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खालिस्तानी संसद पहुंच गए, भगवान ही बचाए- संगरूर से जीते सांसद ने की भिंडरावाले की तारीफ तो भड़क गये फिल्ममेकर

सिमरनजीत सिंह मान ने कहा कि ‘यह हमारे पार्टी कार्यकर्ताओं और संत जरनैल सिंह भिंडरावाले की शिक्षाओं की जीत है।’ इस पर फिल्ममेकर अशोक पंडित भड़क गये।

Akali Dal II Ashoke Pandit II Sangrur Lok Sabha bypoll
शिरोमणि अकाली दल के सिमरनजीत सिंह मान (Photo Source – ANI)

पंजाब के संगरूर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव में अकाली दल के नेता सिमरनजीत सिंह मान ने जीत हासिल की है। इस सीट से पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान सांसद थे। हालांकि जीत के बाद ही सिमरनजीत सिंह मान विवादों में आ गये हैं। फिल्ममेकर अशोक पंडित ने सिमरनजीत सिंह पर तंज कसा है।

जीत के बाद मीडिया से बात करते हुए सिमरनजीत सिंह मान ने कहा कि ‘यह हमारे पार्टी कार्यकर्ताओं और संत जरनैल सिंह भिंडरावाले की शिक्षाओं की जीत है।’ इस पर फिल्ममेकर अशोक पंडित भड़क गये। अशोक पंडित ने ट्विटर पर लिखा कि ‘भगवान इस देश की रक्षा करें। एक खालिस्तानी अब संसद में पहुंच गया।’

लोगों की प्रतिक्रियाएं: सिमरनजीत सिंह मान के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वराज आशीष जैन नाम के यूजर ने लिखा कि ‘इससे पहले अब यह देखना है कि लोकसभा स्पीकर ओम बिरला जी सिमरनजीत सिंह मान को देश की एकता और अखंडता के लिए शपथ ग्रहण करा पाते हैं या नहीं?’ संजीव कुमार अरोरा ने लिखा कि ‘ऐसे लोग सांसद बन देश विरोधी गतिविधियों में भी लगे रहेंगे और देश की सुविधाओं का लाभ भी लेंगे।’

कृष्ण नाम के यूजर ने लिखा कि ‘जिन्होंने इनको वोट दिया उनकी भी इच्छा भी यही है। सोचिए इस सोच वाले कितने लोग पंजाब में भरे पड़े हैं। आचार्य नाम के यूजर ने लिखा कि ‘संसद और लोकतंत्र एक अलगाववादी के आगे विफल है। कैसे चुनाव आयोग ने ऐसे लोगों को चुनाव लड़ने की अनुमति दी?’

तानाराज नाम के यूजर ने लिखा कि ‘मुझे लगता है कि चुनाव आयोग और कानून की यह फिर से कमजोरी सामने आई है कि संदिग्ध उम्मीदवारों को चुनाव लड़ने के लिए मंजूरी मिल जाती है और सबसे बढ़कर वे लोग जो किसी भी राजनीतिक दल से ऐसे दागी उम्मीदवारों को चुनते हैं।’ एक यूजर ने लिखा कि ‘आपकी पार्टी इसे बचाने के लिए क्या कर रही है? विश्वगुरु कुछ क्यों नहीं कर सके?’

बता दें कि सिमरनजीत सिंह मान ने दूसरी बार लोकसभा चुनाव जीता है। 1989 में पंजाब की तरनतारन सीट से जेल में रहते हुए सांसद चुने गए थे। हालांकि उस वक्त तीन फुट लंबी कृपाण (तलवार) के साथ संसद में प्रवेश करने पर अड़ गये थे। उन्हें इसकी अनुमति नहीं मिली थी तब उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।

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