किया गया विदा, आखिरी दिनों में हो गई थीं अकेली

स्मिता पाटिल 70 की दशक की ऐसी अभिनेत्री रहीं जब 1977 में फिल्म 'भूमिका' के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से हासिल किया और फिर 1981 में आई फिल्म 'चक्र' के लिए भी नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

smita patil, smita patil actress, smita patil death, raj babbar, raj babbar and smota patil, smita patil biography, smita patil songs, smita patil movies, smita patil death, smita patil song, smita patil photo smita patil images, smita patil son, smita patil photos, smita patil award, smita patil wiki, smita patil husband, स्मिता पाटिल, स्मिता पाटिल बायोग्राफी, स्मिता पाटिल तस्वीरें, स्मिता पाटिल गीत, स्मिता पाटिल की मौत का कारण, मरने के बाद दुल्हन की तरह सजी थीं स्मिता पाटिल, श्याम बेनेगल, मंथन, मिर्च मासाल,फिल्म मिर्च मसाला स्मिता के निधन के बाद रिलीज हुई थी।

साल था 1986 और तारीख थी 13 दिसंबर। महज 31 साल की उम्र बॉलीवुड की उस अदाकार ने इस दुनिया को अलविदा कह दिया था जिसने अपने करियर के कम समय में ही हिंदी सिनेमा में एक नई इबारत लिख कर गईं। स्मिता पाटिल एक ऐसे पिता की बेटी थीं जो महाराष्ट्र में मंत्री थे। एक बड़े घराने में जन्म लेने के बावजूद स्मिता इतनी सहज रहती थीं कि कोई उनके रहन सहन को देख ऐसे पारिवारिक पृष्ठभूमि की कल्पना भी नहीं कर पाता। लेकिन इस सादगी पसंद अभिनेत्री की जब रहस्यमयी मौत हुई तो उनके शव को दुल्हन की तरह सजा कर विदा किया गया था।

फिल्म के सेट पर कोई पहचानता तक नहीं थाः बीबीसी के लिए लिखे एक लेख में मशहूर डायरेक्टर श्याम बेनेगल बताते हैं कि राजकोट के करीब गांव में ‘मंथन’ फिल्म की शूटिंग के दौरान स्मिता बिल्कुल गांव की एक महिला की तरह जमीन पर ही बैठ जाती थीं। तब शूटिंग देखने आए लोग पूछते कि हीरोइन कौन है। हीरोइन सामने बैठी होती थी और कोई उन्हें पहचानता तक नहीं था।

‘चरणदास चोर’ थी करियर की पहली फिल्मः स्मिता के फ़िल्मी करियर की शुरुआत अरुण खोपकर की डिप्लोमा फ़िल्म से हुई, लेकिन मुख्यधारा के सिनेमा में स्मिता ने श्याम बेनेगल की फिल्म ‘चरणदास चोर’ से एंट्री ली थी। इसका किस्सा भी दिलचस्प है। श्याम बेनेगल ने अपने लेख में लिखा है कि उन दिनों वह अपनी फ़िल्म निशांत के लिए एक नए चेहरे की तलाश कर रहे थे। तब उनके साउंड रिकार्डिस्ट हितेन्दर घोष ने स्मिता पाटिल के नाम का जिक्र किया जो स्मिता के दोस्त थे। स्मिता से मिले और फिल्म में लेने से पहले श्याम बेनेगल उनका छोटा सा ऑडिशन लेना चाहते थे। इसके बाद स्मिता बेनेगल की बाल फ़िल्म ‘चरणदास चोर’ में प्रिंसेस के रोल के लिए चुनी गईं।

मरने के बाद दुल्हन की तरह विदा किया गयाः मैथिली राव अपनी किताब में लिखा है कि राज कुमार के लेट कर मेकअप कराते देख स्मिता भी अपने मेकअप मैन से वैसे ही मेकअप करने को कहतीं। लेकिन उनके मेकअप आर्टिस्ट ने मेकअप करने से ये कहते हुए मना कर दिया कि, ऐसा लगेगा जैसे किसी मुर्दे का मेकअप कर रहे हैं। तब स्मिता ने कहा था जब मैं मर जाऊंगी तो मुझे सुहागन की तरह तैयार करना। और उस 13 दिसंबर 1986 के मनहूस दिन स्मिता के मरने के बाद मेकअप मैने ने उनकी आखिरी इच्छा पूरी करते हुए उनके शव को दुल्हन की तैयार किया था। स्मिता जब मरीं प्रतीक बब्बर महज 15 दिन के थे।

दो बार मिला नेशनल अवॉर्डः स्मिता पाटिल 70 की दशक की ऐसी अभिनेत्री रहीं जब 1977 में फिल्म ‘भूमिका’ के लिए राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से हासिल किया और फिर 1981 में आई फिल्म ‘चक्र’ के लिए भी नेशनल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया।

Hindi News के लिए हमारे साथ फेसबुक, ट्विटर, लिंक्डइन, टेलीग्राम पर जुड़ें और डाउनलोड करें Hindi News AppOnline game में रुचि है तो यहां क्‍लिक कर सकते हैं।

Next Stories
1 ‘उनके जीवन में मेरी अहमियत..’ ऐश्वर्या राय और अभिषेक बच्चन की शादी में नहीं बुलाई गई थीं रानी मुखर्जी, एक्ट्रेस ने कही थी ये बात…
2 ‘ऐसे काम ही क्यों करते हो जो इतना ड्रामा करना पड़े…’, सुधीर चौधरी बोले पाकिस्तान से धमकी मिल रही है तो बॉलीवुड एक्टर ने कसा तंज
3 सुनीता बेबी के डांस का एक और वीडियो हुआ वायरल, ‘फेयर एंड लवली महंगी कर दी’ गाने पर जमकर लगाए ठुमके
IPL 2020 LIVE
X